हिंगोली में सर्दी से पहले ही पानी का संकट, सितंबर में भूजल 2.23 मीटर नीचे गया
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हिंगोली जिले में बारिश का मौसम खत्म होते ही पानी की किल्लत के आसार साफ दिखने लगे हैं। सितंबर के महीने में ही भूजल स्तर 2.23 मीटर नीचे चला गया है। इस वजह से आने वाले दिनों में गांवों में पानी की सप्लाई का सवाल गंभीर हो सकता है।
इस संभावित किल्लत से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। अलग-अलग उपायों के लिए 9 करोड़ 48 लाख रुपये की कार्ययोजना बनाई गई है।
बारिश खत्म होने के फौरन बाद कुछ गांवों में पीने के पानी की दिक्कत शुरू हो चुकी है। कुओं और बोरवेल का जलस्तर नीचे जा रहा है, इसलिए गांव के लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। अक्टूबर में ही किल्लत की आहट मिलने से अंदेशा जताया जा रहा है कि आने वाली गर्मियों में हालत और बिगड़ सकती है। प्रशासन का जोर है कि किल्लत बढ़ने से पहले ही जरूरी उपाय कर लिए जाएं।
किल्लत वाले गांवों में हालात के हिसाब से अलग-अलग काम किए जाएंगे। कार्ययोजना में बंद पड़ी या खराब हो चुकी नल पानी सप्लाई योजनाओं की मरम्मत शामिल है। इसके अलावा पूरक पानी सप्लाई योजनाओं को लागू करना, नए बोरवेल लेना, मौजूदा कुओं को और गहरा करना और निजी कुओं का अधिग्रहण करना भी इसमें रखा गया है। जिन गांवों में किसी और तरीके से पानी पहुंचाना मुमकिन नहीं होगा, वहां टैंकर का सहारा लिया जाएगा।
पानी के किफायती इस्तेमाल की भी योजना बनाई जा रही है। मौजूदा प्रोजेक्ट और तालाबों का पानी पीने के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। जिन गांवों में पानी सप्लाई योजनाएं खराब हैं या दूसरे पानी के स्रोत की जरूरत है, वहां जरूरी काम हाथ में लेने की तैयारी की गई है।
आने वाले समय में पीने के पानी की मांग बढ़ी तो गांव-गांव की हालत देखकर उपाय किए जाएंगे। मरम्मत के काम समय पर पूरे करना, दूसरे पानी के स्रोत उपलब्ध कराना और जरूरत पड़ने पर टैंकर से पानी पहुंचाना, इन्हीं उपायों पर जोर रहेगा।
कुल मिलाकर, जिले में बारिश के बाद भूजल का घटना शुरू हो गया है और ग्रामीण इलाकों की पानी सप्लाई पर इसका सबसे गंभीर असर पड़ने की आशंका है। इसी को देखते हुए प्रशासन पहले से तैयारी में जुट गया है।
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