जुई गोगरी बोलीं: नवरात्र के नौ दिन ही नहीं, हर दिन औरतों का होता है
'सनई चौघडे' की असावरी यानी जुई गोगरी ने नवरात्र पर कहा कि खुद पर भरोसा रखना ही असली स्त्रीशक्ति है। कॉलेज के दिनों का किस्सा और गरबा की बात भी बताई।
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नवरात्र यानी भक्ति, उमंग और जोश के नौ दिन। इन दिनों देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है और स्त्रीशक्ति का जागर किया जाता है। लेकिन मराठी अभिनेत्री जुई गोगरी का कहना है कि स्त्रीशक्ति का उत्सव सिर्फ नवरात्र के नौ दिनों तक सीमित नहीं है, हर दिन औरतों का ही होता है।
'सनई चौघडे' सीरियल में परब परिवार की सीधी-सादी, प्यारी और सबकी लाडली असावरी का किरदार निभाने वाली जुई ने स्त्रीशक्ति, आत्मविश्वास और अपने सपनों के लिए लड़ने की अहमियत पर अपनी राय रखी। उन्होंने यह भी बताया कि नवरात्र में छुट्टी मिल जाए तो वे गरबा खेलने जरूर जाती हैं।
स्त्रीशक्ति की बात करते हुए जुई ने कहा कि जिंदगी की मुश्किलों का सामना करने के लिए खुद पर भरोसा होना बहुत जरूरी है। औरत एक ही वक्त में कई रोल निभाती है। परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए वह अपने करियर में भी आगे बढ़ने की कोशिश करती है। निजी जिंदगी और करियर के बीच तालमेल बिठाकर अपने सपने पूरे करने में लगे रहना भी स्त्रीशक्ति ही है, ऐसा जुई का मानना है।
जुई यह भी जोर देकर कहती हैं कि औरतों को खुद को कभी कम नहीं समझना चाहिए। सपने कितने भी बड़े हों या जिंदगी में कितनी भी मुसीबतें आएं, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर उनका सामना किया जा सकता है। अपनी क्षमता पर यकीन रखकर हर औरत को अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए, यही संदेश जुई ने दिया।
अपने भीतर की स्त्रीशक्ति का एहसास कब हुआ, इस बारे में बोलते हुए जुई ने अपनी जिंदगी का एक अहम किस्सा याद किया। उन्होंने बताया कि कॉलेज के दिनों में उनके परिवार का नया घर लेने का काम चल रहा था। उस वक्त जुई और उनकी बहन ने मिलकर पुराना घर बेचने से लेकर नया घर खरीदने तक की कई जिम्मेदारियां निभाईं।
उस अनुभव से जुई को समझ आया कि कम उम्र में भी हम कई बड़े काम कर सकते हैं और हमारे अंदर वह क्षमता है। उनके मुताबिक औरत कोई काम करने की ठान ले तो उसे जरूर कर सकती है। कितनी भी अड़चनें आएं, उनसे रास्ता निकालने का भरोसा हर औरत में होना चाहिए।
नवरात्र के त्योहार पर बात करते हुए जुई ने अपने घर की परंपरा भी बताई। उन्होंने कहा, "मैं दरअसल जैन हूं। इसलिए गुजराती लोगों की तरह हमारे यहां नवरात्र का बहुत बड़ा सेलिब्रेशन नहीं होता। लेकिन हमारी जो कुलदेवी है, उसकी हम नौ दिन घर पर आरती करते हैं। अब शूटिंग की वजह से उसके लिए ज्यादा वक्त नहीं मिलता। पर जब छुट्टी होती है, तब मैं गरबा खेलने जरूर जाती हूं।"
जुई ने बताया कि गरबा खेलते हुए उन्हें बहुत अच्छा लगता है। उनके लिए गरबा सिर्फ खुशी का हिस्सा नहीं, बल्कि देवी की आराधना से जुड़ा अनुभव है। उनके मुताबिक गरबा से माहौल में एक तरह की पवित्रता और दैवी एहसास महसूस होता है।
नवरात्र के मौके पर हर औरत को संदेश देते हुए जुई ने आत्मविश्वास से जीने की अपील की। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा यही कहूंगी कि नवरात्र के ये सिर्फ नौ दिन औरतों के नहीं होते, बल्कि हर दिन औरतों का होता है। इसलिए अच्छे से जिएं, आपको जो करना है वह करें और डटकर करें। 'मुझे यह करना ही है,' ऐसा भरोसा खुद पर रखें और उसी हिसाब से जिएं।"