मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
19:48 IST

कोलेस्ट्रॉल का रिपोर्ट नॉर्मल दिखे तो भी दिल का खतरा हो सकता है, डॉक्टर की सलाह

कोलेस्ट्रॉल का रिपोर्ट नॉर्मल दिखे तो भी दिल का खतरा हो सकता है, डॉक्टर की सलाह
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

कोलेस्ट्रॉल का रिपोर्ट हाथ में आते ही ज्यादातर लोग सिर्फ यह देखकर तसल्ली कर लेते हैं कि रिपोर्ट में 'नॉर्मल' लिखा है या 'अॅबनॉर्मल'। मगर एक्सपर्ट्स का कहना है कि दिल की सेहत के लिए सिर्फ टोटल कोलेस्ट्रॉल की लेवल देखना काफी नहीं है। हर इंसान का LDL-C यानी लो-डेन्सिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल का टारगेट अलग-अलग हो सकता है। उम्र, फैमिली हिस्ट्री, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दूसरे रिस्क फैक्टर देखकर यह टारगेट तय किया जाता है।

मुंबई के 34 साल के विक्रम देसाई का उदाहरण इस बात को अच्छे से समझाता है। उनकी सालाना हेल्थ चेकअप में कोलेस्ट्रॉल लेवल लिमिट के अंदर थी। रेगुलर एक्सरसाइज करने वाले और फिट रहने वाले विक्रम को लगा कि उनकी सेहत बिल्कुल ठीक है।

लेकिन डॉक्टर से बात करने के बाद उन्हें पता चला कि लैब रिपोर्ट में दी गई सामान्य लिमिट और किसी शख्स के अपने पर्सनल LDL-C टारगेट में फर्क होता है। अगर फैमिली हिस्ट्री, डायबिटीज या दिल की बीमारी से जुड़ा कोई और रिस्क फैक्टर हो, तो LDL-C का टारगेट और भी सख्त हो सकता है।

LDL-C को अक्सर 'खराब कोलेस्ट्रॉल' कहा जाता है। इसकी लेवल बढ़ने पर ब्लड वेसल्स में चर्बी की परत यानी प्लाक जमा होने लगती है, जिसे अथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं। इससे ब्लड वेसल्स में रुकावट आ सकती है, जिससे दिल, दिमाग और बॉडी के बाकी हिस्सों तक खून का बहाव प्रभावित होता है। इसी वजह से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और पेरिफेरल आर्टरी डिसीज का खतरा बढ़ सकता है।

यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि किसी की उम्र कम होने, रेगुलर एक्सरसाइज करने या वजन कंट्रोल में रहने से यह गारंटी नहीं मिलती कि उसका LDL-C नहीं बढ़ा है। इसलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि रेगुलर चेकअप को नजरअंदाज न करें।

Cardiology Society of India यानी CSI की सलाह के मुताबिक, 18 साल की उम्र से ही लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना शुरू कर देना चाहिए, ताकि दिल की सेहत समय रहते ट्रैक की जा सके।

मुंबई के सैफी हॉस्पिटल में कन्सल्टेंट इंटरव्हेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. निमित शाह के मुताबिक, LDL-C का टारगेट हर इंसान के लिए एक जैसा नहीं होता। उम्र, फैमिली हिस्ट्री, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दूसरे रिस्क फैक्टर के आधार पर ही पर्सनल टारगेट तय होता है।

अगली बार हेल्थ चेकअप कराते वक्त सिर्फ रिपोर्ट के आंकड़े देखने के बजाय डॉक्टर से LDL-C को लेकर बात करना फायदेमंद हो सकता है। मरीज डॉक्टर से पूछ सकते हैं कि उनकी मौजूदा LDL-C लेवल क्या है, उनके लिए सही पर्सनल टारगेट कितना होना चाहिए, उनकी लेवल उस टारगेट के अंदर है या नहीं, और अगर नहीं है तो आगे के ऑप्शन क्या हैं।

बैलेंस्ड डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, वजन कंट्रोल और स्ट्रेस मैनेजमेंट से दिल की सेहत को मदद मिल सकती है। मगर कुछ लोगों में सिर्फ लाइफस्टाइल में बदलाव करने से LDL-C अपने आप जरूरी लेवल तक कम नहीं होता। ऐसे केस में डॉक्टर की सलाह पर लिपिड कम करने वाली दवाइयां जरूरी हो सकती हैं। इसलिए बिना डॉक्टर से पूछे खुद से दवा शुरू या बंद न करें, और मेडिकल एडवाइस लेना जरूरी है। रेगुलर चेकअप, अपने पर्सनल LDL-C टारगेट की जानकारी और डॉक्टर की गाइडेंस में इलाज, ये तीनों दिल की सेहत का ख्याल रखने में अहम कदम माने जाते हैं।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे