मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
20:26 IST

जामीन मिलते ही इमान माझारी और पति फिर गिरफ्तार, आतंकवाद रोधी अदालत ने पुलिस की कस्टडी मांग ठुकराई

पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ता इमान माझारी और उनके पति हादी अली चट्टा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के फौरन बाद नए मामले में दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया, जिस पर मानवाधिकार परिषद ने कड़ा एतराज जताया है।

जामीन मिलते ही इमान माझारी और पति फिर गिरफ्तार, आतंकवाद रोधी अदालत ने पुलिस की कस्टडी मांग ठुकराई
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

पाकिस्तान की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता इमान माझारी और उनके पति हादी अली चट्टा को एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया गया है, और इस गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मानवाधिकार जगत में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। दोनों को गिरफ्तार करने से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाते हुए साफ आदेश दिया था कि उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए। मगर इस अदालती राहत की खुशी मनाने का मौका भी नहीं मिला था कि इस्लामाबाद के कोहसार पुलिस स्टेशन में दर्ज एक नए मामले के आधार पर पुलिस ने दोनों को फिर हिरासत में ले लिया।

इतनी अचानक और जल्दबाजी में की गई इस गिरफ्तारी पर पाकव्याप्त जम्मू-कश्मीर की मानवाधिकार परिषद यानी HRC-PoJK ने बेहद गंभीर चिंता जताई है। परिषद ने शनिवार, 19 सितंबर 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी कर सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस गिरफ्तारी का कानूनी आधार सार्वजनिक किया जाए।

मुजफ्फराबाद स्थित इस संगठन HRC-PoJK ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। संगठन का कहना है कि किसी भी नागरिक से पूछताछ करने या उस पर मुकदमा चलाने का अधिकार सरकार को जरूर है, मगर सुप्रीम कोर्ट के जमानत आदेश के तुरंत बाद की गई इस कार्रवाई पर कानून के राज और निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

संगठन ने साफ कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट किसी को जमानत दे, तो नए मामले में तुरंत की गई गिरफ्तारी अदालत के आदेशों की अनदेखी मानी जाती है। बयान में मांग की गई है कि प्रशासन तुरंत सामने आकर इस गिरफ्तारी के पीछे की असल वजह और कानूनी प्रावधान सार्वजनिक करे।

दोबारा गिरफ्तार करने के बाद इमान माझारी और हादी अली चट्टा को आतंकवाद रोधी अदालत यानी ATC में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान पुलिस ने आक्रामक रुख अपनाते हुए दोनों की 30 दिन की पुलिस कस्टडी मांगी। पुलिस प्रशासन ने अदालत में दलील दी कि नए मामले की जांच और गहन पूछताछ के लिए इतनी लंबी कस्टडी जरूरी है।

मगर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आतंकवाद रोधी अदालत ने पुलिस की 30 दिन की कस्टडी की मांग सीधे खारिज कर दी। अदालत ने पुलिस की इस अर्जी में दम न होने की बात कहते हुए दोनों को न्यायिक हिरासत यानी जेल भेजने का आदेश दिया। अदालत के इस फैसले से पुलिस को तगड़ा झटका लगा है, और HRC-PoJK ने अदालत के इस रुख का स्वागत किया है।

मानवाधिकार परिषद ने अपने बयान में पहले हुए शौकत नवाज मीर के मामले का भी खास तौर पर जिक्र किया। 30 जून 2026 को मुजफ्फराबाद के डिप्टी कमिश्नर के आदेश पर शौकत नवाज मीर को गिरफ्तार किए जाने की खबरें सामने आई थीं। उस वक्त भी प्रशासन की ओर से एक-दूसरे से उलट और अस्पष्ट दावे किए गए थे, जिस पर परिषद ने तुरंत पुख्ता स्पष्टीकरण मांगा था।

परिषद ने कहा कि इमान माझारी और हादी अली के मामले में भी वही बात दोहराई जा रही है, और आरोपियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना, उन्हें कानून तक बराबर पहुंच देना और निष्पक्ष सुनवाई का मौका देना राज्य की पहली जिम्मेदारी है। कानून के नाम पर नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का हनन न हो, इसलिए HRC-PoJK पूरे मामले और आगे होने वाली अदालती कार्यवाही पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे