कैट मॉक टेस्ट में स्कोर अटका है? एनालिसिस के ये 5 स्टेप पर्सेंटाइल बढ़ा सकते हैं
मॉक टेस्ट देने के बाद उसका सही विश्लेषण करना कैट की तैयारी में सबसे जरूरी है। पांच स्टेप में समझिए कि गलतियां कैसे सुधारें।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
एमबीए की तैयारी करने वाले ज्यादातर उम्मीदवार एक ही शिकायत करते हैं कि मॉक टेस्ट में स्कोर बढ़ ही नहीं रहा। कई लोग लगातार टेस्ट दे रहे हैं, किसी ने 10 तो किसी ने 15 मॉक दे दिए, फिर भी नंबर वहीं के वहीं अटके हैं। क्वांट या DILR के मुश्किल सेट देखते ही कई उम्मीदवारों के पसीने छूट जाते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो अपनी रणनीति पर ध्यान दीजिए। सिर्फ मॉक टेस्ट देना आधी लड़ाई है, असली खेल टेस्ट के बाद शुरू होता है।
अक्सर एस्पिरेंट्स कैट (CAT) मॉक का स्कोर देखकर डिप्रेशन में चले जाते हैं या बिना कोई एनालिसिस किए अगले टेस्ट की तरफ भागते हैं। कैट जैसी बड़ी परीक्षा निकालने के लिए 'क्वांटिटी' से ज्यादा 'क्वालिटी' मायने रखती है। रोज दो मॉक दें और उनका एनालिसिस न करें, तो वे किसी काम की नहीं। इसके उलट, सिर्फ एक मॉक दें और उसका गहराई से एनालिसिस कर लें, तो आप वही गलतियां दोबारा करने से बच जाएंगे। कैट मॉक का एनालिसिस जरूरी है, क्योंकि इससे अपनी गलतियां समझ में आती हैं और सुधार का मौका भी बढ़ता है।
पहला स्टेप यह है कि उन सवालों की लिस्ट बनाइए जो आपने हल ही नहीं किए थे। मॉक सबमिट करते ही सबसे पहले इन्हीं सवालों पर आइए। खुद से पूछिए कि ये सवाल वक्त की कमी से छूटे या सवाल देखते ही दिमाग ब्लैंक हो गया था। वक्त कम पड़ा है तो मतलब टाइम मैनेजमेंट या सवालों के चुनाव में कमी है। अगर बेसिक कॉन्सेप्ट ही पता नहीं था, तो उसे अपनी नोटबुक में लिखिए और उस टॉपिक का बेसिक फौरन दोहराइए।
दूसरा स्टेप सिली मिस्टेक का लॉग बनाना है। कैट यानी कॉमन एडमिशन टेस्ट में आपका सबसे बड़ा दुश्मन आपका अपना ओवरकॉन्फिडेंस और जल्दबाजी होती है। कैलकुलेशन में प्लस-माइनस की गलती या सवाल ठीक से न पढ़ना, ये सब सिली मिस्टेक हैं। 'Mistake Log' नाम की एक अलग डायरी बनाइए। हर मॉक के बाद अपनी सिली मिस्टेक उसमें लाल पेन से लिखिए। हफ्ते में दो बार इसे पढ़ने से वैसी बेवकूफी भरी गलतियां दोबारा नहीं होंगी।
तीसरा स्टेप है इगो ट्रैप से बाहर निकलना। क्वांट या DILR में उम्मीदवार अक्सर किसी एक सवाल को अपने ईगो पर ले लेते हैं कि यह सवाल मुझसे कैसे नहीं हो रहा, 5 मिनट हो गए। यही जाल बाकी आसान सवाल हल नहीं होने देता। एनालिसिस करते वक्त देखिए कि कहीं आपने ऐसे सवाल पर 7-8 मिनट तो नहीं गंवाए जो आखिर में गलत निकला। कैट में 'सवाल छोड़ने की कला' ही सबसे बड़ा हुनर है।
चौथा स्टेप निगेटिव मार्किंग पर लगाम लगाना है। कैट में 33% सवाल भी सही हो जाएं तो 99 पर्सेंटाइल पक्का होता है। इसके बावजूद उम्मीदवार अंधाधुंध तुक्के या गेसवर्क लगाते हैं। एनालिसिस में जांचिए कि कितने सवाल गलत अंदाजे या जल्दबाजी की वजह से गलत हुए। आईआईएम की एंट्रेंस परीक्षा में सटीकता सुधारने के लिए तय कीजिए कि जब तक 80-90% यकीन न हो, तब तक ऑप्शन टिक नहीं करेंगे।
पांचवां स्टेप री-सॉल्विंग का नियम है। मॉक के दौरान जो सवाल आपसे हल नहीं हुए या गलत हुए, उन्हें कोई सॉल्यूशन देखे बिना दोबारा खुद पेन लेकर हल कीजिए। वीडियो सॉल्यूशन देखना आसान होता है, लेकिन जब तक आप अपने हाथ से पेन नहीं चलाएंगे, बात दिमाग में नहीं बैठेगी। अगले मॉक से पहले उन पुराने गलत सवालों की एक बार फिर प्रैक्टिस कर लीजिए।
एनालिसिस का एक सीधा नियम भी है। 3 घंटे की कैट मॉक देने के बाद कम से कम 2 घंटे उसके एनालिसिस में लगाइए। अगर आपने 3 घंटे का टेस्ट दिया और स्कोरकार्ड सिर्फ 15 मिनट देखा, तो आप अपनी तैयारी के साथ बेईमानी कर रहे हैं। कैट मॉक का एनालिसिस ही आपकी असली तैयारी को सामने लाता है।