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गोंदिया: नर्सिंग छात्राओं का डीन दफ्तर में धरना, डेढ़ महीने में समस्याएं सुलझाने का भरोसा

गोंदिया में AISF की अगुवाई में 100 से ज्यादा बी.एस्सी. नर्सिंग विद्यार्थियों ने सरकारी मेडिकल कॉलेज के डीन दफ्तर में आंदोलन किया। डीन के आश्वासन के बाद आंदोलन फिलहाल रोका गया।

गोंदिया: नर्सिंग छात्राओं का डीन दफ्तर में धरना, डेढ़ महीने में समस्याएं सुलझाने का भरोसा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

गोंदिया में 24 अक्टूबर 2026 को ऑल इंडिया स्टुडंट्स फेडरेशन (AISF) की अगुवाई में 100 से ज्यादा बी.एस्सी. नर्सिंग के विद्यार्थी सरकारी मेडिकल कॉलेज के डीन दफ्तर पहुंचे और जोरदार आंदोलन किया। मामला सरकारी नर्सिंग कॉलेज के विद्यार्थियों के हॉस्टल और दूसरी पढ़ाई-लिखाई व बुनियादी समस्याओं का है। संगठन का कहना है कि अल्टिमेटम देने के बावजूद प्रशासन ने इन पर ध्यान नहीं दिया।

आंदोलन के दौरान माहौल गरमा गया। इसके बाद पुलिस और संबंधित महकमों ने दखल दिया। आखिर में डीन ने भरोसा दिलाया कि आने वाले डेढ़ महीने में विद्यार्थियों की सारी समस्याएं सुलझा दी जाएंगी। इस आश्वासन के बाद आंदोलन को फिलहाल रोक दिया गया।

AISF ने 8 अक्टूबर को हॉस्टल और पढ़ाई की समस्याओं को लेकर प्रशासन को निवेदन दिया था। इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन ने आंदोलन की चेतावनी दी थी। आरोप है कि समस्या सुलझाने के बजाय प्रशासन ने एमबीबीएस की छात्राओं को लड़कियों के हॉस्टल में भेज दिया और नर्सिंग की छात्राओं से कमरे खाली करने को कहा। इस इंतजाम से दोनों तरफ के विद्यार्थियों में तनाव का माहौल बन गया था।

इस मामले को गंभीर मानते हुए AISF ने 23 अक्टूबर को पुलिस अधीक्षक और संबंधित पुलिस थाने के निरीक्षक के पास शिकायत की थी। संगठन का कहना है कि छात्राओं के रहने के सवाल को समझदारी से संभालने के बजाय ऐसे हालात बनने दिए गए कि उन्हीं के बीच तनाव पैदा हो। यह प्रशासन की प्लानिंग में बड़ी चूक है।

24 अक्टूबर को AISF की अगुवाई में 100 से ज्यादा नर्सिंग छात्राएं डीन दफ्तर पहुंचीं। इससे इलाके में तनाव हो गया। फिर पुलिस और संबंधित महकमों ने विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों, संगठन के पदाधिकारियों और कॉलेज प्रशासन के बीच बातचीत करवाई। इस बातचीत में हॉस्टल के सवाल के साथ कॉलेज की पढ़ाई और बुनियादी सुविधाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

संगठन ने साफ किया है कि प्रशासन को अपना आश्वासन पूरा करना होगा, और विद्यार्थियों के सवालों पर ठोस कार्रवाई होना ही इस आंदोलन की असली कामयाबी होगी। AISF के मुताबिक हॉस्टल, क्लासरूम, शौचालय, अपडेटेड लैब, लाइब्रेरी, योग्य और अनुभवी प्रोफेसर, नियमित प्रैक्टिकल क्लास और मेस जैसी सुविधाओं का मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं है, यह विद्यार्थियों के पढ़ाई के हक से जुड़ा है। बुनियादी सुविधाएं देने के बजाय कमरे खाली करने का दबाव डाला गया, तो यह किसी हाल में मंजूर नहीं होगा, ऐसी चेतावनी संगठन ने दी है।

राज्य अध्यक्ष वैभव चोपकर ने कहा कि विद्यार्थियों की एकजुटता की वजह से ही प्रशासन को बातचीत के लिए आगे आना पड़ा। आश्वासन पर अमल होता है या विद्यार्थियों को फिर आंदोलन करना पड़ता है, यह आने वाले डेढ़ महीने में साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने वादा नहीं निभाया, तो विद्यार्थियों के जायज हक के लिए AISF फिर संघर्ष खड़ा करेगा। इस मौके पर प्रणय बडवाईक समेत सभी विद्यार्थी मौजूद थे।

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