ईरान-अमेरिका तनाव के बीच नेतान्याहू की अबू धाबी में गुप्त मुलाकात, इस्रायल-यूएई रिश्तों पर नई हलचल
इराण और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर दुनिया की नजर टिकी थी, तभी इस्रायल के पीएम नेतान्याहू ने बेहद गुपचुप तरीके से यूएई का दौरा किया। इस बीच हमास के हमले से जुड़े एक पुराने इशारे को लेकर भी नया विवाद खड़ा हो गया है।
मिडल ईस्ट में हालात पहले से ही बहुत नाजुक और तनावभरे थे, और अब वहां से एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको चौंका दिया है। इराण और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई थीं, ठीक उसी वक्त इस्रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने बड़ी गोपनीयता के साथ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का दौरा किया।
अबू धाबी पहुंचकर नेतान्याहू ने यूएई के राष्ट्राध्यक्ष शेख मोहम्मद बिन झायेद अल नाहयान से मुलाकात की और गंभीर मुद्दों पर बातचीत की, ऐसा दावा अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने किया है। हालांकि दोनों देशों के अधिकारियों ने इस दौरे की सीधे तौर पर पुष्टि नहीं की है, फिर भी इस गुप्त मुलाकात के बाद खाड़ी देशों की कूटनीति में हलचल तेज हो गई है।
कई अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के मुताबिक नेतान्याहू खास विमान से अबू धाबी पहुंचे थे। मिडल ईस्ट के ज्यादातर मुस्लिम देश इस्रायल को अपना पारंपरिक दुश्मन मानते रहे हैं, लेकिन यूएई ने इससे अलग रास्ता चुना है। साल 2020 में हुए ऐतिहासिक अब्राहम करार का हिस्सा बनकर यूएई ने इस्रायल के साथ पूरे राजनयिक रिश्ते कायम किए थे। इस करार के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और सुरक्षा से जुड़ी साझेदारी तेजी से बढ़ी है। अभी इराण के साथ संभावित जंग का खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में यूएई वॉशिंगटन और जेरूसलम दोनों के साथ अपना सुरक्षा तंत्र और मजबूत करने की कोशिश में है।
नेतान्याहू के इस ताजा गुप्त दौरे के पीछे एक और बड़ा विवाद भी जुड़ा हुआ है। इस्रायली अखबार हाआरेत्झ ने हाल ही में दावा किया था कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इस्रायल पर जो भयानक हमला किया, उससे करीब 10 दिन पहले ही यूएई के राष्ट्राध्यक्ष ने खुद नेतान्याहू को एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की पूर्व जानकारी दे दी थी। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि यह इशारा वक्त पर मिलने के बावजूद इस्रायली सुरक्षा एजेंसियों तक नहीं पहुंचाया गया।
प्रधानमंत्री नेतान्याहू ने अखबार के इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे बिल्कुल झूठी और गुमराह करने वाली रिपोर्ट बताते हुए संबंधित अखबार पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। लेकिन इस्रायल में आने वाले वक्त में होने वाले चुनावों को देखते हुए विपक्षी पार्टियों ने इस मुद्दे पर नेतान्याहू को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष के नेता इसे सुरक्षा में बड़ी चूक बताते हुए नेतान्याहू के नेतृत्व और नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।
नेतान्याहू और शेख मोहम्मद बिन झायेद के बीच यह पहली गुप्त मुलाकात नहीं है। इससे पहले भी कई बार इन दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में बैठकें होने की जानकारी सामने आई थी। इसी साल 26 मार्च को ओमान की सीमा के पास अबू धाबी के अल-ऐन नखलिस्तान शहर में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। उस वक्त यूएई ने शुरुआत में इस मुलाकात से इनकार किया था, लेकिन बाद में मई महीने में इस्रायली पीएम के दफ्तर ने इस गुप्त दौरे की खबर की पुष्टि कर दी थी।
इराण की बढ़ती आक्रामकता और इलाके में बढ़ते तनाव से निपटने के लिए यूएई और इस्रायल के बीच पर्दे के पीछे चल रहा यह सहयोग काफी अहम माना जा रहा है। अब्राहम करार ने अरब जगत में इस्रायल के साथ रिश्ते बनाने का एक नया अध्याय शुरू किया था। आज के बदलते हालात में यूएई वह देश है जो अमेरिका के साथ-साथ इस्रायल से भी सीधे बातचीत कर सकता है। यही वजह है कि इराण की नजर अमेरिका पर टिकी होने के बीच नेतान्याहू की यह गुप्त मुलाकात आने वाले वक्त में मिडल ईस्ट की सुरक्षा को लेकर नए समीकरण तय कर सकती है।