एबीव्हीपी की मांग, 20 सितंबर को घोषित हो 'बंगाली भाषा दिवस', दारीभीट कांड की जांच भी मांगी
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने पश्चिम बंगाल सरकार से 20 सितंबर को बंगाली भाषा दिवस घोषित करने की मांग की है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीव्हीपी ने पश्चिम बंगाल सरकार के सामने एक नई मांग रखी है। संगठन चाहता है कि राज्य में 20 सितंबर को औपचारिक रूप से बंगाली भाषा दिवस घोषित किया जाए। इसके पीछे वजह है उत्तर दिनाजपुर के दारीभीट में 20 सितंबर 2018 को हुई एक घटना, जिसमें दो लोगों की जान गई थी। एबीव्हीपी का कहना है कि राजेश सरकार और तपस बर्मन नाम के इन दोनों की मौत को याद रखने के लिए इस तारीख को आधिकारिक मान्यता मिलनी चाहिए।
दारीभीट में हुई इस घटना में राजेश सरकार और तपस बर्मन की मौत पुलिस की फायरिंग में हुई थी। एबीव्हीपी का दावा है कि ये दोनों उस समय एक आंदोलन में शामिल थे जो मातृभाषा के अधिकार और उसकी सुरक्षा से जुड़ा हुआ था, और इसी आंदोलन के दौरान उनकी जान गई। इसी वजह को आधार बनाकर संगठन ने पश्चिम बंगाल में 20 सितंबर को बंगाली भाषा दिवस के रूप में मनाने की मांग उठाई है।
एबीव्हीपी खुद यह मानता है कि दुनिया भर में बंगाली भाषा दिवस असल में 21 फरवरी को मनाया जाता है। मगर संगठन का तर्क है कि इस तारीख की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि उस समय के पूर्वी पाकिस्तान और आज के बांग्लादेश की भाषा से जुड़ी हुई है, भारत से नहीं। एबीव्हीपी का कहना है कि पश्चिम बंगाल की अपनी पहचान रवींद्रनाथ टैगोर और काजी नजरुल इस्लाम जैसे साहित्यकारों की विरासत से जुड़ी है, और यहां मातृभाषा को लेकर हुई दारीभीट की घटना को भी अलग से उचित सम्मान और आधिकारिक मान्यता मिलनी चाहिए।
भाषा दिवस की मांग के साथ ही एबीव्हीपी ने दारीभीट कांड की निष्पक्ष और जल्द जांच की भी मांग रखी है। संगठन का कहना है कि इस घटना की असली सच्चाई सामने आनी चाहिए और जो लोग इसके जिम्मेदार हैं, उनकी भूमिका उजागर कर उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
इसी मांग को लेकर एबीव्हीपी ने रविवार, 20 सितंबर को पश्चिम बंगाल के कई कॉलेजों में बंगाली भाषा दिवस मनाया। इस मौके पर संगठन की ओर से राजेश सरकार और तपस बर्मन को श्रद्धांजलि दी गई।
एबीव्हीपी की इस मांग को लेकर पश्चिम बंगाल में भाषा से जुड़ा विवाद और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।