बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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21:13 IST

लासूर स्टेशन में इंदुरीकर महाराज का कीर्तन, व्यसन और किसान आत्महत्या पर खरी बात

लासूर स्टेशन में हुए कीर्तन में इंदुरीकर महाराज ने नशे, परिवार, किसान आत्महत्या और ग्रामीण शिक्षा पर बात की।

लासूर स्टेशन में इंदुरीकर महाराज का कीर्तन, व्यसन और किसान आत्महत्या पर खरी बात तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

लासूर स्टेशन में कीर्तनकार इंदुरीकर महाराज का कीर्तन हुआ। इसमें उन्होंने बढ़ती नशाखोरी, परिवारों के रिश्तों में आती दूरी, किसान आत्महत्या और ग्रामीण शिक्षा की अहमियत जैसे सामाजिक सवालों पर खुलकर बोलते हुए समाज को जगाने की कोशिश की।

संत ज्ञानेश्वर महाराज की अलौकिक प्रतिभा का गौरव करते हुए इंदुरीकर महाराज ने कहा कि ज्ञानेश्वरी सिर्फ एक ग्रंथ नहीं है, बल्कि सिर्फ नौ साल के एक बालक के रचे अमृत का सागर है।

इस कार्यक्रम का आयोजन शिवसेना के उप जिला प्रमुख नितीन कांजुणे पाटील और नाभिक समाज, लासूर स्टेशन की ओर से किया गया था। विधान परिषद के पूर्व नेता प्रतिपक्ष विधायक अंबादास दानवे कार्यक्रम में मुख्य रूप से मौजूद थे।

इंदुरीकर महाराज ने आज के युवाओं के नशे की चपेट में फंसने पर चिंता जताई। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नशे से दूर रहें, अपने माता-पिता की उम्मीदें पूरी करें और अपने जीवन को सही दिशा दें। लड़कियों के घर छोड़कर चले जाने की घटनाओं पर बोलते हुए उन्होंने माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद, आपसी भरोसे और संस्कार की अहमियत पर जोर दिया।

ज्ञानेश्वरी में बताए गए आध्यात्मिक और वैचारिक विचारों का महत्व समझाते हुए इंदुरीकर महाराज ने कहा कि हम सिर्फ कीर्तनकार नहीं हैं, बल्कि विठ्ठल-रखुमाई का संदेश समाज तक पहुंचाने वाले सेवक हैं।

उन्होंने कहा कि कीर्तन सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि समाज को जगाने और युवाओं को सही राह दिखाने का असरदार माध्यम है। इतिहास अपने कर्तृत्व से लिखा जाता है, यह कहते हुए उन्होंने देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों के योगदान का गौरव किया। उनके कीर्तन में आध्यात्मिक विचारों के साथ सामाजिक जिम्मेदारी, पारिवारिक मूल्यों और जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया रखने का संदेश दिया गया।

सूखे और किसानों की समस्याओं पर बोलते हुए उन्होंने साफ कहा कि आत्महत्या किसी भी समस्या का हल नहीं है। उन्होंने कहा कि संकटों का हिम्मत से सामना करके जीवन में रास्ता निकालना जरूरी है, और इस तरह किसानों के सवालों की ओर ध्यान खींचा। साथ ही उन्होंने राय रखी कि ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा मिले, इसके लिए जिला परिषद के स्कूलों को टिकाए रखना और उनकी अहमियत को बचाए रखना जरूरी है।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र नाभिक महामंडल के राज्य सलाहकार दिलीप अनर्थे, सुधाकर आहेर, दादासाहेब काळ, दिलीप गवली, अण्णा, रणजि मथुरिया, दिलीप विश्वासु, अशोक पवार, सोमिना तावरे और उद्योगपति रितेश चंडालिया समेत कई मान्यवर मौजूद थे।

कार्यक्रम की सफलता के लिए मोहसीन बागवान, भैय्या लिगायन, प्रतीक खडेलवाल, आकाश भगुरे, अशोक घोडके, राजू तुपे, विजय भाले, शुभम धने, मधुकर लिगायत, ज्ञानेश्वर औटी और बापू समेत कार्यकर्ताओं ने खास मेहनत की।

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