जलगांव में सिंचाई के 3,885 कामों की जांच होगी, सूखे से निपटने में जुटी जिला परिषद
जिला परिषद अब तक हुए सिंचाई के कामों का फिजिकल ऑडिट कराएगी और दुरुस्ती के लिए डीपीआर बनाएगी।
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जलगांव जिले में इस साल अलनीनो के असर से बारिश ने धोखा दिया है। इससे खेती और सिंचाई का सवाल गंभीर हो गया है। सूखे को देखते हुए पानी की उपलब्धता बढ़ाने और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला परिषद प्रशासन हरकत में आ गया है।
जिले में अब तक हुए 3 हजार 885 कामों का फिजिकल ऑडिट किया जाएगा। इस जांच से जो दुरुस्ती और सुधार जरूरी निकलेंगे, उनका विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर बनाया जाएगा।
जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी करिश्मा नायर ने बताया कि यह रिपोर्ट मंजूरी के लिए जिला नियोजन मंडल के पास भेजी जाएगी। उन्होंने साफ किया कि सूखे से निपटने के लिए सिंचाई के काम तेजी से पूरे करने की योजना है और इन्हें मिशन मोड पर चलाया जा रहा है।
बारिश कम होने की वजह से सरकार ने जिले के सभी तालुकों में सूखा घोषित कर दिया है। ऐसे में सिर्फ नए काम हाथ में लेने के बजाय जिला परिषद का जोर इस बात की जांच पर है कि पहले हुए कामों का असल में कितना फायदा मिल रहा है। इसी वजह से 3 हजार 885 कामों का फिजिकल ऑडिट होगा।
ऑडिट के बाद डीपीआर बनेगा, तभी साफ होगा कि कितने कामों की दुरुस्ती जरूरी है और उसके लिए कितना फंड लगेगा। इसलिए जांच से लेकर मंजूरी की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है, इसी पर उपायों का असर टिका रहेगा।
जांच में जो जरूरी काम सामने आएंगे, उनका विस्तृत डीपीआर तैयार होगा। फिर प्रस्ताव मंजूरी के लिए जिला नियोजन मंडल को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इन कामों को शुरू करने का रास्ता खुलने की उम्मीद है। इससे पहले से बने कामों का बेहतर इस्तेमाल होगा और सिंचाई व्यवस्था की कमियां दूर करने पर जोर रहेगा।
करिश्मा नायर, सीईओ, जिला परिषद जलगांव, ने कहा कि जिले पर इस साल सूखे का साया है। 88 पानी की किल्लत का सामना कुछ तालुकों को बड़े पैमाने पर करना पड़ेगा। इसलिए सिंचाई के काम मिशन मोड पर किए जाएंगे। अब तक हुए सिंचाई के कामों का ऑडिट करके डीपीआर जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा।
बारिश में आए ठहराव से खेती पर संकट और गहरा गया है। ऐसे हालात में मौजूद पानी का सही इस्तेमाल, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और पानी जमा करने से जुड़े कामों को रफ्तार देना अहम होगा। इसी को देखते हुए जिला परिषद ने सिंचाई के काम जल्द पूरे करने की योजना बनाई है। सूखे से निपटने के लिए जरूरी कामों की प्लानिंग, असल हालत की जांच और सुधार के लिए फंड जुटाने की प्रक्रिया को इससे अहमियत मिली है।
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