मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:48 IST

लीलावती हॉस्पिटल में स्पाइन सर्जरी के लिए AI वाला रोबोटिक ओ-आर्म शुरू

लीलावती हॉस्पिटल में स्पाइन सर्जरी के लिए AI वाला रोबोटिक ओ-आर्म शुरू
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

लीलावती हॉस्पिटल अँड रिसर्च सेंटर ने मॅझोर एक्स स्टील्थ एडिशन के साथ जुड़ा नेक्स्ट-जनरेशन एआई-सक्षम रोबोटिक ओ-आर्म(R) लॉन्च किया है। हॉस्पिटल के मुताबिक यह नई टेक्नोलॉजी वर्ल्ड-क्लास क्लिनिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर के जरिए इनोवेशन से चलने वाली, मरीज को केंद्र में रखने वाली हेल्थकेयर देने की उसकी प्रतिबद्धता में एक और अहम कदम है।

यह इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म पेचीदा स्पाइन सर्जरी के दौरान सर्जनों की मदद के लिए रीयल-टाइम 2डी और 3डी इंट्राऑपरेटिव इमेजिंग, एआई की मदद से सर्जिकल प्लानिंग, रोबोटिक गाइडेंस और एडवांस्ड नेविगेशन को एक साथ लाता है। हॉस्पिटल का कहना है कि यह सिस्टम रीढ़ की अंदरूनी बनावट अपने आप पहचानता है, उसकी नाप लेता है और सही स्क्रू साइज, सटीक दिशा और इम्प्लांट की सही जगह सुझाकर प्लानिंग को मजबूत करता है। साथ ही हर क्लिनिकल फैसले पर सर्जन का पूरा कंट्रोल बना रहता है।

सॉफ्टवेयर वर्टिब्रा, पेडिकल्स, एंडप्लेट्स और मुख्य शारीरिक निशानों को कुछ सेकंड में पहचानने के लिए एडवांस्ड एल्गोरिदम इस्तेमाल करता है। हजारों प्रमाणित सर्जिकल प्लानिंग पैरामीटर्स को देखकर वह सर्जनों को इम्प्लांट का साइज और सटीक दिशा सुझाता है। सर्जन क्लिनिकल स्टडी के आधार पर इस सुझाव को मान सकते हैं, बदल सकते हैं या ठुकरा सकते हैं। सर्जरी के दौरान रोबोटिक सिस्टम औजारों को लगातार ट्रैक करते हुए तय दिशा बनाए रखने में मदद करता है, जबकि ओ-आर्म(R) रीयल-टाइम जांच के लिए हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग देता है।

बताया गया है कि यह प्लेटफॉर्म रीढ़ से जुड़े कई विकारों के इलाज में मदद करता है। इनमें डीजनरेटिव स्पाइन डिसऑर्डर, स्कोलियोसिस, कायफोसिस, स्पाइन ट्रॉमा, ट्यूमर, इन्फेक्शन और रिवीजन स्पाइन सर्जरी शामिल हैं। जिन मिनिमली इन्वेसिव और पेचीदा सर्जरी में ज्यादा सटीकता चाहिए, वहां यह खास तौर पर काम का है। नेविगेशन की मदद वाली रोबोटिक टेक्नोलॉजी ने क्लिनिकल लक्षणों और सर्जरी के स्वरूप के हिसाब से स्पाइनल इम्प्लांट और पेडिकल स्क्रू लगाने में 95 से 99 फीसदी सटीकता साबित की है।

इस मौके पर लीलावती हॉस्पिटल अँड रिसर्च सेंटर के पर्मनंट ट्रस्टी श्री राजीव मेहता ने कहा, "लीलावती हॉस्पिटल में हम जो भी करते हैं, उसमें मरीजों की सुरक्षा को पहले रखते हैं और क्लिनिकल उत्कृष्टता देने वाली वर्ल्ड-लेवल एडवांस टेक्नोलॉजी में लगातार निवेश करते हैं।"

मेहता ने आगे कहा, "मॅझोर एक्स स्टील्थ एडिशन के साथ एआई-सक्षम रोबोटिक ओ-आर्म(R) का जुड़ना हमारे सर्जनों को सबसे अच्छे और अत्याधुनिक टूल्स देने की हमारी प्रतिबद्धता दिखाता है। इससे ज्यादा सटीकता, सुव्यवस्थित सर्जिकल प्रक्रिया और मरीजों के लिए बेहतर मेडिकल नतीजे मिल सकेंगे। यह निवेश भारत के मरीजों को वर्ल्ड-क्लास हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी आसानी से उपलब्ध कराने के हमारे नजरिए को और मजबूत करता है।"

लीलावती हॉस्पिटल अँड रिसर्च सेंटर के चीफ एक्झिक्युटिव्ह ऑफिसर डॉ. रवींद्र करंजेकर ने कहा, "मरीजों के लिए यह टेक्नोलॉजी स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में अहम तरक्की है। एआई की मदद वाली प्लानिंग, रोबोटिक गाइडेंस और रीयल-टाइम इमेजिंग से सर्जन खासकर पेचीदा और मिनिमली इन्वेसिव केसों में ज्यादा भरोसे के साथ बेहद सटीक सर्जरी कर पाते हैं।"

डॉ. करंजेकर के मुताबिक इम्प्लांट ज्यादा सटीक बैठने से टिश्यू को होने वाली तकलीफ कम हो सकती है, दोबारा सर्जरी की संभावना घटती है, अस्पताल में रुकना कम होता है और मरीज जल्दी ठीक होने में मदद पाता है। उन्होंने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी बेहतरीन गाइडेंस देती है, फिर भी सर्जरी से जुड़ा हर फैसला पूरी तरह संबंधित सर्जन को ही लेना होता है, जिससे मरीज के इलाज में क्लिनिकल एक्सपर्टीज को प्राथमिकता मिलती रहे।

हॉस्पिटल का कहना है कि एआई-सक्षम रोबोटिक ओ-आर्म(R) और मॅझोर एक्स स्टील्थ एडिशन के जुड़ने से उसने अत्याधुनिक मेडिकल टेक्नोलॉजी अपनाने में अपनी अग्रणी जगह और मजबूत की है। हॉस्पिटल के मुताबिक यह टेक्नोलॉजी सटीक इलाज के तरीकों को आगे बढ़ाती है, मरीजों के सेहत नतीजे सुधारती है और भारत में स्पाइन व न्यूरोसर्जिकल केयर के लिए नया मापदंड तय करती है।

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