गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:11 IST

दिशा सालियन केस में CBI की FIR: कई बड़े नामों की एंट्री, राऊत का बचाव, कदम की जांच की मांग

दिशा सालियन मामले में CBI की FIR दर्ज होने के बाद महाराष्ट्र की सियासत गरमाई, राऊत ने आदित्य ठाकरे को क्लीन चिट दी तो कदम ने सवाल उठाए

सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर रहीं दिशा सालियन की मौत के मामले में छह साल बाद बड़ा मोड़ आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर CBI ने इस केस में FIR दर्ज कर ली है, जिसके बाद महाराष्ट्र की सियासत में हलचल मच गई है। गौरतलब है कि 8 जून 2020 को मुंबई के मालाड इलाके की एक रिहायशी बिल्डिंग से गिरकर दिशा की मौत हुई थी, जिसे उस वक्त पुलिस ने हादसा मानकर दर्ज किया था। इसके ठीक छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा स्थित अपने घर में मृत मिले थे। दोनों मौतों के बीच इतना कम फासला होने की वजह से बरसों से यह चर्चा चलती रही कि दोनों मामलों का आपस में कोई कनेक्शन है, हालांकि दोनों की जांच अलग अलग हुई थी।

जानकारी के मुताबिक CBI की इस FIR में शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे के अलावा एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक चक्रवर्ती, एक्टर दिनो मोरिया, रोहन रॉय, सूरज पंचोली और आदित्य ठाकरे के सुरक्षाकर्मी का नाम भी है। इनके साथ ही पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे, मुंबई पुलिस के तत्कालीन कमिश्नर परमबीर सिंह और डीसीपी विशाल ठाकुर के नाम भी FIR में दर्ज बताए जा रहे हैं। उस वक्त के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख का नाम भी शामिल है, साथ ही कुछ पुलिस अफसर, फॉरेंसिक अधिकारी और डॉक्टरों को भी नामजद किया गया है। मालवणी पुलिस स्टेशन के स्टाफ, दिशा के पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर और स्टाफ, कलीना की फॉरेंसिक साइंस लैब के अधिकारी और रीजेंट गैलेक्सी बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड भी जांच के घेरे में हैं। यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि सिर्फ FIR में नाम आने का यह मतलब कतई नहीं कि वह शख्स दोषी है, हर किसी की भूमिका सबूतों और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही साफ होगी।

CBI के FIR दर्ज करने से दो दिन पहले दिशा के पिता सतीश सालियन का बयान भी दर्ज हुआ था, जिसमें उन्होंने कई नामों का जिक्र करते हुए बेटी की मौत के पीछे साजिश का शक जताया था। उनकी मांग है कि बेटी की मौत को खुदकुशी की तरह पेश करने के लिए झूठी कहानी बनाने, सबूत छिपाने, मिटाने या उनसे छेड़छाड़ करने के आरोपों की गहराई से पड़ताल हो। हाईकोर्ट ने FIR दर्ज करने का आदेश देने के साथ ही जांच पर नजर रखने के लिए CBI के एक सीनियर अफसर की नियुक्ति करने को भी कहा है। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच पहले भी CBI कर चुकी है और उसने इसे खुदकुशी बताते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन उस रिपोर्ट पर अदालत में अब तक सुनवाई नहीं हुई है।

FIR दर्ज होते ही शिवसेना ठाकरे गुट के सांसद संजय राऊत की प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है और आदित्य ठाकरे का दिशा की मौत से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है। राऊत का कहना था कि मुंबई पुलिस इस केस की पहले भी कई बार जांच कर चुकी है, इसलिए उस पर सवाल उठाने की कोई गुंजाइश नहीं बनती, यहां तक कि विरोधी दल की सरकार के दौर में भी पुलिस ने निष्पक्ष जांच करने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि वे अब तक इस पर इसलिए चुप रहे क्योंकि यह एक लड़की की मौत और उसके परिवार के गम से जुड़ा नाजुक मसला है। राऊत ने यह भी दावा किया कि जब महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस थे और गृह मंत्रालय भी उन्हीं के पास था, उसी दौर में इस केस की जांच पूरी कर क्लोजर रिपोर्ट दी गई थी, जिसमें आदित्य ठाकरे का मामले से कोई लेना देना नहीं पाया गया था। उनके मुताबिक आदित्य के खिलाफ कोई सबूत नहीं है, हालांकि CBI की नई FIR से जुड़े दावों पर आखिरी बात जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी, और सिर्फ नाम आ जाने से कोई दोषी नहीं ठहर जाता।

