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दिवाली से पहले सोना-चांदी सस्ते, चांदी 2 लाख रुपये के नीचे आई

दिवाली और शादियों का सीजन नजदीक है और सोने-चांदी के दाम अचानक काफी गिर गए हैं। चांदी 2 लाख रुपये से नीचे आ गई है।

दिवाली से पहले सोना-चांदी सस्ते, चांदी 2 लाख रुपये के नीचे आई तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दिवाली और शादियों का सीजन बस कुछ ही दिन दूर है और ठीक इसी वक्त सोने-चांदी के बाजार से ग्राहकों को राहत देने वाली खबर आई है। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार चढ़ रहे सोने-चांदी के दामों में अचानक बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। चांदी का भाव 2 लाख रुपये के नीचे चला गया है और सोना भी काफी सस्ता हुआ है। जो मिडिल क्लास और आम ग्राहक सोना-चांदी खरीदने का सपना देख रहे थे, उनके लिए यह अच्छा मौका बन गया है।

भारतीय बाजार और दुनिया भर में कीमती धातुओं के दामों में बड़ी उथल-पुथल दिख रही है। इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़ों के मुताबिक तस्वीर कुछ ऐसी है।

IBJA के आंकड़ों के हिसाब से 30 सितंबर को 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,888 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 23 अक्टूबर को यह गिरकर 1,41,670 रुपये पर आ गया। यानी सिर्फ 24 दिन में 24 कैरेट सोना 6,258 रुपये सस्ता हुआ। इसी दौरान 22 कैरेट सोना 1,35,915 रुपये से गिरकर 1,29,566 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा, यानी 6,349 रुपये की कमी आई। MCX पर भी सोने का वायदा भाव दबाव में है और करीब 1,41,994 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बंद हुआ। अपने रिकॉर्ड स्तर से सोना लगभग 50,000 रुपये नीचे आ चुका है।

चांदी में गिरावट सोने से भी ज्यादा रही। 30 सितंबर को एक किलो चांदी 2,20,435 रुपये की थी, जो 23 अक्टूबर तक गिरकर 1,94,415 रुपये पर आ गई। यानी एक महीने में चांदी 26,020 रुपये प्रति किलो सस्ती हुई। भाव 2 लाख रुपये से नीचे जाने से बर्तन, सिक्के और दूसरी चीजें खरीदने वालों को बड़ी राहत मिली है। अगस्त में चांदी 2,48,800 रुपये के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर थी, वहां से यह करीब 56,000 रुपये टूट चुकी है। MCX पर भी चांदी का वायदा भाव 2 लाख रुपये के नीचे चल रहा है।

इस गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं है, कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण साथ काम कर रहे हैं। पहली वजह अमेरिकन फेडरल रिजर्व और ब्याज दरों की अनिश्चितता है। अमेरिका के सेंट्रल बैंक (Fed) की नीतियों का सीधा असर सोने-चांदी के बाजार पर पड़ता है। अगर अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची बनी रहें तो सोने जैसी चीज का आकर्षण घटता है, क्योंकि उससे नियमित ब्याज नहीं मिलता। इसी वजह से निवेशक सोने की जगह दूसरे विकल्पों की तरफ जा रहे हैं।

दूसरी वजह अमेरिकन ट्रेजरी बॉन्ड और डॉलर की मजबूती है। ट्रेजरी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न (Yield) बढ़ा है और डॉलर मजबूत हुआ है। जब बॉन्ड मार्केट से अच्छा रिटर्न मिलता है, तो सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने से निवेशक पैसा निकाल लेते हैं। इससे सोने-चांदी के दामों पर भारी दबाव बनता है।

तीसरी वजह मिडिल ईस्ट में नए सिरे से भड़का तनाव और कच्चे तेल (Brent Crude) की बढ़ती कीमतें हैं। इनसे महंगाई की चिंता फिर बढ़ी है। तेल के दाम चढ़ने पर महंगाई काबू में रखने के लिए सेंट्रल बैंक सख्त कदम उठाने की ओर जाते हैं, जिसका सीधा उल्टा असर सोने के दामों पर पड़ता है।

