इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर को, पितृपक्ष में अन्न, तिल, फल और कपड़ों के दान की मान्यता
मंगलवार, 6 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। पितृपक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी पर दान की परंपरा बताई जाती है।
इस साल इंदिरा एकादशी का व्रत मंगलवार, 6 अक्टूबर को रखा जाएगा। यह एकादशी पितृपक्ष के दौरान पड़ती है, इसलिए इसकी धार्मिक अहमियत और बढ़ जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने, उपवास रखने और दान-धर्म करने की परंपरा है।
मान्यता है कि इंदिरा एकादशी पर दान करने से पूर्वजों को शांति मिलती है और परिवार पर भगवान विष्णु का आशीर्वाद बना रहता है। एकादशी पर दान को वैसे भी धार्मिक नजरिए से शुभ माना जाता है। चूंकि यह तिथि पितृपक्ष में आती है, इसलिए इस दिन किया गया दान पूर्वजों के प्रति आदर की निशानी माना जाता है। धार्मिक श्रद्धा के मुताबिक दान से पूर्वजों की आत्माओं को शांति और मुक्ति मिलती है, साथ ही घर में सुख और समृद्धि आती है।
अब बात उन चीजों की, जिनका दान इस दिन शुभ माना जाता है। सबसे पहले अन्नदान। अपनी हैसियत के हिसाब से किसी जरूरतमंद को चावल, आटा, दालें या दूसरी खाने की चीजें दी जा सकती हैं। पका हुआ खाना भी दान किया जा सकता है। जिनका बजट कम है, उनके लिए यह एक आसान तरीका हो सकता है।
दूसरा है तिल और पानी का दान। इस दिन तिल का दान धार्मिक नजरिए से अहम माना जाता है। अपनी परंपरा के अनुसार काले या सफेद तिल दान किए जा सकते हैं। इसके अलावा तांबे के बर्तन में पानी का दान करना भी अच्छा माना जाता है।
इंदिरा एकादशी के दिन जरूरतमंदों को मौसमी फल और हरी सब्जियां देना भी शुभ बताया गया है। साफ और पहनने लायक कपड़े दान करना भी ठीक माना जाता है। दान करते वक्त दिखावे के बजाय भक्ति और अपनी क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। धार्मिक श्रद्धा के अनुसार दान का मकसद जरूरतमंदों की मदद करना और पूर्वजों को याद करना है।
इस दिन के दान को लेकर यह भी माना जाता है कि भक्ति भाव से किया गया दान पूर्वजों की भूख और प्यास मिटाता है। कहा जाता है कि इससे सात पीढ़ियों तक के पूर्वजों को संतोष और मुक्ति मिलती है। साथ ही इस दिन विष्णु की पूजा और दान-धर्म करने से परिवार को ईश्वर का असीम आशीर्वाद मिलता है और वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
धर्म से जुड़ी ये बातें श्रद्धा और मान्यताओं पर आधारित हैं और पाठकों की जानकारी के लिए दी गई हैं। इससे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकार की सलाह लेना जरूरी है।