राऊत ने इस मामले के राजनीतिक इस्तेमाल पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि सियासी फायदे के लिए इस मुद्दे को बार बार उछाला जा रहा है, जिससे दिशा और उनके परिवार की गरिमा को ठेस पहुंच रही है। उन्होंने इसे राजनीतिक अखाड़ा करार दिया और कहा कि यह महाराष्ट्र की परंपरा के खिलाफ है, ठाकरे परिवार को मराठी जनता के दिलों में जो सम्मान हासिल है, उसे बदनाम करने की कोशिश हो रही है। जांच पूरी होने तक किसी को दोषी न मानने की कानूनी समझ का हवाला देते हुए राऊत ने मीडिया में चल रही बहस पर भी सवाल उठाया और कहा कि वे इस बदनामी की मुहिम के खिलाफ लड़ते रहेंगे। FIR के लीक होने पर भी राऊत ने सवाल खड़े किए, उनका कहना था कि 16 पन्नों की FIR में से आखिर सिर्फ एक पन्ना बाहर कैसे आया। उन्होंने आरोप लगाया कि रविवार को सह्याद्री गेस्ट हाउस पर एक मीटिंग हुई थी, जिसके बाद दो नेता एक ही गाड़ी में बैठकर एशियाटिक लाइब्रेरी गए, और उसी मीटिंग व सफर में जो बातें तय हुईं, उन्हीं के हिसाब से FIR के पन्ने लिखे गए और बाद में लीक कर दिए गए। इन आरोपों की किसी और सूत्र से पुष्टि नहीं हो पाई है, इसलिए इन्हें फिलहाल राऊत के दावों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

दूसरी तरफ शिवसेना नेता रामदास कदम ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे पर तीखा हमला बोला। "सत्यमेव जयते" कहते हुए कदम ने इस केस की गहराई से जांच की मांग की और पूछा कि क्या आदित्य ठाकरे आरोपी हैं, क्या दिशा सालियन के साथ रेप हुआ था, इन सवालों की सच्चाई अब जांच से ही सामने आनी चाहिए। कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज होने के बाद अब असलियत सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है। कदम ने दिशा के पिता के आदित्य ठाकरे का नाम लेने का जिक्र करते हुए कहा कि इन दावों की भी छानबीन होनी चाहिए, हालांकि किसी शिकायत या FIR में नाम आ जाने का मतलब यह नहीं कि जुर्म साबित हो गया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहते इस मामले में सबूत मिटाने की कोशिश हुई थी, इसकी भी जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही कदम ने आदित्य ठाकरे की कथित रात की गतिविधियों पर तंज कसते हुए पूछा कि वे रात 12 बजे कहां जाते थे और सुबह 6 बजे कहां से लौटते थे, और कहा, "बालासाहेब ने कमाया और इन लोगों ने गंवाया।"

इसी दौरान मराठा आरक्षण के मसले पर भी कदम ने बयान दिया। मनोज जरांगे पाटील का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मराठा समाज को आरक्षण मिलना चाहिए, यही जरांगे की मांग है, लेकिन त्योहारों का सीजन चल रहा है इसलिए जरांगे को थोड़ा धैर्य रखना चाहिए। कदम ने साफ किया कि मराठा समाज को आरक्षण देते वक्त ओबीसी समाज के साथ कोई नाइंसाफी न हो, यही सरकार की सोच है।

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