गायकवाड का भाजपा पर वार: शिंदे बगावत न करते तो भाजपा के विधायक घर बैठे होते
शिवसेना शिंदे गुट के विधायक संजय गायकवाड ने भाजपा पर फिर निशाना साधा है। रामदास कदम के बयान को लेकर महायुति में तनाव बढ़ गया है।
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राज्य की राजनीति में इन दिनों काफी खींचतान चल रही है। मनोज जरांगे पाटील ने जो ऑडियो बम फोड़ा, उसके बाद महायुति के अंदर का झगड़ा खुलकर सामने आ गया है। शिवसेना शिंदे गुट और भाजपा के नेता एक-दूसरे पर राजनीतिक दांव चल रहे हैं और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। इसी बीच शिवसेना शिंदे गुट के विधायक संजय गायकवाड ने एक बार फिर भाजपा पर तीखी टिप्पणी की है।
गायकवाड ने भाजपा नेताओं को सुनाते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे ने बगावत नहीं की होती तो भाजपा के 106 विधायक घर बैठे होते। उनके इस बयान से महायुति के विवाद में और चिंगारी पड़ गई है। शिवसेना नेता रामदास कदम ने पहले भाजपा पर कुछ आरोप लगाए थे। उस पर भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर ने जवाब दिया था। इन दोनों बयानों से महायुति में पहले ही माहौल गरम है, और अब गायकवाड के बयान से बड़ा विवाद खड़ा होने की आशंका है।
प्रवीण दरेकर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गायकवाड ने शिंदे के नेतृत्व का पक्ष रखा। उनका दावा है कि महाराष्ट्र में महायुति को जो कामयाबी मिली, उसके पीछे एकनाथ शिंदे का चेहरा अहम था। गायकवाड ने कहा कि भाजपा के पास 106 विधायक होने के बावजूद सत्ता का राजनीतिक समीकरण शिंदे की बगावत की वजह से ही बदला।
उन्होंने भाजपा नेताओं को सलाह भी दी कि बोलने से पहले सोच लें और अपने वरिष्ठों से बात कर लें। गायकवाड ने साफ कहा कि शिवसेना की आवाज को कोई दबा नहीं सकता। इस तरह उन्होंने पार्टी की भूमिका को मजबूती से रखा।
रामदास कदम के बयान का समर्थन करते हुए गायकवाड ने सवाल उठाया कि कदम ने आखिर क्या गलत कहा। उनका दावा है कि जिस ऑडियो क्लिप की बात हो रही है, उसमें भाजपा के विधायकों और कार्यकर्ताओं की आवाज है। उन्होंने कहा कि इस मामले में दूसरों पर आरोप लगाने से पहले संबंधित लोगों को खुद के गिरेबान में झांकना चाहिए।
गायकवाड ने यह शक भी जताया कि मनोज जरांगे पाटील और एकनाथ शिंदे को एक-दूसरे से दूर करने की कोशिश हो रही है। मराठा समाज को आरक्षण देने के फैसले में एकनाथ शिंदे की भूमिका अहम रही, यह बताकर उन्होंने शिंदे के नेतृत्व का समर्थन किया।
गायकवाड का कहना है कि एकनाथ शिंदे शांत और संयमी हैं, लेकिन शिवसेना की तरफ से हम जवाब देंगे। उनके इस बयान से भाजपा और शिंदे की शिवसेना के बीच का मतभेद फिर चर्चा में आ गया है। अब राजनीतिक गलियारों की नजर इस पर है कि इन आरोपों पर भाजपा की क्या प्रतिक्रिया आती है और महायुति के वरिष्ठ नेता इस विवाद में दखल देते हैं या नहीं।
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