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21:14 IST

कुलदेवी के मंदिर न जा पाएं तो घर पर भी हो सकती है नवरात्रि की पूजा और गोद भराई

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो गई है। जो लोग कुलदेवी के मंदिर नहीं जा सकते, उनके लिए घर पर गोद भरने और पूजा करने का तरीका।

कुलदेवी के मंदिर न जा पाएं तो घर पर भी हो सकती है नवरात्रि की पूजा और गोद भराई तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो गई है और हर तरफ भक्ति का माहौल है। इन दिनों में देवी के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। कई परिवारों में इस दौरान कुलदेवी के दर्शन करने और उनकी गोद भरने को खास अहमियत दी जाती है।

लेकिन कई बार दूरी ज्यादा होती है, तबीयत ठीक नहीं रहती या कोई और अड़चन आ जाती है, जिसकी वजह से कुलदेवता के मंदिर जाना मुमकिन नहीं हो पाता। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या घर पर ही पूजा कर लेना चलता है।

परंपरा यह है कि पीढ़ियों से हम किसी एक देवी को कुलदेवी मानते आए हैं। नवरात्रि में उनके मंदिर जाकर हल्दी-कुमकुम चढ़ाया जाता है, गोद भरी जाती है और नैवेद्य दिखाया जाता है। माना जाता है कि इससे घर पर देवी की कृपा बनी रहती है। फिर भी ऐसा कोई नियम नहीं है कि नवरात्रि में मंदिर जाना ही पड़ेगा।

अगर किसी वजह से जाना संभव न हो, तो देवी को याद करके घर पर पूजा की जा सकती है। देवी सिर्फ मंदिर में नहीं, आपके मन में और घर में भी हैं। घर के बड़े-बुजुर्गों या गुरुजी से पूछकर आप घर पर ही पूजा कर सकते हैं।

महाराष्ट्र में देवी की गोद भरने की बहुत पुरानी परंपरा है। मंदिर जाते समय लोग साड़ी या ब्लाउज़ पीस, नारियल, हल्दी-कुमकुम, अक्षता, सुपारी, पान और फूल साथ ले जाते हैं। मंदिर न जा सकें तो टेंशन लेने की जरूरत नहीं, गोद घर पर भी भरी जा सकती है। इसके लिए सबसे पहले पूजाघर साफ करें।

देवी की तस्वीर के सामने दीया जलाएं और उन्हें हल्दी-कुमकुम, अक्षता और फूल चढ़ाएं। फिर एक थाली में साड़ी या ब्लाउज़ पीस, नारियल और पूजा का बाकी सामान रखकर देवी के सामने रखें। मन से नमस्कार करें और प्रार्थना करें। आखिर में आरती करें और नैवेद्य दिखाएं। हर घर में गोद भरने का तरीका अलग होता है, इसलिए आपके घर में जैसी रीत है, वैसे ही पूजा करें।

नवरात्रि के नौ दिनों में रोज सुबह जल्दी उठकर नहाएं और पूजाघर में दीया जलाएं। कुलदेवी का नाम लेकर उन्हें फूल चढ़ाएं। अगर आपको अपनी कुलदेवी का मंत्र मालूम है तो उसका जाप करें। मालूम न हो तो सबसे आसान मंत्र 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का जाप भी चलता है।

रोज देवी की आरती करें, कोई स्तोत्र पढ़ें और सात्विक नैवेद्य दिखाएं। कुछ घरों में घट बैठाते हैं और अखंड दीया जलाते हैं। यह सब अपने घर की परंपरा और अपने वक्त के हिसाब से करें। दूसरों को देखकर ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है। श्रद्धा से की गई छोटी पूजा भी देवी तक पहुंचती है।

गोद किस दिन भरी जाए, इसे लेकर कई लोगों को लगता है कि कोई खास दिन तय है। ऐसा नहीं है। कुछ घरों में पंचमी को भरते हैं, कुछ में अष्टमी को और कुछ में नवमी को। आपके घर में जिस दिन की रीत हो, उसी दिन भरें। कुछ भी पता न हो तो नवरात्रि के किसी भी एक दिन सहूलियत से गोद भर देना चलता है।

कई लोग डरते हैं कि मंदिर नहीं गए तो देवी नाराज हो जाएंगी या कुछ बुरा होगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता। देवी को हम माता कहते हैं, और मां भला अपने बच्चों से कब नाराज होती है। आप घर में घट स्थापना कर सकते हैं, या श्रद्धा से उनका नाम भर ले लें, तो भी वे प्रसन्न होती हैं। मन में बेवजह डर न लाएं।

नवरात्रि में देवी धरती पर आकर बुराई का नाश करती हैं और उसे अपने साथ ले जाती हैं। देवी ने महिषासुर को मारकर सबको बचाया था। इसलिए इन दिनों सिर्फ पूजा नहीं, अपने मन का डर, गुस्सा और बुरे विचार भी दूर करने होते हैं। घर में सब मिलकर पूजा और आरती करें तो घर में एकता रहती है और हमारी संस्कृति भी संजोई जाती है।

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