दवा की कीमत में कई स्तर के मार्जिन, CCI की स्टडी में चेन का खुलासा
मेडिकल के काउंटर पर दिखने वाली एमआरपी में सिर्फ बनाने का खर्च नहीं, निर्माता से रिटेलर तक के ट्रेड मार्जिन भी जुड़े होते हैं।
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मेडिकल के काउंटर पर दवा के पैकेट पर छपी एमआरपी देखकर मरीज पैसे चुकाता है। लेकिन इस आखिरी कीमत के पीछे सिर्फ दवा बनाने का खर्च नहीं होता। निर्माता से लेकर स्टॉकिस्ट, थोक विक्रेता और खुदरा विक्रेता तक वितरण की जो चेन चलती है, उसके अलग-अलग स्तरों पर जुड़ने वाले ट्रेड मार्जिन का असर भी दवा की अंतिम कीमत पर पड़ता है।
यह कीमत की चेन सीसीआई यानी भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के दवा क्षेत्र पर किए गए अध्ययन से साफ होती है। आयोग के 'मार्केट स्टडी ऑन द फार्मासिटिकल सेक्टर इन इंडिया' नाम के इस अध्ययन में निर्माता की कीमत, वितरण का मार्जिन, थोक और खुदरा मार्जिन और कर जैसे कई 'प्राइस पॉइंट्स' को परखा गया। इससे यह बात सामने आती है कि पैकेट पर छपी कीमत सीधे-सीधे उत्पादन खर्च नहीं है।
दवा के कारोबार की चेन आम तौर पर कंपनी से स्टॉकिस्ट, स्टॉकिस्ट से रिटेलर और रिटेलर से मरीज तक की होती है। कंपनी से स्टॉकिस्ट को जो कीमत मिलती है, वह एक अलग कीमत मानी जाती है, और स्टॉकिस्ट से खुदरा विक्रेता को मिलने वाली कीमत अलग। इसके बाद ग्राहक के लिए एमआरपी तय की जाती है।
सीसीआई के अध्ययन के मुताबिक औषध कीमत नियंत्रण आदेश के दायरे में आने वाली शेड्यूल दवाओं के लिए वैधानिक ट्रेड मार्जिन 24 प्रतिशत है। इसमें खुदरा विक्रेता का हिस्सा 16 प्रतिशत और थोक विक्रेता का हिस्सा 8 प्रतिशत है। नॉन-शेड्यूल दवाओं के लिए कोई सीमा तय नहीं है, इसलिए थोक स्तर पर 10 प्रतिशत और खुदरा स्तर पर 20 प्रतिशत मार्जिन का ढांचा इस्तेमाल किया जाता है।
दवा कंपनियों की जानकारी के मुताबिक यह मार्जिन आखिरी स्तर तक एक जैसा टिका नहीं रहता, बल्कि बढ़ता ही जाता है। इसी वजह से असल में दवा के दाम में बढ़ोतरी दिखाई देती है।
कुछ कंपनियां एमआरपी तय करते वक्त उत्पादन खर्च के साथ बिजली बिल, कर्मचारियों की तनख्वाह और दूसरे प्रबंधकीय खर्च का भी हिसाब रखती हैं। निर्माता, स्टॉकिस्ट, वितरक और खुदरा विक्रेता, हर स्तर पर मार्जिन होता है। यानी मरीज जो रकम चुकाता है, उसमें इन सब स्तरों का मार्जिन शामिल रहता है।
अर्जेनिक्स हेल्थ केअर प्रा. लि. के राष्ट्रीय बिक्री विभाग के एस. चंद्रशेखर ने यह जानकारी दी। उनके मुताबिक ग्राहक मेडिकल में छूट मांगता है, लेकिन यह छूट आखिर किसके मार्जिन में से दी जाती है, यह एक अहम सवाल है।