मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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20:26 IST

गौरी विसर्जन 2026: विसर्जन से पहले इन 7 बातों का रखें खास ध्यान

आज गणेशोत्सव का छठा दिन है और कई घरों में गौरी विसर्जन होने वाला है, तो जान लीजिए विसर्जन का सही मुहूर्त और जरूरी नियम

गौरी विसर्जन 2026: विसर्जन से पहले इन 7 बातों का रखें खास ध्यान
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

हर तरफ गणेशोत्सव की धूम मची है। ढोल-ताशे, आरतियां और मोदक की खुशबू से माहौल भक्तिमय बना हुआ है। आज गणेशोत्सव का छठा दिन है। कई घरों में गौरी आवाहन हो चुका है, दो दिन तक गौरी की मन से पूजा हुई है, और अब कई जगहों पर आज ही गौरी विसर्जन होने वाला है। गौरी को विदा करते समय हर किसी के मन में थोड़ा दुख होता है, लेकिन यह विदाई भी उतनी ही धूमधाम और नियमों के साथ करनी चाहिए। विसर्जन के वक्त कुछ बातें ध्यान में रखी जाएं तो सारी प्रक्रिया ठीक ढंग से पूरी होती है।

19 सितंबर 2026 को ज्येष्ठा गौरी विसर्जन है। मुंबई पंचांग के अनुसार यह तिथि दोपहर 3:26 बजे तक है। पंचांग के मुताबिक आज का शुभ समय सुबह 6 बजकर 27 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 38 मिनट तक बताया गया है। लेकिन इसमें भी सबसे अच्छा समय सूर्योदय से लेकर दोपहर 3 बजकर 15 मिनट तक का माना जा रहा है, क्योंकि 3.15 के बाद मूल नक्षत्र खत्म हो रहा है। इसलिए दोपहर से पहले विसर्जन करना ज्यादा अच्छा माना जाता है। यानी दोपहर 3.15 बजे से पहले उत्तरपूजा और विसर्जन कर लेना चाहिए। गौरी विसर्जन सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि गौरी को थैंक्यू कहने और उसे विदा करने का दिन है। इसलिए कुछ नियम पालना जरूरी है।

पहला, विसर्जन के दिन सुबह जल्दी उठकर नहा लें और घर साफ रखें। गौरी जा रही है यह सोचकर घर में रोना-धोना नहीं, बल्कि खुशी से विदाई देनी चाहिए। दूसरा, उत्तरपूजा के वक्त गौरी को हल्दी, कुमकुम, नारियल, सुपारी और अगरबत्ती चढ़ाएं और प्रार्थना करें कि वह साल भर सौभाग्य बनाए रखे। फराली पदार्थ, पूरनपोली, चावल और दाल का नैवेद्य दिखाएं।

तीसरा नियम है वाण देना। गौरी विसर्जन के वक्त 5 सुहागिन महिलाओं को बुलाकर वाण देने की परंपरा है। एक थाली में वाण का सामान रखें, पहले उसे देवी के सामने दिखाएं, पूजा करें और फिर उन महिलाओं को दें। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

चौथा, गौरी की आखिरी आरती होने के बाद उन पर अक्षत डालें, दही-भात का नैवेद्य दिखाएं और पान का बीड़ा दें। दही-भात ठंडक देने वाला होता है इसलिए इसे यात्रा के लिए दिया जाता माना जाता है।

पांचवां और सबसे जरूरी नियम है गहने उतारना। कई घरों में गौरी के मुखौटे पंचधातु या सोने-चांदी के होते हैं। अगर उन पर गहने पहनाए हैं तो विसर्जन से पहले उन्हें जरूर उतार लें। अक्सर जल्दबाजी में लोग गहनों समेत ही विसर्जन कर देते हैं और बाद में पछताते हैं।

छठा नियम है थोड़ी मिट्टी घर वापस लाना। गौरी विसर्जन के बाद वहां की थोड़ी मिट्टी घर लाकर चौरंग पर रखनी चाहिए। इस मिट्टी को बहुत पवित्र माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि इसे घर में रखने से गौरी का आशीर्वाद घर में बना रहता है।

गौरी विसर्जन भारी मन से किया जाता है, लेकिन अगले साल जल्दी आने का कहकर उसे विदा दी जाती है। नियमों का पालन करते हुए, खुशी और श्रद्धा से विसर्जन करने पर पूजा जरूर सफल होती है।

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