बेल्हे बसस्थानक: सात साल से वाहतूक नियंत्रक कक्ष पर ताला, यात्री परेशान
अहिल्यानगर और पुणे जिले की सीमा पर बने बेल्हे बसस्थानक का नियंत्रक कक्ष पिछले छह-सात साल से बंद पड़ा है, जिससे रोजाना सफर करने वाले यात्री, स्टूडेंट और बुजुर्ग परेशान हैं।
आळेफाटा इलाके में अहिल्यानगर और पुणे जिले की सीमा पर एक अहम जगह पर बना बेल्हे बसस्थानक इन दिनों प्रशासन की अनदेखी की वजह से मुश्किलों में फंसा हुआ है। यहां का वाहतूक नियंत्रक कक्ष पिछले छह से सात साल से बंद पड़ा है, जिसकी वजह से यात्रियों, स्टूडेंट्स और सीनियर सिटिजन को भारी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। यह स्टेशन बढ़ती यात्री संख्या और आसपास की शिक्षण संस्थाओं के चलते बेहद जरूरी है, फिर भी एसटी महामंडल का इस तरफ ध्यान नहीं जा रहा, जिससे इलाके के गांव वालों में गुस्सा है।
बेल्हे इलाके से रोज सैकड़ों लोग अहिल्यानगर, कल्याण, पारनेर, सुपा और आसपास के गांवों में जाने के लिए एसटी बस का सहारा लेते हैं। लेकिन बसस्थानक का नियंत्रक कक्ष बंद होने की वजह से आने-जाने वाली बसों का टाइम, रूट और फेरों की सही जानकारी यात्रियों को नहीं मिल पाती। नतीजा यह होता है कि लोगों को घंटों स्टेशन पर इंतजार करना पड़ता है।
इलाके में नामी कॉलेज और शिक्षण संस्थाएं होने की वजह से यहां स्कूल-कॉलेज के स्टूडेंट्स की भारी भीड़ रहती है। नियंत्रक कक्ष बंद होने से स्टूडेंट्स को महीने का बस पास बनवाना, उसे रिन्यू कराना या पढ़ाई से जुड़ी छूट वाली स्कीम की जानकारी लेना बेहद मुश्किल हो गया है। अगर नियंत्रक कक्ष चालू हो जाए तो स्टूडेंट्स को यह सारी सुविधाएं एक ही जगह पर मिल सकती हैं।
वाहतूक नियंत्रक न होने की वजह से स्टेशन पर आने वाली एसटी बसों का कोई ऑफिशियल रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। इसी का फायदा उठाकर कई ड्राइवर और कंडक्टर बसों को बेल्हे बसस्थानक में न लाकर सीधे बाईपास से निकाल ले जाते हैं। इस वजह से स्टेशन पर इंतजार कर रहे यात्रियों को समय पर बस नहीं मिलती, और अक्सर रात के वक्त महिलाओं और बुजुर्गों को काफी परेशानी होती है।
एक तरफ एसटी महामंडल घाटे से बाहर निकलने के लिए कमाई बढ़ाने के नए-नए तरीके ढूंढ रहा है, तो दूसरी तरफ काफी यात्री क्षमता वाला बेल्हे बसस्थानक सालों से हवाले भरोसे छोड़ दिया गया है। ग्रामपंचायत और लोकल गांव वालों के बार-बार फॉलोअप और शिकायतों के बावजूद प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यही वजह है कि अब यात्री गुस्से में सवाल उठा रहे हैं कि बसस्थानक पर नियंत्रक कक्ष तो है, लेकिन सुविधा कहां है।
स्टूडेंट्स की पढ़ाई का हो रहा नुकसान, पास बनवाने में हो रही दिक्कत और बसों की गड़बड़ाई हुई आवाजाही को जल्द से जल्द सुधारने के लिए बेल्हे का बंद पड़ा वाहतूक नियंत्रक कक्ष फौरन शुरू करने और वहां स्थायी रूप से पूरे टाइम के लिए वाहतूक नियंत्रक (टीआई) की नियुक्ति करने की मांग लोकल नागरिकों और यात्रियों ने जोरदार तरीके से उठाई है।