दवाओं की गुणवत्ता में समझौता नहीं: स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर का सरकारी अस्पतालों को निर्देश
महाराष्ट्र के आरोग्यमंत्री प्रकाश आबिटकर ने सार्वजनिक आरोग्य विभाग को दवाओं की क्वालिटी चेक के लिए 'काउंटरफिट ड्रग डिटेक्शन डिवाइस' का असरदार इस्तेमाल करने और महीनेभर स्पेशल जांच मुहिम चलाने का निर्देश दिया।
राज्य के नागरिकों को अच्छी क्वालिटी की दवाएं मिले, इसमें किसी भी तरह की तडजोड नहीं होनी चाहिए। यह बात महाराष्ट्र के आरोग्यमंत्री प्रकाश आबिटकर ने कही है। सार्वजनिक आरोग्य विभाग के अंडर आने वाले अस्पतालों को जो दवाएं सप्लाई होती हैं, उनकी क्वालिटी चेक करने के लिए 'काउंटरफिट ड्रग डिटेक्शन डिवाइस' नाम के नए उपकरण का असरदार इस्तेमाल किया जाए, ऐसा निर्देश उन्होंने दिया है। साथ ही दवा की क्वालिटी जांचने के लिए तय स्टैंडर्ड प्रोसीजर (एसओपी) फॉलो करते हुए रेगुलर जांच करने को भी कहा गया है।
आरोग्य भवन में दवाओं की क्वालिटी जांच को लेकर हुई एक मीटिंग में आबिटकर यह बोल रहे थे। इस मीटिंग में सार्वजनिक आरोग्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ. निपुण विनायक, आरोग्य सचिव ई. रवींद्रन, आरोग्य सेवा आयुक्त संजय काटकर, शहरी आरोग्य सेवा आयुक्त डॉ. सुनील भोकरे और आरोग्य संचालक डॉ. नितीन अंबाडेकर समेत सीनियर अफसर मौजूद थे।
राज्य के सार्वजनिक अस्पतालों को सप्लाई होने वाली दवाओं की क्वालिटी जांचने के लिए इस डिवाइस के इस्तेमाल का मूल्यांकन एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में किया गया था। इसके बाद सरकार के फैसले के तहत राज्य के आठ परिमंडलों के लिए एक-एक डिवाइस मुहैया कराई गई है। उपसंचालक कार्यालय के सीनियर औषध निर्माण अफसरों को यह डिवाइस चलाने की ट्रेनिंग महाराष्ट्र वैद्यकीय वस्तू खरेदी प्राधिकरण के जरिए दी जा चुकी है।
इसी को देखते हुए अब हर परिमंडल के जिलों के लिए दवा जांच का टाइम-टेबल तय करके एक्चुअल फील्ड इंस्पेक्शन किया जाएगा। जांच की प्रोसेस, उसका पालन कितना हो रहा है, कितनी दवाओं की जांच हुई और उसकी डिटेल रिपोर्ट हर हफ्ते सबमिट करनी होगी।
आरोग्य विभाग के सभी आठ परिमंडलों में अगले एक महीने तक स्पेशल दवा क्वालिटी जांच मुहिम चलाई जाएगी। इस मुहिम में नई मिली दवाओं के साथ-साथ अस्पतालों में पहले से पड़े दवा स्टॉक के सैंपल भी रैंडम तरीके से चेक किए जाएंगे। पहली जांच, आगे की जांच के लिए सैंपल भेजना, कन्फर्मेशन रिपोर्ट आने के बाद क्या करना है और उसका रिकॉर्ड रखना, इन सबके लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की जाएंगी। सारे अस्पताल राज्यस्तरीय रुग्णालय कक्ष के अंडर आते हैं, इसलिए 'काउंटरफिट ड्रग डिटेक्शन डिवाइस' के इस्तेमाल की निगरानी सहसंचालक और हॉस्पिटल लेवल के कक्ष के जरिए होगी। संबंधित अथॉरिटी, हॉस्पिटल सिस्टम और खरीद सिस्टम मिलकर जॉइंट टीमें बनाएं ताकि जांच का काम और असरदार हो सके, यह सुझाव भी दिया गया है।
दवा के हिसाब से सैंपल जांच, डिवाइस चलाना, जांच के रिजल्ट का एनालिसिस और रिकॉर्ड मैनेजमेंट को लेकर संबंधित स्टाफ को ट्रेनिंग दी जाए। हर डिपार्टमेंट में एक्चुअल सैंपल पर प्रैक्टिस करने से जांच में एक्यूरेसी बढ़ेगी, यह बात आरोग्यमंत्री आबिटकर ने कही। दवाओं की क्वालिटी जांचने के लिए मिली इन डिवाइस का असरदार इस्तेमाल करके फील्ड लेवल पर रेगुलर जांच का सिस्टम और मजबूत किया जाएगा। अच्छी क्वालिटी की दवाओं की सप्लाई और नागरिकों की सेहत की सेफ्टी को सबसे ऊपर रखते हुए दवा क्वालिटी जांच की प्रोसेस और सख्ती से लागू की जाएगी, यह साफ किया गया।