मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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20:04 IST

देश में छात्रों की सबसे ज्यादा खुदकुशी महाराष्ट्र में, NCRB के आंकड़े चिंताजनक

NCRB की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में 1,909 छात्रों ने खुदकुशी की, जो देश में सबसे ज्यादा है।

देश में छात्रों की सबसे ज्यादा खुदकुशी महाराष्ट्र में, NCRB के आंकड़े चिंताजनक
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक छात्रों की खुदकुशी के मामले में महाराष्ट्र देश में पहले नंबर पर है। पिछले दस साल में छात्रों की मौतों में चिंताजनक बढ़ोतरी दिखी है।

NCRB की रिपोर्ट "एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया 2024" के अनुसार 2024 में देशभर में 14,488 छात्रों ने खुदकुशी की। 2014 से 2024 के बीच यह सबसे बड़ा आंकड़ा है। 2014 में 8,068 मामले दर्ज हुए थे, यानी इसमें 79.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

2024 में राष्ट्रीय कुल में सबसे बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र का रहा। यहां 1,909 छात्रों ने खुदकुशी की, जो ऐसी सभी मौतों का 13.2 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश 1,585 मामलों के साथ दूसरे, मध्य प्रदेश 1,447 के साथ तीसरे और तमिलनाडु 1,287 के साथ चौथे नंबर पर रहा। इन चारों राज्यों को मिलाकर 2024 में देशभर में दर्ज छात्र खुदकुशी के लगभग 43 प्रतिशत मामले हुए।

लंबे दौर की तस्वीर भी उतनी ही चिंता की है। NCRB के आंकड़ों के मुताबिक 2014 से 2024 के बीच देश में छात्रों की खुदकुशी के 1,23,918 मामले दर्ज हुए। आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार इन 11 सालों में महाराष्ट्र का हिस्सा करीब 17,000 मामलों का रहा।

यह समस्या सिर्फ कॉलेज और यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं है। 2024 में 18 साल से कम उम्र के 10,000 से ज्यादा लोगों की खुदकुशी से मौत दर्ज हुई। इससे पता चलता है कि स्कूल जाने वाले बच्चे भी उतने ही असुरक्षित हैं जितने बड़े छात्र।

परिवार की परेशानियां बड़ी वजह

छात्रों की खुदकुशी की बात होती है तो पढ़ाई के दबाव और इम्तिहान में फेल होने की चर्चा सबसे ज्यादा होती है। लेकिन NCRB के आंकड़े बताते हैं कि वजहें इससे कहीं ज्यादा फैली हुई हैं।

2024 में देशभर में खुदकुशी की सबसे बड़ी दर्ज वजह पारिवारिक समस्याएं रहीं। इम्तिहान में फेल होने को छात्रों की 2,032 मौतों से जोड़ा गया है। यह अहम वजह जरूर है, मगर अकेली नहीं। बीमारी, नशे की लत, रिश्तों से जुड़े मसले, करियर और पेशे की दिक्कतें और पैसों की तंगी भी दर्ज वजहों में शामिल हैं।

दस साल में सबसे तेज उछाल 2019 से 2020 के बीच आया, जब संख्या 21.2 प्रतिशत बढ़ी। 2014 से 2024 की सीरीज में सिर्फ 2022 ऐसा साल रहा जब आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले थोड़ा नीचे गया।

महाराष्ट्र पर दबाव ज्यादा

महाराष्ट्र की स्थिति इसलिए खास है कि पुणे और मुंबई समेत यहां कई बड़े शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा केंद्र हैं। NCRB के आंकड़ों की पड़ताल करने वाले एक रिसर्च पेपर ने भी महाराष्ट्र में छात्र खुदकुशी के लगातार ऊंचे बोझ की ओर इशारा किया है। उसमें इम्तिहान से जुड़ी मौतों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत बताई गई है, साथ ही NCRB डेटा की सीमाओं के बारे में आगाह भी किया गया है।

इन आंकड़ों के बाद पढ़ाई की होड़, परिवार की उम्मीदों और पढ़ाई व करियर की अनिश्चितता से जूझ रहे छात्रों की मानसिक सेहत पर फिर से ध्यान गया है। विशेषज्ञ और नीति बनाने वाले लोग लगातार कह रहे हैं कि रोकथाम सिर्फ इम्तिहान के तनाव पर टिकी नहीं हो सकती, क्योंकि सरकारी आंकड़ों में दर्ज वजहें कई तरह की हैं।

रोकथाम के लिए सरकारी कदम

केंद्र ने खुदकुशी रोकने के लिए कई स्तर पर कदम उठाए हैं, जिनमें छात्रों, शिक्षकों और परिवारों के लिए मनोवैज्ञानिक मदद भी शामिल है। 2022 में शुरू की गई नेशनल सुसाइड प्रिवेंशन स्ट्रैटेजी का लक्ष्य 2030 तक देश में खुदकुशी से मौत की दर 10 प्रतिशत घटाना है।

शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग सेंटरों के नियमन के लिए गाइडलाइंस भी जारी की हैं और छात्रों को पढ़ाई व मानसिक सहारा देने वाली पहल शुरू की हैं।

फिर भी ताजा आंकड़े चुनौती की गहराई दिखाते हैं, खासकर महाराष्ट्र के लिए, जहां देश में दर्ज छात्र खुदकुशी की सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं।

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