इलेक्ट्रिक टू व्हीलर कंपनी अल्ट्राव्हायोलेट को मिला 85 मिलियन डॉलर का फंड, अमेरिका में उतरने की तैयारी
याली कैपिटल और टीडीके वेंचर्स की अगुवाई में मिले नए फंड से अल्ट्राव्हायोलेट प्रोडक्शन बढ़ाएगी और अमेरिका, लैटिन अमेरिका, दक्षिण-पूर्व एशिया में विस्तार करेगी।
भारतीय इलेक्ट्रिक दुपहिया सेगमेंट की कंपनी अल्ट्राव्हायोलेट ने अपनी नई फंडिंग राउंड में 85 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। इस राउंड में सबसे बड़ी भागीदारी याली कैपिटल के डीप-टेक फंड और टीडीके वेंचर्स की रही। वॉल्डन इंटरनेशनल के चेयरमैन और इंटेल के प्रमुख लिप-बू टैन ने भी इस निवेश में हिस्सा लिया है, और वे अब अल्ट्राव्हायोलेट के सलाहकार के तौर पर भी काम करेंगे।
कंपनी ने बताया कि इस फंड का इस्तेमाल फिलहाल बाजार में मौजूद F77 और X-47 मॉडल का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए किया जाएगा। इसके अलावा आने वाले टेसेरॅक्ट इलेक्ट्रिक स्कूटर और शॉकवेव एंड्युरो मोटरसाइकिल की प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। अल्ट्राव्हायोलेट ने एक बड़ी प्रोडक्शन कैपेसिटी वाले नए प्लांट की भी योजना बनाई है, जिससे आगे चलकर देश के भीतर और बाहर, दोनों जगह की डिमांड पूरी की जा सकेगी।
अल्ट्राव्हायोलेट का अगला फोकस सिर्फ मोटरसाइकिल बेचने तक सीमित नहीं है। कंपनी अलग-अलग तरह के वाहनों के लिए नए EV प्लेटफॉर्म भी डेवलप कर रही है। बैटरी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, व्हीकल आर्किटेक्चर और सॉफ्टवेयर जैसी अहम टेक्नोलॉजी में कंपनी ने अपनी खुद की क्षमता तैयार की है। कंपनी के मुताबिक उसकी बैटरी टेक्नोलॉजी में 48V से लेकर 400V तक के आर्किटेक्चर शामिल हैं।
फिलहाल अल्ट्राव्हायोलेट के F77 और X-47 मॉडल भारतीय ग्राहकों तक पहुंच चुके हैं। X-47 में रडार आधारित सेफ्टी टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया गया है। कंपनी के आने वाले प्रोडक्ट्स में टेसेरॅक्ट को खासतौर पर अहम माना जा रहा है। कंपनी की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इसका प्रोडक्शन Q1 2027 में शुरू होने की उम्मीद है, वहीं शॉकवेव मॉडल के जरिए कंपनी इलेक्ट्रिक एंड्युरो सेगमेंट में एंट्री की तैयारी कर रही है।
इंटरनेशनल विस्तार भी कंपनी की योजना का एक बड़ा हिस्सा है। यूरोप में मौजूदगी बढ़ाने के बाद अल्ट्राव्हायोलेट ने 2027 में अमेरिकी बाजार में उतरने की योजना बनाई है। इसके साथ ही कंपनी लैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी संभावनाएं तलाश रही है। नए निवेश से कंपनी को प्रोडक्शन, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल एक्सपैंशन, तीनों मोर्चों पर रफ्तार पकड़ने का मौका मिलेगा।