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23:27 IST

DJ बंदी पर सख्ती नहीं तो जब्ती करें, हाई कोर्ट का पुलिस को आदेश

नागपुर हाई कोर्ट ने त्योहारों में DJ और तेज साउंड सिस्टम पर सिर्फ नोटिफिकेशन काफी नहीं, जमीन पर कार्रवाई जरूरी बताया

DJ बंदी पर सख्ती नहीं तो जब्ती करें, हाई कोर्ट का पुलिस को आदेश तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

त्योहारों के मौसम में DJ और हाई-डेसिबल साउंड सिस्टम से हो रहे शोर को लेकर नागपुर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पुलिस और राज्य सरकार को सख्त लहजे में सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ बैन का ऑर्डर या नोटिफिकेशन निकाल देने से काम नहीं चलेगा, नियम तोड़ने वालों पर जमीन पर असली कार्रवाई दिखनी चाहिए।

यह आदेश न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की बेंच ने दिया। बेंच ने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद अगर कोई DJ या तेज आवाज वाला साउंड सिस्टम लगाकर चलाता पाया जाए, तो पुलिस आयुक्त और संबंधित पुलिस उपायुक्त उस पर फौरन कार्रवाई करें। जरूरत पड़े तो भारी साउंड इक्विपमेंट और उसे ढोने वाली गाड़ियों को जब्त करने में भी हिचकना नहीं है।

कोर्ट ने राज्य सरकार को हिदायत दी कि 11 सितंबर से 1 नवंबर 2026 तक पूरे विदर्भ के हर जिले में ध्वनि प्रदूषण के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए। सुनवाई में याचिकाकर्ता की तरफ से वकील मंडलेकर ने कोर्ट को बताया कि पुलिस आयुक्त की निषेधाज्ञा के बावजूद त्योहारों में शोर के नियम धड़ल्ले से तोड़े जा रहे हैं।

राज्य सरकार की तरफ से पुलिस उपायुक्त ने हलफनामा देकर बताया कि दही हंडी, पोला, तान्हा पोला, ताजुद्दीन बाबा उर्स, गणेशोत्सव, दुर्गा पूजा और धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस जैसे आने वाले त्योहारों को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत 2 सितंबर 2026 को अलग से नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इसके मुताबिक 3 सितंबर की मध्यरात्रि से लेकर 1 नवंबर 2026 की रात 11:59 बजे तक DJ सिस्टम, मल्टी-स्पीकर, प्लाज्मा साउंड सिस्टम, प्रेशर मिड साउंड सिस्टम और इनके लिए मॉडिफाई की गई गाड़ियों के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। संचालकों और आयोजकों से कहा गया है कि वे ऐसे उपकरण और गाड़ियां खुद अपनी कस्टडी में लॉक करके सुरक्षित रखें।

सुनवाई के दौरान पोला पर्व की शोभायात्रा का एक वीडियो भी कोर्ट के सामने रखा गया। कोर्ट ने वह फुटेज देखा और उसमें दर्ज साउंड लेवल की जांच भी करवाई, जिसमें पता चला कि आवाज का स्तर कानूनन तय सीमा से कहीं ज्यादा था। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि सिर्फ कागज पर ऑर्डर निकालने से कुछ नहीं होगा। इसी के बाद कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया कि वह पक्का करे कि बैन किए गए DJ और साउंड सिस्टम का इस्तेमाल न हो, और अगर उल्लंघन हो तो उस पर ठोस कार्रवाई की जाए।

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