"मेरे भीम ने बहुत कष्ट किए, जाति-जाति में मत बांटो रे" गीत से सामाजिक एकता का संदेश
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देवरी में दिवाली की सुबह संगीत के कार्यक्रम में हजारों श्रोता पहुंचे, संविधान और भाईचारे वाले गीत को खुलकर दाद मिली।
देवरी, 6 तारीख: "मेरे भीम ने बहुत कष्ट किए, हमें जाति-जाति में मत बांटो रे... भारत को संविधान दिया, उसकी कद्र तुम बनाए रखो रे..." इस गीत से सामाजिक एकता, भाईचारे और संविधान के मूल्यों की बात उठी। दिवाली की मंगल सुबह सुरीली महफिल के साथ महापुरुषों के विचार भी गूंजे, तो मौजूद श्रोताओं ने इस गीत को खुलकर दाद दी।
दिनबंधु ग्रामीण विकास संस्था और मित्र परिवार, देवरी ने मिलकर धनत्रयोदशी के शुभ मुहूर्त पर शुक्रवार (6 तारीख) को तालुका क्रीड़ा संकुल मैदान में "दिवाली की सुबह... साथ सुरीले स्वरों की" नाम से संगीत का कार्यक्रम रखा था। इसमें हजारों संगीत प्रेमी पहुंचे। मकसद था कि गांव-देहात के लोगों को अच्छे सांस्कृतिक कार्यक्रम का मजा मिले और दिवाली की सुबह की शुरुआत सुरीले गीतों से हो।
पूर्व विधायक सहसराम कोरोटे, उपविभागीय पुलिस अधिकारी राजेश तटकरे, तहसीलदार धनंजय देशमुख, जिला परिषद सदस्य उषाताई शहारे, जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के संचालक प्रमोद संगिडवार, भंडारा-गोंदिया जिला संपर्क प्रमुख वीरेंद्र अंजनकर, चिचगड पुलिस स्टेशन के थानेदार जनार्दन हेगडकर, देवरी नगर पंचायत की उपाध्यक्ष प्रज्ञा संगिडवार और पार्षद आफताब शेख की खास मौजूदगी रही।
जाने-माने गायक और संगीतकार गोपाल सालोडकर और गायक यशराज यावले ने अपनी मीठी आवाज से श्रोताओं को बांधे रखा। "मैं बनूंगा सुपरस्टार छोटे उस्ताद" से पहचान बनाने वाली बाल गायिका स्वरा लाड की प्रस्तुति ने महफिल में अलग रंग भरा। सामाजिक संदेश वाले गीतों के साथ कई लोकप्रिय गीत भी पेश हुए। गीतों के जरिए समता, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश भी लोगों तक पहुंचा। सुबह के खुशनुमा माहौल में सजी इस महफिल को श्रोताओं ने भरपूर साथ दिया।
साज पर रामेश्वर काळे (की-बोर्ड), अभिषेक लोखंडे (तबला), विशाल पांडे (ढोलक) और नितीन गावंडे ने संगत की। विजय वाहोकार ने असरदार निवेदन किया। संचालन चेतन उईके ने संभाला और कुलदीप लांजेवार ने आभार माना।
गांव-देहात में सांस्कृतिक और संगीत कार्यक्रमों की परंपरा बनाए रखने के लिए संस्था और मित्र परिवार पिछले दो साल से इसे करा रहे हैं। इस तीसरे साल भी पहले से ज्यादा हजारों लोग पहुंचे, जिससे इस पहल को मिल रहा साथ साफ हुआ। कार्यक्रम की सोच और संयोजन मित्र परिवार, देवरी की ओर से रहा। इसे कामयाब बनाने में संस्था के पदाधिकारियों, मित्र परिवार के सदस्यों, स्वयंसेवकों, दानदाताओं, प्रायोजकों और शुभचिंतकों ने सहयोग दिया।
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