एयर फ्रायर से कम तेल में तले जैसा कुरकुरा खाना, जानिए कैसे
गरम हवा, नापकर तेल और ग्रिलिंग जैसे तरीकों से घर में तेल का इस्तेमाल घटाया जा सकता है।
पकोड़े, कटलेट, फ्राइज और कुरकुरा पनीर गरमागरम सामने आ जाएं तो किसी से छोड़े नहीं जाते। दिक्कत यह है कि इन्हें पारंपरिक तरीके से बनाने में काफी तेल गरम करना पड़ता है, और बाद में बचे हुए तेल का भी सवाल खड़ा हो जाता है।
इसी वजह से कई भारतीय किचन में एयर फ्रायर काम की चीज बन गया है। इससे तली हुई चीजें मेन्यू से गायब नहीं होतीं, बस उन्हें पकाने का तरीका बदल जाता है। ज्यादातर काम गरम हवा करती है और तेल जहां जरूरत हो, वहां बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल होता है।
एयर फ्रायर इसलिए भी आम हो रहे हैं कि पकाने की आदतें बदल रही हैं। कई परिवार अपने जाने-पहचाने स्नैक्स, भुनी चीजें और शाम का खाना छोड़े बिना तेल घटाने का आसान रास्ता ढूंढ रहे हैं। गरम हवा से खाना पकता है और कुरकुरापन फिर भी मिलता है। रोज के कामों जैसे खाना दोबारा गरम करना, सब्जियां भूनना और थोड़े स्नैक्स बनाना, इनमें भी यह आसान है। अलग-अलग साइज, डिजिटल कंट्रोल, देखने वाली खिड़की और कई कुकिंग मोड वाले मॉडल मिलते हैं। घर के लोग जितने व्यस्त हो रहे हैं, कम तेल में जल्दी खाना तैयार करने वाली मशीन उतनी ही काम की लगती है।
डीप फ्राइंग में गरम तेल खाने को चारों तरफ से घेर लेता है। इसी गर्मी से तली चीजों का रंग, परत और कुरकुरापन आता है। साथ ही कुछ तेल खाने के अंदर भी चला जाता है। कितना तेल सोखा जाएगा, यह डिश पर निर्भर करता है। आलू की फांक और ब्रेडक्रंब वाला कटलेट अलग तरह से बर्ताव करते हैं, और गीला घोल सूखी कोटिंग से अलग असर दिखाता है। एयर फ्रायर में खाना तेल में डूबा नहीं रहता, इसलिए तेल पर निर्भरता घट जाती है।
एयर फ्रायर में हीटिंग एलिमेंट और पंखा होता है, जो गरम हवा को बास्केट में तेजी से घुमाता है। यह हवा खाने की सतह की नमी हटाती है और उसे भूरा करने में मदद करती है। मिसाल के तौर पर Philips NA120/00 में इसके लिए RapidAir Technology है और हवा के बहाव के लिए स्टारफिश जैसी बास्केट डिजाइन है। पैन में तेल भरने की जगह आलू की फांक या सब्जियों पर हल्की परत काफी हो सकती है, और कुछ फ्रोजन स्नैक्स में अलग से तेल शायद लगे ही नहीं।
कम तेल का मतलब एक बूंद भी न डालना नहीं है। थोड़ा तेल कुछ चीजों को बेहतर भूरा करने में काम आता है। घर की आलू की फांक पर खुले हाथ से तेल डालेंगे तो एयर फ्रायर का मकसद ही खत्म हो जाएगा। ब्रश से सतह पर थोड़ा तेल लगाना बेहतर बनावट देता है। Prestige Multi-Chef में भी यही सोच है। यह 6.5 लीटर की मशीन एयर फ्राई, रोस्ट, बेक, ग्रिल और टोस्ट कर सकती है, यानी कुरकुरा चाहिए तो हर बार डीप फ्राई की तरफ जाना जरूरी नहीं।
कभी बास्केट ठूंस-ठूंसकर भरी हो और कुछ टुकड़े नरम रह गए हों, तो वजह आमतौर पर हवा का बहाव होता है। खाना बहुत सटा हुआ हो तो गरम हवा हर टुकड़े के चारों तरफ ठीक से नहीं घूम पाती। थोड़ी जगह छोड़ना और बीच में बास्केट हिला देना ज्यादा सतह को गर्मी दिलाता है। ज्यादा मात्रा के लिए Philips NA154/00 में 3.55 लीटर के दो हिस्से हैं, जिन्हें जोड़कर 7.1 लीटर का एक हिस्सा भी बनाया जा सकता है। इससे एक ही खाने के लिए दो चीजें साथ बनाना भी आसान होता है।
तेल घटाना सिर्फ डीप फ्राई की जगह एयर फ्राई करना नहीं है। कभी पकाने का तरीका ही बदल देना बेहतर होता है। पनीर, सब्जियां, मछली या चिकन को तलने की जगह अक्सर ग्रिल किया जा सकता है। Prestige AirFlip में 4.5 लीटर की एयर फ्राई बास्केट के साथ ग्रिल पैन है, और उसकी पारदर्शी कांच की बास्केट से पकता खाना दिखता रहता है।
सिर्फ एयर फ्रायर खरीद लेने से हर खाना हल्का नहीं हो जाता, इस्तेमाल का तरीका भी मायने रखता है। तेल बोतल से सीधे डालने की जगह चम्मच से नापें। ब्रश से लगाएं ताकि थोड़ा तेल ज्यादा सतह पर फैले। बास्केट में ज्यादा भीड़ न करें और जरूरत पड़े तो चीजें पलटें या हिलाएं। रेसिपी समझना भी काम आता है। सूखी कोटिंग आमतौर पर बहुत पतले घोल से बेहतर चलती है, क्योंकि गीला घोल ठीक से पकने से पहले टपक सकता है।
एयर फ्रायर को अक्सर फ्रेंच फ्राइज से जोड़ा जाता है, पर उसे सिर्फ स्नैक्स तक रखना उसकी काफी उपयोगिता गंवाना है। इसमें डिनर की सब्जियां भून सकते हैं, कबाब और पनीर बना सकते हैं, बचे हुए स्नैक्स गरम कर सकते हैं, और मॉडल के हिसाब से कुछ चीजें बेक भी कर सकते हैं। रोज के खाने में यह शामिल हो जाए तो तेल घटाना कोई खास कोशिश नहीं लगता, बस पकाने की रोज की आदत में बदलाव लगता है।
एयर फ्राइंग का असली फायदा यह नहीं कि हर तली चीज जादू से सेहतमंद बन जाती है। फायदा इतना है कि बहुत ज्यादा कुकिंग ऑयल के बिना भी खाना भूरा और कुरकुरा हो जाता है। घर में तले जैसे खाने बार-बार बनते हों तो यह फर्क जुड़ता जाता है। गरम हवा, नापकर तेल और ग्रिलिंग या रोस्टिंग जैसे तरीकों से परिवार धीरे-धीरे फालतू तेल घटा सकते हैं, और पसंदीदा खाना भी नहीं छोड़ना पड़ता। जिस भारतीय किचन में स्वाद अब भी मायने रखता है, वहां यह पसंदीदा डिश पूरी तरह हटाने से कहीं ज्यादा व्यावहारिक बदलाव है।