मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:30 IST

घुग्घूस के पंचशील झेंडा ओपन स्पेस में गाड़ियों की पार्किंग, आप नेता ने की शिकायत

आम आदमी पार्टी के घुग्घूस अध्यक्ष विकास खाडे ने नगरपरिषद के मुख्याधिकारी से शिकायत कर तुरंत कार्रवाई की मांग की है।

घुग्घूस के पंचशील झेंडा ओपन स्पेस में गाड़ियों की पार्किंग, आप नेता ने की शिकायत
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

घुग्घूस नगरपरिषद इलाके के अमराई, प्रभाग क्रमांक 11 में बने पंचशील झेंडा ओपन स्पेस का मामला अब गरमा गया है। आरोप है कि वहां कमर्शियल गाड़ियों की गैरकानूनी पार्किंग चल रही है और जगह पर कब्जा हो गया है। आम आदमी पार्टी के घुग्घूस अध्यक्ष विकास खाडे ने इस बारे में नगरपरिषद के मुख्याधिकारी को शिकायत दी है और तुरंत कार्रवाई की मांग की है। बताया गया है कि शिकायत के साथ मौके की मौजूदा हालत और जीपीएस लोकेशन दिखाने वाली फोटो भी लगाई गई हैं।

शिकायत के मुताबिक नगरपरिषद की इस सार्वजनिक खुली जगह में छोटा हाथी, मालवाहक गाड़ियां और दूसरी निजी गाड़ियां रोज खड़ी की जा रही हैं। शिकायत करने वाले का यह भी दावा है कि इसी जगह पर गाड़ियों की धुलाई और मरम्मत भी होती है। इससे आम लोगों के इस्तेमाल की जगह पर असर पड़ रहा है और इलाके के ट्रैफिक और सार्वजनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

कहा जाता है कि पंचशील झेंडा परिसर सामाजिक और सांस्कृतिक नजरिए से अहम है। ऐसी जगह पर कमर्शियल गाड़ियां लगातार खड़ी होती रहें, तो सार्वजनिक जगहों की प्लानिंग और हिफाजत को लेकर नगरपरिषद प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

शिकायत में लिखा है कि जहां-तहां खड़ी गाड़ियों की वजह से छोटे बच्चों के खेलने, बुजुर्गों के बैठने और लोगों के आने-जाने की जगह कम हो गई है। ओपन स्पेस के गेट के पास और परिसर के किनारे गाड़ियां लगने से पैदल चलने वालों और स्कूल जाने वाले बच्चों को भी दिक्कत होने का दावा किया गया है।

शिकायत सामने आने के बाद प्रभाग में एक और चर्चा शुरू हो गई है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या स्थानीय नगरसेवक और नगरसेविका इस समस्या को सुलझाने के लिए नगरपरिषद प्रशासन के पास असरदार तरीके से पैरवी करेंगे। स्थानीय नागरिक यह भी पूछ रहे हैं कि शिकायत पर मौके का मुआयना होगा या यह मामला सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा। शिकायत के बाद नगरपरिषद प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं, यह अभी साफ नहीं है।

इस मामले में एक दूसरा अहम सवाल भी है। अगर नगरपरिषद ओपन स्पेस से कमर्शियल गाड़ियों की पार्किंग हटा दे, तो इन गाड़ियों के लिए दूसरी पार्किंग का इंतजाम कौन करेगा? चर्चा इस बात की भी है कि मामला सिर्फ गाड़ियां हटाने तक रहेगा या नगरपरिषद शहर की कमर्शियल और मालवाहक गाड़ियों के लिए तय पार्किंग बनाने की दिशा में भी सोचेगी। एक तरफ सार्वजनिक खुली जगह पर कब्जा और गैरकानूनी पार्किंग रोकना जरूरी है, तो दूसरी तरफ गाड़ी मालिकों के लिए दूसरा इंतजाम देने की जिम्मेदारी प्रशासन के सामने है।

अब सबकी नजर इस पर है कि मुख्याधिकारी कार्यालय शिकायत पर क्या करता है, क्या इन गाड़ियों पर नियम के मुताबिक जुर्माना या दूसरी कार्रवाई होती है, और प्रभाग के नगरसेवक और नगरसेविका यह मुद्दा नगरपरिषद स्तर पर कितने असरदार ढंग से उठाते हैं। इलाके में पूछा जा रहा है कि क्या अनधिकृत पार्किंग हटेगी, क्या नो पार्किंग के बोर्ड लगेंगे, क्या गाड़ियों पर कार्रवाई होगी और गाड़ियां हटने के बाद उनके लिए पार्किंग का इंतजाम कौन करेगा। इन सवालों के जवाब अब नगरपरिषद प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अगले कदम से ही मिलेंगे।

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