जगदीश नगर में दुर्गा माता की स्थापना पर विवाद, पूर्व पार्षद ग्वालवंशी समेत दो पर केस दर्ज
गिट्टीखदान पुलिस ने शिकायत के आधार पर हरीश मोहन ग्वालवंशी और रोशन बबन यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में मामला दर्ज किया है।
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नागपुर के गिट्टीखदान पुलिस थाना क्षेत्र में आने वाले जगदीश नगर में दुर्गा माता की स्थापना और बैनर लगाने को लेकर विवाद हो गया है। इस मामले में गिट्टीखदान पुलिस ने पूर्व पार्षद हरीश मोहन ग्वालवंशी और रोशन बबन यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर हुई है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि धार्मिक आयोजन की तैयारी के दौरान बैनर लगाने पर आपत्ति जताई गई और गालीगलौज की गई। आरोप यह भी है कि कपड़े का बैनर फाड़ दिया गया और 12 अक्टूबर को प्रस्तावित जागरण कार्यक्रम नहीं होने देने की धमकी दी गई। मामला सामने आने के बाद इलाके में इसकी चर्चा है।
यहां यह साफ रहे कि पुलिस में मामला दर्ज होना आरोप साबित होने के बराबर नहीं है। घटना की असली परिस्थितियां, विवाद की वजह और शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं, यह पुलिस जांच के बाद ही पता चलेगा।
शिकायत जगदीश नगर के रहने वाले वीरबहादुर सिंह ठाकुर (40) ने गिट्टीखदान पुलिस थाने में दर्ज कराई है। उनके मुताबिक वे हर साल अपनी सोसाइटी में धार्मिक परंपरा के अनुसार दुर्गा माता की स्थापना करते हैं। इस साल भी उन्होंने स्थापना और उससे जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी की थी।
आरोप है कि 8 अक्टूबर को दोपहर करीब 3 बजे पूर्व पार्षद हरीश मोहन ग्वालवंशी और रोशन बबन यादव वहां पहुंचे। शिकायत के अनुसार दोनों ने दुर्गा माता की स्थापना और बैनर लगाने पर आपत्ति जताई। इसी बात पर कहासुनी शुरू हुई, जो कथित तौर पर विवाद में बदल गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दौरान उनके साथ गालीगलौज की गई और वहां लगा कपड़े का बैनर फाड़ दिया गया। 12 अक्टूबर के जागरण कार्यक्रम को नहीं होने देने की धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है। इसके बाद शिकायतकर्ता पुलिस के पास पहुंचे।
पुलिस के मुताबिक 11 अक्टूबर की रात शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 351(2), 324(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और उनसे जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रही है।
जांच में शिकायतकर्ता के बयान के साथ दूसरे पक्ष का बयान दर्ज करना और उपलब्ध सबूत देखना अहम होगा। विवाद की असली वजह क्या थी, बैनर को लेकर कोई पहले से अनुमति या आपत्ति का मसला था या नहीं, और घटना के वक्त क्या हुआ, इन बातों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। सीसीटीवी फुटेज या प्रत्यक्षदर्शी जैसे सबूत हों तो वे भी मददगार हो सकते हैं, लेकिन उनके होने की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
यह भी जांच का विषय होगा कि कथित धमकी किन हालात में दी गई, वहां और कौन लोग मौजूद थे और क्या दोनों पक्षों के बीच पहले से कोई विवाद था। इसके अलावा ग्वालवंशी के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज होने का जिक्र हो रहा है, लेकिन उन मामलों के FIR नंबर, थाने, धाराएं और मौजूदा कानूनी स्थिति की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
मामले में गिरफ्तारी हुई है या नहीं, आरोपियों को अदालत में पेश किया गया है या नहीं और जांच में अब तक क्या सामने आया है, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। फिलहाल मामला दर्ज हुआ है और जांच जारी है।