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एसटी कर्मचारियों के फंड पर सियासी घमासान, बरगे ने फडणवीस को घेरा, अजित पवार की तारीफ

महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस के महासचिव श्रीरंग बरगे ने कहा कि कोरोना काल में अजित पवार ने कर्मचारियों को अकेला नहीं छोड़ा, जबकि फडणवीस ने मांग के बावजूद पूरा फंड नहीं दिया।

एसटी कर्मचारियों के फंड पर सियासी घमासान, बरगे ने फडणवीस को घेरा, अजित पवार की तारीफ तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

एसटी कर्मचारियों के फंड को लेकर राजनीति गरमा गई है। महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस के महासचिव श्रीरंग बरगे ने कहा है कि कोरोना महामारी के दौरान एसटी की कमाई शून्य पर आ गई थी, फिर भी तत्कालीन वित्त मंत्री दिवंगत अजित पवार ने कर्मचारियों को बेसहारा नहीं छोड़ा। उनके मुताबिक मौजूदा वित्त मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मांग करने के बाद भी एसटी महामंडल को कभी पूरा फंड नहीं दिया।

बरगे ने बताया कि कोरोना की वजह से एसटी की बसें चलना बंद हो गई थीं और आमदनी पूरी तरह रुक गई थी। ऐसे मुश्किल वक्त में भी अजित पवार ने कर्मचारियों की तनख्वाह के लिए 4,000 करोड़ रुपये का फंड मंजूर किया था। लेकिन जब से वित्त विभाग फडणवीस के पास आया, तब से एसटी को उसकी मांग के हिसाब से पूरा पैसा नहीं मिला, ऐसा बरगे का कहना है।

आंकड़े गिनाते हुए बरगे ने दावा किया कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच तनख्वाह के लिए महामंडल को 5944 करोड़ रुपये की जरूरत थी। सरकार से असल में सिर्फ 4765 करोड़ 85 लाख रुपये मिले। इस तरह करीब 1178 करोड़ 15 लाख रुपये का फंड कम पड़ गया।

दिवाली सिर पर है और कर्मचारियों के बकाया पैसे नहीं मिल रहे। इसी वजह से अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन के नोटिस दिए हैं। बरगे का आरोप है कि वित्त विभाग की तरफ से एसटी महामंडल के फंड में लगातार कटौती की जा रही है, जिससे महामंडल आर्थिक तंगी में फंस गया है।

बरगे ने कहा कि अजित पवार ने कमाई बंद होने के बावजूद एसटी कर्मचारियों की तनख्वाह की जिम्मेदारी उठाई थी। फडणवीस के कार्यकाल में मांग करने पर भी पूरा फंड नहीं मिल रहा, इसलिए कर्मचारियों को अपने हक के पैसों के लिए जूझना पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि एसटी आम लोगों की जीवनरेखा है, फिर भी उसके कर्मचारियों की आर्थिक जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। फंड की कमी से कर्मचारियों का बकाया अटके रहना ठीक नहीं है। बरगे ने चेतावनी दी कि आगे भी यही हालात रहे तो सरकार को इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे।

एसटी कर्मचारियों की तनख्वाह, वेतनवृद्धि का फर्क, भविष्य निर्वाह निधि (पीएफ), ग्रेच्युटी और बाकी देनदारियों का सवाल लगातार उठ रहा है। अगर महामंडल को वक्त पर आर्थिक मदद नहीं मिली तो कर्मचारियों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। इसलिए कर्मचारी संगठन मांग कर रहे हैं कि एसटी महामंडल को जरूरी फंड दिया जाए और कर्मचारियों की लंबित देनदारियां चुकाई जाएं। कोविड काल में फंड बांटने का हवाला देकर बरगे ने मौजूदा सरकार के फंड वितरण पर सवाल खड़े किए हैं।

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