इंदौर-मनमाड रेल लाइन के पहले हिस्से के लिए 4,930.91 करोड़ रुपये का टेंडर निकला
मध्य रेलवे ने महू से ग्यासपूरखेडी तक 72.66 किलोमीटर के काम के लिए ईपीसी ई-टेंडर जारी किया है। इसमें 25 बड़े पुल, एक सुरंग और सात नए स्टेशन प्रस्तावित हैं।
इंदौर-मनमाड रेल लाइन का प्रोजेक्ट अब असली निर्माण की तरफ बढ़ गया है। मध्य रेलवे के कंस्ट्रक्शन ऑर्गनाइजेशन ने इस प्रोजेक्ट के एक अहम हिस्से के लिए 4,930.91 करोड़ रुपये का ईपीसी ई-टेंडर जारी किया है। यह लाइन कई सालों से इंतजार में थी, इसलिए अब काम में तेजी आने की उम्मीद है।
इंदौर और मालवा-निमार पश्चिम-मध्य मध्य प्रदेश का समृद्ध इलाका है, जो सांस्कृतिक और ऐतिहासिक नजर से भी अहम माना जाता है। इसी इलाके के लिए यह रेल लाइन खास समझी जाती है। भारतीय रेल दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल प्रणाली है और उसका जाल पूरे देश में तेजी से फैल रहा है।
इस टेंडर के तहत डॉ. आंबेडकर नगर (महू) से ग्यासपूरखेडी तक 72.66 किलोमीटर लंबे रेल सेक्शन का निर्माण प्रस्तावित है। इस काम की अनुमानित कीमत 4,930.91 करोड़ रुपये बताई गई है। कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनी गई एजेंसी को यह काम 48 महीने में, यानी चार साल में पूरा करना होगा।
रूट का कुछ हिस्सा पहाड़ी इलाके से गुजरेगा, इसलिए बड़े पैमाने पर ढांचा खड़ा करना पड़ेगा। प्रस्तावित कामों में 25 बड़े रेल पुल, कई छोटे पुल, चार रोड ओवर ब्रिज, एक सुरंग और एलिवेटेड रेल वायडक्ट शामिल हैं।
72.66 किलोमीटर के इस रूट पर सात नए रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं। ये हैं ग्यासपूरखेडी, चिक्त्यावाड, नीमगड, सराई तलाव, झाडी बडोदा, केलाउड और कामदपूर।
लाइन पूरी होने के बाद मालवा-निमार इलाके की रेल कनेक्टिविटी महाराष्ट्र के साथ आगे दक्षिण भारत से भी मजबूत होने की उम्मीद है। सांसद शंकर लालवानी ने कहा है कि इस प्रोजेक्ट से किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को फायदा होगा और रोजगार के मौके बढ़ेंगे।
खेती की पैदावार और माल ढुलाई के लिए यह रूट खास तौर पर काम का साबित हो सकता है। सीधा रेल नेटवर्क मिलने से माल की आवाजाही तेज होगी और लॉजिस्टिक्स पर लगने वाला समय और खर्च घटने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी वजह से इंदौर समेत मालवा-निमार के आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए इस रेल प्रोजेक्ट को अहम माना जा रहा है।