लातूर में महा विधिक सेवा शिविर, न्यायमूर्ति मोरे बोले- जरूरतमंदों तक पहुंचे सरकारी योजनाएं
लातूर में महा विधि सेवा शिविर और सरकारी योजनाओं के महामेले का उद्घाटन हुआ।
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लातूर, 24 तारीख: सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से समाज का कोई भी पात्र और जरूरतमंद आदमी छूटना नहीं चाहिए। इसके लिए न्याय व्यवस्था और प्रशासन को बहुत संवेदनशीलता से काम करना होगा। यह बात मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ के न्यायमूर्ति और लातूर जिले के पालक न्यायमूर्ति संदीपकुमार मोरे ने कही। वे लातूर के दिवाणजी मंगल कार्यालय में हुए महा विधिक सेवा शिविर और सरकारी योजनाओं के महामेले के उद्घाटन पर बोल रहे थे।
न्यायमूर्ति मोरे ने बताया कि ऐसे लोगों तक कानूनी जानकारी और सरकारी योजनाएं पहुंचाना जरूरी है और इसी के लिए विधिक सेवा समिति की तरफ से महा विधिक सेवा शिविर लगाए जा रहे हैं। उनके मुताबिक सरकार आम लोगों की भलाई के लिए कई योजनाएं चलाती है। विधिक सेवा समिति महामेला लगाकर इन योजनाओं के बारे में जागरूकता फैला रही है, जिससे जरूरतमंदों तक जानकारी पहुंचने में मदद मिलेगी। समिति के जरिए आम नागरिकों को मुफ्त कानूनी सलाह और मदद के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का फायदा सीधे लोगों तक पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
यह शिविर और महामेला राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और महाराष्ट्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर लातूर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला प्रशासन ने मिलकर लगाया। कार्यक्रम का उद्घाटन अनोखे ढंग से वृक्ष जलार्पण यानी पौधे को पानी चढ़ाकर किया गया। इसके जरिए लातूर जिले की सूखे जैसी हालत से निपटने के लिए जल संरक्षण, पानी की बचत और पर्यावरण की रक्षा का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में औरंगाबाद खंडपीठ के न्यायमूर्ति सुशील घोडेस्वार, प्रमुख जिला व सत्र न्यायाधीश संजय भारुका, जिलाधिकारी डॉ. भारत बास्टेवाड, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल कुमार मीना, महानगरपालिका आयुक्त राहुल कुलकर्णी, पुलिस अधीक्षक अमोल तांबे, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व्यंकटेश गिरवलकर और जिला वकील मंडल के अध्यक्ष एड. शिवकुमार जाधव मौजूद थे। इनके अलावा न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, वकील, पक्षकार, अलग-अलग योजनाओं के लाभार्थी और बड़ी संख्या में नागरिक भी आए।
न्यायमूर्ति सुशील घोडेस्वार ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय न्यायपालिका और प्रशासन पर खास जिम्मेदारी आती है। ऐसे वक्त सबको संवेदनशीलता से काम करके लोगों की मदद करनी चाहिए। नागरिकों को उनके कानूनी अधिकार दिलाने के साथ-साथ ऐसे शिविरों के जरिए जनकल्याणकारी योजनाएं सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाने की कोशिश करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि योजनाओं का प्रचार किया जाए और ज्यादा से ज्यादा लोगों को उनका फायदा मिले।
प्रमुख जिला व सत्र न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष संजय भारुका ने प्रस्तावना में बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण की शुरुआत सबसे निचले तबके के वंचित और कमजोर लोगों को न्याय दिलाने के लिए हुई थी। अलग-अलग कार्यक्रमों से ऐसे लोगों को न्याय दिलाने की कोशिश हो रही है। इस शिविर में न्याय व्यवस्था, प्रशासन और कई सरकारी विभाग एक ही छत के नीचे आकर लोगों की समस्याएं सुलझाने और उन्हें योजनाओं का फायदा देने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक न्याय की जानकारी और न्याय का मौका हर किसी को मिले, यही इस शिविर का मकसद है।
जिलाधिकारी डॉ. भारत बास्टेवाड ने कहा कि सरकारी योजनाओं को असरदार ढंग से लोगों तक पहुंचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जो पहल की है, वह जिला प्रशासन के लिए काम की साबित होगी। उन्होंने बताया कि कई साल से अटके भूमि अधिग्रहण के मुआवजे का भुगतान करने की प्रशासन की कोशिशों में प्राधिकरण ने सहयोग किया है, जिससे किसानों को मुआवजा देने की कार्रवाई तेज हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल पानी की किल्लत है, इसलिए सब लोग पानी का किफायत से इस्तेमाल करें।
शिविर के आयोजन में अच्छा योगदान देने वाले न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों का सम्मान किया गया। संचालन न्यायाधीश मधुमिता निकम और नेहा नागरगोजे ने किया और आभार सचिव व्यंकटेश गिरवलकर ने जताया।
महामेले में होटल, गारमेंट और डेयरी कारोबार के लिए बैंक कर्ज की मंजूरी के पत्र और चेक दिए गए। अढ़ाई करोड़ रुपये से ज्यादा का समूह बैंक कर्ज बांटा गया। कृषि और पशुपालन विभाग की तरफ से 75 प्रतिशत अनुदान पर बकरी समूह, कुआं मरम्मत की पूर्व सहमति के पत्र, ट्रैक्टर और कंबाइन हार्वेस्टर दिए गए। इसके अलावा आयुष्मान कार्ड, दिव्यांगों के लिए स्मार्टफोन, श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल, आवास की चाबियां, बेबी केयर किट और ड्राइविंग लाइसेंस भी बांटे गए। पुलिस ने जो चोरी का माल बरामद किया था, वह उसके असली मालिकों को लौटाया गया।
इस मौके पर लातूर जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया। इसमें करीब 87 लोगों का ब्लड प्रेशर, 85 का डायबिटीज, 37 की सामान्य खून की जांच, 25 का एक्स-रे और 3 लोगों का कैंसर टेस्ट हुआ। 90 पात्र लोगों के आयुष्मान भारत कार्ड बनाए गए और 32 लोगों को निक्षय मित्र के तौर पर दर्ज किया गया। जांच में ब्लड प्रेशर के 9 और डायबिटीज के 4 संदिग्ध मरीज मिले। स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी को आगे की जरूरी जांच और सही इलाज के लिए मार्गदर्शन दिया।
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