घुग्घूस नगर परिषद में कर्मचारियों के समावेश पर सवाल, नागपुर के संभागीय आयुक्त को जाएगा पत्र
घुग्घूस नगर परिषद की सभा में कर्मचारियों के समावेश के नियमों की जानकारी संभागीय आयुक्त, नागपुर से मांगने का प्रस्ताव सर्वानुमति से मंजूर हुआ।
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घुग्घूस नगर परिषद में कुछ कर्मचारियों को शामिल किए जाने की प्रक्रिया पर अब प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। इन कर्मचारियों को नगर परिषद में किस नियम और किस प्रक्रिया के तहत लिया गया, यह जानने के लिए संभागीय आयुक्त, नागपुर को पत्र लिखने का फैसला नगर परिषद की सभा में लिया गया है।
नगर परिषद के ठराव क्रमांक 23/1 के मुताबिक, नगराध्यक्ष और सभी सदस्यों की मौजूदगी में हुई चर्चा के दौरान कर्मचारियों के समावेश का मुद्दा उठाया गया। सभा में प्रस्ताव रखा गया कि संभागीय आयुक्त, नागपुर से पूछा जाए कि इन कर्मचारियों को किन नियमों के आधार पर नगर परिषद में शामिल किया गया। जानकारी के मुताबिक यह प्रस्ताव सर्वानुमति से मंजूर हो गया।
इस मामले से उन पुराने कर्मचारियों के हक की बात भी छिड़ गई है, जिन्होंने ग्राम पंचायत के समय से लेकर नगर परिषद बनने तक लंबे वक्त तक काम किया, लेकिन अपनी सेवा अवधि खत्म होने तक नगर परिषद में शामिल नहीं हो सके। सवाल उठाया जा रहा है कि अगर ऐसे कर्मचारियों को नियमों के हिसाब से बराबर का मौका या सेवा ज्येष्ठता का फायदा नहीं मिला, तो उन्हें इंसाफ कैसे मिलेगा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ मामलों में सेवा ज्येष्ठता और सेवा अवधि को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि कोई कर्मचारी लंबे समय से सेवा में हो और उससे जूनियर कर्मचारी को स्थायी या नियमित सेवा का फायदा मिल गया हो, तो ऐसी प्रक्रिया में सेवा ज्येष्ठता, सेवा नियमों और बराबर मौके के सिद्धांतों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच जरूरी है।
कर्मचारियों की नियुक्ति, समावेश, सेवा ज्येष्ठता, नियमितीकरण या स्थायित्व से जुड़े फैसले शासन के नियमों, मंजूर पदों, सेवा शर्तों और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के हिसाब से होने चाहिए। इसलिए इस मामले में असल में कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई, इन कर्मचारियों की सेवा अवधि कितनी थी और समावेश के वक्त सेवा ज्येष्ठता को किस तरह देखा गया, इस पर संभागीय स्तर की जांच से तस्वीर साफ होने की संभावना है।
इस बीच, नगर परिषद परिसर के कुछ कर्मचारियों के तबादले या दफ्तर बदलने को लेकर भी चर्चा चल रही है। हालांकि नगर परिषद प्रशासन की तरफ से इसकी अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अब नजर इस पर है कि संभागीय जांच में समावेश की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन, सेवा ज्येष्ठता की अनदेखी या प्रशासनिक गड़बड़ी मिली, तो क्या संबंधित अधिकारियों या जिम्मेदार लोगों पर नियम के मुताबिक कार्रवाई होगी। साथ ही यह भी अहम सवाल है कि लंबे समय तक सेवा देने के बाद भी नगर परिषद में समावेश का फायदा न पाने वाले पुराने कर्मचारियों को इंसाफ दिलाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाएगा।
संभागीय आयुक्त, नागपुर को भेजे जाने वाले पत्र और वहां से आने वाले जवाब के बाद पूरे मामले की असल स्थिति सामने आने की संभावना है। कर्मचारियों के समावेश, सेवा ज्येष्ठता और सेवा हक के मामले में नियमों का पारदर्शी तरीके से पालन हुआ या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।