IIM की UG एडमिशन में बड़ा बदलाव, एक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट की तैयारी, RTI में खुलासा
RTI से मिले दस्तावेजों से पता चला कि सभी IIM मिलकर UG कोर्सेस के लिए एक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट और MBA एडमिशन के लिए सेंट्रलाइज्ड डिजिटल काउंसलिंग प्लेटफॉर्म पर चर्चा कर रहे हैं।
देश के नामी 'इंडियन इंस्टीट्यूट्स ऑफ मैनेजमेंट' यानी IIM अपने अंडरग्रेजुएट एडमिशन प्रोसेस में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में हैं। 15 सितंबर 2026 को RTI यानी राइट टू इंफॉर्मेशन के तहत सामने आए दस्तावेजों से यह जानकारी मिली है। इन दस्तावेजों के मुताबिक सभी IIM मिलकर UG प्रोग्राम्स के लिए एक ही कॉमन एंट्रेंस टेस्ट लाने पर विचार कर रहे हैं। साथ ही MBA एडमिशन के लिए एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल काउंसलिंग प्लेटफॉर्म शुरू करने की भी बात चल रही है।
यह प्रस्ताव 14 मई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में हुई IIM कोऑर्डिनेशन फोरम की मीटिंग में रखा गया था।
अभी देश में 22 IIM हैं, जिनमें से 13 में UG प्रोग्राम्स चलाए जाते हैं। इनमें इंदौर, रोहतक, रांची, जम्मू, बोधगया, अमृतसर और शिलॉन्ग जैसे इंस्टीट्यूट शामिल हैं। फिलहाल इन सभी संस्थानों में एडमिशन के लिए 10 से ज्यादा अलग-अलग परीक्षाएं और तरीके अपनाए जाते हैं। इस वजह से स्टूडेंट्स को हर IIM के लिए अलग परीक्षा देनी पड़ती है, जिससे उन्हें काफी परेशानी और कन्फ्यूजन होता है। धर्मेंद्र प्रधान ने पहले भी कहा था कि एक जैसे कोर्स के लिए अलग-अलग एंट्रेंस टेस्ट लेना ठीक नहीं है और इसे टालना चाहिए।
MBA काउंसलिंग और फीस रिफंड के नियमों में भी बदलाव की तैयारी है। IIM मुंबई ने जुलाई 2026 के आखिर तक शिक्षा मंत्रालय को एक कॉमन डिजिटल काउंसलिंग प्लेटफॉर्म का ड्राफ्ट सौंप दिया है। इसका मकसद यह है कि स्टूडेंट्स को अलग-अलग IIM में बार-बार सीट बुक न करनी पड़े और नॉन-रिफंडेबल फीस भरने से होने वाले आर्थिक नुकसान से उन्हें बचाया जा सके।
इसके अलावा 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से UGC यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन की गाइडलाइंस के मुताबिक सभी IIM में एक जैसी फीस-रिफंड पॉलिसी लागू की जाएगी। अभी अलग-अलग IIM में अलग-अलग नियम होने की वजह से जो स्टूडेंट्स एक इंस्टीट्यूट छोड़कर दूसरे में एडमिशन लेते थे, उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता था। नए नियम से इस समस्या को दूर करने की कोशिश की जा रही है।