चौथी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इक्विटी मार्केट है। टेक्नोलॉजी सेक्टर में, खासकर AI कंपनियों के शेयरों से बड़े पैमाने पर पैसा बाहर निकल रहा है। इससे निवेशक सुरक्षित संपत्ति की जगह दूसरे वित्तीय साधनों पर ध्यान दे रहे हैं और पूरे बाजार के सेंटिमेंट पर इसका असर पड़ा है।

पांचवीं वजह प्रॉफिट बुकिंग है। पिछले कुछ महीनों में सोना-चांदी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचे थे। 2025 में चांदी के दाम 170 प्रतिशत बढ़े थे। रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद निवेशकों ने बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी, जिससे बाजार में खूब बिकवाली दिखी।

एक दिलचस्प विरोधाभास भी है। एक तरफ सोने-चांदी के असली दाम और वायदा बाजार गिर रहे हैं, दूसरी तरफ सोने के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में हालत बिल्कुल अलग है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के प्रमुख गोल्ड ETF में लगातार 14वें हफ्ते सोने की आवक (Inflow) जारी है। बाजार के जानकारों का कहना है, "दीर्घकालीन निवेशक भू-राजनीतिक खतरों और करेंसी की क्रयशक्ति घटने से बचने के लिए ETF के जरिए लगातार सोना जमा कर रहे हैं।" इससे सोने की पूरी तरह बड़ी गिरावट रोकने में मदद मिली है।

आगे क्या होगा, इस पर जानकारों के अंदाज मिले-जुले हैं। भविष्य की दिशा कुछ बातों पर टिकी रहेगी। चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहनों में नहीं, बल्कि सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे औद्योगिक क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर होता है। मैन्युफैक्चरिंग में सुस्ती का असर चांदी की मांग पर पड़ता है। आगे औद्योगिक मांग सुधरी तो चांदी के दाम फिर उछल सकते हैं। दुनिया भर के कई देशों के सेंट्रल बैंक अब भी अपने खजाने में सोना जमा कर रहे हैं, जिससे सोने के दामों को मजबूत सहारा मिला है। विश्लेषकों के मुताबिक अगर महंगाई लंबे समय तक टिकी रही तो सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में कटौती में देर कर सकते हैं, जिससे सोने पर कुछ वक्त दबाव रह सकता है। लेकिन आर्थिक मंदी या अनिश्चितता बढ़ी तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की चमक फिर बढ़ेगी।

धनतेरस और दिवाली पर सोना-चांदी खरीदना हमारी संस्कृति का हिस्सा है और शादियों का सीजन करीब होने से मांग बनी हुई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस बार ग्राहकों को अच्छा रिटर्न मिला है और त्योहारों की वजह से बाजार में उत्साह है। खरीदारी करते वक्त कुछ बातें ध्यान में रखनी चाहिए। सिर्फ गहने या बार खरीदने के बजाय गोल्ड ETF या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB, अगर उपलब्ध हो) पर भी विचार किया जा सकता है। गहने खरीदते समय मेकिंग चार्ज, जीएसटी और हॉलमार्क शुल्क के बारे में पक्का कर लें, और याद रखें कि गहने बेचते वक्त मेकिंग चार्ज के पैसे वापस नहीं मिलते। "दाम और गिरेंगे या बढ़ेंगे" जैसे अंदाज पर सारी पूंजी एक साथ लगा देना ठीक नहीं है। अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से किस्तों में खरीदना हमेशा फायदेमंद रहता है।

त्योहारों से पहले आई यह गिरावट ग्राहकों के लिए बड़ा मौका है। वैश्विक बाजार की वजह से अनिश्चितता बनी हुई है, फिर भी भारतीय संस्कृति में सोने-चांदी की खरीद सिर्फ निवेश नहीं, भावना और समृद्धि से भी जुड़ी है। इसलिए स्थानीय बाजार के ताजा दाम देखकर समझदारी से खरीदारी करना ही इस त्योहारी सीजन में फायदे का सौदा रहेगा।

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