इलेक्ट्रिक स्कूटर-बाईक फुल चार्ज करने में कितना खर्चा आता है, समझिए पूरा हिसाब
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर लेने वालों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि चार्जिंग में असल में कितने पैसे लगते हैं। बैटरी क्षमता, बिजली का रेट और चार्जिंग के दौरान होने वाले लॉस के हिसाब से यह खर्चा तय होता है।
पेट्रोल का खर्चा बचाने के लिए लोग इलेक्ट्रिक बाईक या स्कूटर तो खरीद लेते हैं, लेकिन चार्जिंग में असल में कितने पैसे लगते हैं यह सवाल कई लोगों के मन में रहता है। असल में यह खर्चा तीन चीजों पर निर्भर करता है, बैटरी की क्षमता, घर की बिजली का रेट और चार्जिंग के दौरान होने वाला बिजली का नुकसान। घर पर चार्ज करने पर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का फुल चार्ज करीब Rs 15 से Rs 85 के बीच पड़ सकता है।
चार्जिंग का खर्चा कैसे निकाला जाता है, यह समझना जरूरी है। बैटरी की क्षमता kWh में दी जाती है, लेकिन बैटरी में जितनी क्षमता होती है उससे थोड़ी ज्यादा बिजली सॉकेट से खींची जाती है, क्योंकि चार्जिंग के दौरान कुछ ऊर्जा जाया हो जाती है। अगर करीब 90% चार्जिंग क्षमता मान ली जाए तो 3.5kWh की बैटरी को पूरा चार्ज करने के लिए करीब 3.89kWh बिजली लग सकती है। यूनिट का रेट Rs 7 प्रति यूनिट हो तो खर्चा करीब Rs 27.22 आता है, और अगर रेट Rs 10 प्रति यूनिट हो तो यह खर्चा Rs 38.89 तक पहुंच जाता है।
मार्केट में मिलने वाले पॉपुलर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बात करें तो टीव्हीएस iQube की 3.5kWh बैटरी को फुल चार्ज करने में करीब Rs 27, एथर Rizta की 2.9kWh बैटरी के लिए करीब Rs 23, ओबेन Rorr EZ की 3.4kWh बैटरी के लिए करीब Rs 26 और रिव्होल्ट RV400 की 3.24kWh बैटरी के लिए करीब Rs 25 खर्चा आता है। यह पूरा हिसाब Rs 7 प्रति यूनिट बिजली रेट और 90% चार्जिंग क्षमता मानकर निकाला गया है।
महीने का कुल खर्चा कितना बैठ सकता है, इसका भी एक उदाहरण है। रोज ऑफिस जाने वाला कोई शख्स अगर महीने में 1,000km चलता है और स्कूटर का बिजली खर्च 30Wh प्रति km है, तो महीने में करीब 30kWh बिजली लगेगी। Rs 7 प्रति यूनिट के हिसाब से यह खर्चा करीब Rs 210 होता है। लेकिन ट्रैफिक, स्पीड, राइडर का वजन और मौसम की वजह से असली इस्तेमाल घटता-बढ़ता रहता है। इसीलिए सिर्फ कंपनी की बताई हुई रेंज देखने के बजाय अपने महीने भर के चलने के हिसाब से खर्चा निकालना ज्यादा काम का रहता है।
बड़ी बैटरी का मतलब हमेशा ज्यादा रनिंग कॉस्ट नहीं होता। बड़ी बैटरी को फुल चार्ज करने में ज्यादा बिजली लगती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि प्रति किलोमीटर खर्चा भी हमेशा ज्यादा ही रहेगा। अगर रेंज ज्यादा हो और एनर्जी एफिशिएंसी अच्छी हो तो बड़ी बैटरी फायदे का सौदा भी हो सकती है। इसलिए EV खरीदते वक्त फुल चार्ज का खर्चा नहीं, बल्कि प्रति किलोमीटर बिजली खर्च चेक करना ज्यादा जरूरी है।
घर की चार्जिंग और पब्लिक चार्जिंग का खर्चा अलग-अलग हो सकता है। कुछ नेटवर्क टाइम के हिसाब से चार्ज लेते हैं तो कुछ बिजली इस्तेमाल के हिसाब से। जैसे Ather Grid के लिए Rs 1.20 प्रति मिनट का रेट बताया गया है, जिस पर 18% GST भी लगता है, और यह रेट जगह के हिसाब से बदल भी सकता है। इसलिए रोज ऑफिस जाने के लिए घर की चार्जिंग और लंबी राइड के लिए पब्लिक चार्जिंग, इस्तेमाल का यह फर्क ध्यान में रखना जरूरी है।