लालपरी की कमाई से निजी बसों का किराया भरने का आरोप, एस.टी. कर्मचारियों में चिंता
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महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल की लालपरी की आमदनी निजी किराये की बसों का किलोमीटर भाड़ा चुकाने में लगने का आरोप उठा है।
मुंबई : महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल की लालपरी की कमाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि निजी किराये (भाड़े पर) पर चल रही शिवाई ई-बस और एसी बसों का किलोमीटर के हिसाब से बनने वाला भाड़ा इसी कमाई से चुकाया जा रहा है। एस.टी. कर्मचारियों में चिंता है कि इस आर्थिक नीति से महामंडल की माली हालत पर और बोझ पड़ रहा है।
लालपरी आम लोगों की जीवनवाहिनी मानी जाती है। गांव और शहर, दोनों जगह रोज लाखों यात्रियों को सेवा देने वाली यह बस महामंडल की आमदनी का अहम जरिया है। ऐसे में अपनी बसों से आने वाला राजस्व अगर निजी ठेकेदारों की बसों का भाड़ा भरने में जाए, तो महामंडल की आर्थिक योजना पर सवाल उठना लाजमी है।
कर्मचारियों की शिकायत है कि महामंडल की अपनी बसों की मरम्मत, टायर की खरीद, नए पुर्जों और नियमित देखभाल के लिए काफी पैसा नहीं मिल रहा। बताया जा रहा है कि इसी वजह से बसों की हालत खराब हो रही है, तकनीकी खराबी आ रही है और कई बार फेरे रद्द करने पड़ते हैं।
दूसरी तरफ निजी किराये की बसों को किलोमीटर के हिसाब से तय भाड़ा देना पड़ता है। इसलिए अगर इन गाड़ियों को उम्मीद के मुताबिक यात्री न मिलें, या वे खाली दौड़ें, तब भी महामंडल पर आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
कर्मचारियों की अपेक्षा है कि महामंडल की आर्थिक योजना का असर एस.टी. कर्मचारियों की तनख्वाह, महंगाई भत्ते, वेतन के फर्क (वेतन का फर्क) और दूसरी वैधानिक देनदारियों पर न पड़े। उनका यह भी कहना है कि यात्रियों को सुरक्षित और नियमित सेवा देने के लिए अपनी बसों की देखभाल को पहले रखना जरूरी है।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें ये हैं: लालपरी से आने वाले राजस्व को पहले महामंडल की अपनी बसों की देखभाल पर खर्च किया जाए। नई लालपरी बसें खरीदने के लिए अलग फंड दिया जाए। निजी किराये की बसों के किलोमीटर दरों और करारों की पारदर्शी आर्थिक समीक्षा हो। महामंडल की आमदनी के इस्तेमाल और निजी ठेकेदारों को दी जा रही रकम का ब्योरा सार्वजनिक किया जाए। और एस.टी. कर्मचारियों की तनख्वाह, महंगाई भत्ता और बकाया देनदारियां समय पर चुकाई जाएं।
कहा जा रहा है कि लालपरी सिर्फ एक बस नहीं, महाराष्ट्र की आम जनता की जीवनवाहिनी है। उसका वजूद, महामंडल का आर्थिक हित और कर्मचारियों का भविष्य बचाने के लिए प्रशासन से इस नीति पर दोबारा सोचने की मांग हो रही है। ऐसा न होने पर एस.टी. कर्मचारी और यात्री संगठन इस मुद्दे पर राज्यव्यापी आंदोलन का रुख अपना सकते हैं।
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