इटली में स्कूलों में बुर्का-निकाब पर बैन, विदेशी छात्रों की संख्या भी सीमित होगी
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में चेहरा ढंकने पर पाबंदी और विदेशी छात्रों पर सीमा तय करने का ऐलान किया।
यूरोप में इमिग्रेशन और सांस्कृतिक एकीकरण को लेकर चल रही बहस के बीच इटली की सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। फ्रांस, बेल्जियम और ऑस्ट्रिया जैसे देशों की नीतियों को देखते हुए इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ऐलान किया है कि देश के स्कूलों में बुर्का और निकाब पहनने पर पूरी तरह पाबंदी लगाई जाएगी। इसके साथ ही विदेशी स्टूडेंट्स के एडमिशन पर भी एक तय सीमा लगाई जाएगी। इससे जुड़ा नया बिल जल्द ही इटली की संसद और कैबिनेट में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
भूमध्य सागर के किनारे बसा इटली भौगोलिक रूप से यूरोप में आने वाले माइग्रेंट्स के लिए एक बड़ा एंट्री पॉइंट माना जाता है। पिछले कुछ सालों में मुस्लिम बहुल देशों से हुए बड़े पैमाने पर माइग्रेशन की वजह से इटली के समाज में कल्चरल इंटीग्रेशन, लोकल भाषा और नागरिकता के नियमों को लेकर लगातार बहस चल रही है। मेलोनी की सरकार ने अब स्कूलों को इस कल्चरल इंटीग्रेशन का केंद्र बनाने का फैसला किया है और एजुकेशन सिस्टम में बड़े बदलाव सुझाए हैं।
मेलोनी ने अपनी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली की यूथ विंग जिओवेंत्यू नाजिओनाले द्वारा आयोजित फेनिक्स नाम के नेशनल फेस्टिवल में यह पॉलिसी विस्तार से बताई। उन्होंने साफ कहा, "इटली में स्कूल जाते वक्त हर किसी को अपना चेहरा खुला रखना होगा। किसी भी असली या काल्पनिक परंपरा या धर्म के नाम पर किसी युवा महिला या लड़की को अपना चेहरा छिपाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।"
इस प्रस्ताव में मुख्य रूप से चेहरा पूरी तरह ढंकने वाले बुर्का और निकाब पर बैन लगाने की बात कही गई है। मेलोनी के मुताबिक, यह कदम सिर्फ डिसिप्लिन के लिए नहीं बल्कि महिलाओं की आजादी, इंडिविजुअल राइट्स और जेंडर इक्वालिटी बनाए रखने के लिए जरूरी है। स्कूलों में स्टूडेंट्स के चेहरे दिखना कम्युनिकेशन और सेफ्टी के लिहाज से बुनियादी बात मानी गई है।
नए बिल का दूसरा अहम पहलू यह है कि हर क्लास में विदेशी स्टूडेंट्स की संख्या पर कानूनी सीमा तय की जाएगी। इटली के एजुकेशन डेटा के मुताबिक, वहां के स्कूलों में करीब 11.6 प्रतिशत स्टूडेंट्स नॉन-इटालियन नागरिक हैं। सरकार का दावा है कि कई क्लासों में इटालियन भाषा न समझने वाले स्टूडेंट्स की तादाद बढ़ने से पढ़ाई की क्वालिटी और भाषा में बातचीत पर असर पड़ रहा है।
इस पर मेलोनी ने कहा, "अगर किसी क्लास में इटालियन भाषा न समझने वाला सिर्फ एक बच्चा है, तो टीचर और बाकी बच्चों की मदद से वह आसानी से भाषा सीख सकता है और बाकी सबके साथ जुड़ सकता है। लेकिन अगर भाषा न समझने वाले बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाए या वे बहुसंख्यक बन जाएं, तो इसे हम इंटीग्रेशन नहीं कह सकते, यह एक तरह की लापरवाही है।" उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि इटालियन बच्चों को अपने ही देश की क्लासों में माइनॉरिटी महसूस करना या नजरअंदाज होना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नई पॉलिसी के मुताबिक सिर्फ बच्चों पर ही नहीं, उनके पैरेंट्स पर भी सोशल जिम्मेदारी डाली गई है। जिन विदेशी स्टूडेंट्स के पैरेंट्स को इटालियन समाज और एजुकेशन सिस्टम में घुलमिल पाने में गंभीर दिक्कत आ रही है, ऐसे पैरेंट्स के लिए इटालियन भाषा सीखना कानूनन जरूरी कर दिया जाएगा।
मेलोनी ने कहा, "इटली आकर जो लोग अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, उन्हें हमारी भाषा सीखनी होगी, हमारी संस्कृति समझनी होगी और हमारे नियमों का सम्मान करना होगा। नए लोगों का स्वागत करने का यही एक सीरियस और सम्मानजनक तरीका हो सकता है।" इटली सरकार का लक्ष्य है कि संसद में बिल पेश होने के 60 दिनों के भीतर उसे मंजूरी दिलाकर कानून बना दिया जाए।