रविवार, 1 नवंबर 2026

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DJ की तेज आवाज पर पुलिस के आदेश से भाजपा में ही मतभेद, जोशी-दटके के अलग-अलग तर्क

DJ की तेज आवाज पर पुलिस के आदेश से भाजपा में ही मतभेद, जोशी-दटके के अलग-अलग तर्क तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

नागपुर में तेज DJ और लाउड लेजर लाइट पर पुलिस कमिश्नर के आदेश के बाद भाजपा नेता संदीप जोशी और प्रवीण दटके आमने-सामने आ गए हैं, दटके नियमों में भेदभाव का सवाल उठा रहे हैं तो जोशी सेहत की बात कर रहे हैं।

नागपुर में तेज DJ और लाउड आवाज को लेकर पुलिस कमिश्नर के आदेश ने शहर की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। हैरानी की बात यह है कि यह टकराव किसी और पार्टी से नहीं, बल्कि भाजपा के अपने दो बड़े नेताओं संदीप जोशी और प्रवीण दटके के बीच सामने आया है। दोनों ने इस मुद्दे पर बिल्कुल अलग-अलग नजरिया रखा है।

प्रवीण दटके, जो भाजपा विधायक हैं, ने DJ की आवाज की तय सीमा पर कोई ऐतराज नहीं जताया। उनका सवाल इस बात पर है कि यह पाबंदी किस वक्त लगाई जा रही है और क्या सबके लिए बराबर लागू हो रही है। दटके का कहना है कि अगर तेज आवाज से ध्वनि प्रदूषण फैलता है, तो यह नियम हर धर्म के त्योहारों और हर तरह के कार्यक्रम पर एक जैसा लागू होना चाहिए, चाहे वह कोई भी आयोजन हो।

उन्होंने खासतौर पर यह सवाल उठाया कि केवल हिंदू त्योहारों से पहले ही DJ को लेकर परिपत्र क्यों निकाला जाता है। दटके का तर्क है कि प्रशासन को किसी खास त्योहार या धर्म को आधार बनाकर कार्रवाई करने के बजाय, पूरे साल एक जैसी पॉलिसी रखनी चाहिए। इसी वजह से उन्होंने इस आदेश पर दोबारा सोचने और उसे वापस लेने की मांग रखी है।

इसके उलट, संदीप जोशी का कहना है कि उनके लिए यह मामला धर्म का नहीं, बल्कि सेहत का है। जोशी साफ कहते हैं कि उनकी मुहिम किसी धर्म, त्योहार या राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं है। उनकी असली चिंता बुजुर्गों, मरीजों, प्रेग्नेंट महिलाओं और छोटे बच्चों की है, जो तेज आवाज और लेजर लाइट के असर से परेशान हो सकते हैं।

जोशी के मुताबिक तेज आवाज से कमजोर तबके के लोगों को दिक्कत हो सकती है, और लेजर लाइट को लेकर भी सेहत और सुरक्षा के लिहाज से खतरे हैं। उनका कहना है कि उनका विरोध किसी खास धार्मिक आयोजन से नहीं है, बल्कि वे उन नियमों और पाबंदियों के हक में हैं जो लोगों की सेहत और सुरक्षा का ख्याल रखते हैं।

दोनों नेताओं के बयानों से साफ है कि उनकी चिंता का केंद्र अलग-अलग है। दटके नियमों में बराबरी और निष्पक्षता की बात कर रहे हैं, जबकि जोशी सेहत और सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हैं। दटके मानते हैं कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के नियम जरूरी हैं, पर उनका इस्तेमाल हर धर्म और हर आयोजन के लिए एक जैसा होना चाहिए। जोशी की दलील है कि किसी भी धार्मिक या सामाजिक आयोजन से ऊपर लोगों की सेहत और सुरक्षा को तरजीह मिलनी चाहिए।

यानी अब यह विवाद सिर्फ DJ बजाने की इजाजत या पाबंदी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सवाल बन गया है कि नियम किस मकसद से बनाए गए हैं और उन्हें लागू करने का तरीका क्या होना चाहिए। नागपुर का यह मामला अब यह बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या ध्वनि प्रदूषण के नियम सिर्फ त्योहारों के वक्त लागू होने चाहिए, या साल भर हर आयोजन के लिए एक जैसे मानक होने चाहिए।

अब सबकी नजर प्रशासन के अगले कदम पर है। भाजपा के भीतर से आए इन दो अलग नजरियों के बाद देखना यह है कि पुलिस और सरकार आवाज पर कंट्रोल के लिए कैसी और कितनी स्थायी पॉलिसी लाती है, जो दटके की बराबरी की मांग और जोशी की सेहत वाली चिंता, दोनों को साध सके।

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