चंद्रपुर में जयंती-2: युवाओं को यह फिल्म क्यों देखनी चाहिए?
शुक्रवार को चंद्रपुर में फिल्म जयंती-2 को लेकर मीट द प्रेस कार्यक्रम हुआ, जिसमें कलाकारों ने पत्रकारों से बात करते हुए फिल्म के पीछे के सामाजिक संदेश पर खुलकर चर्चा की।
चंद्रपुर में शुक्रवार को फिल्म जयंती-2 को लेकर मीट द प्रेस कार्यक्रम रखा गया, जिसमें फिल्म के कलाकारों ने पत्रकारों से रूबरू होकर अपनी बात रखी। इस कार्यक्रम में फिल्म के कलाकार शुभम, प्रसन्नजीत और अविनाश लेनगुरे मौजूद रहे। इन तीनों ने पत्रकारों के सामने विस्तार से बताया कि यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बनाई गई है, बल्कि इसके जरिए एक सामाजिक संदेश दिया गया है और यह एक तरह से सामाजिक जागरूकता की कोशिश भी है।
कलाकारों ने साफ शब्दों में कहा कि जयंती-2 किसी एक खास समाज तक सीमित फिल्म नहीं है, बल्कि समाज के हर तबके को सोचने पर मजबूर करती है। उनका कहना था कि यह फिल्म सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सीधी और खुलकर बात करती है, जो आमतौर पर फिल्मों में इतनी साफगोई से नहीं दिखाए जाते।
फिलहाल यह फिल्म पूरे महाराष्ट्र में लगी हुई है और चंद्रपुर में भी चार सिनेमाघरों में चल रही है। इसी वजह से फिल्म की टीम खासतौर पर चंद्रपुर आई थी। कलाकारों ने बताया कि उनकी इस मुलाकात के पीछे मकसद यही था कि नौजवानों और समाज में इन मुद्दों को लेकर संवेदनशीलता बढ़े और इन पर खुलकर बातचीत हो सके, ताकि लोग इन विषयों पर आपस में सकारात्मक तरीके से संवाद कर सकें।
टीम ने यह भी बताया कि इस फिल्म का नाता सीधे चंद्रपुर की जमीन और यहां के इतिहास से जुड़ा हुआ है। जिले के ग्रामीण इलाके के दो स्थानीय कलाकारों ने भी इस फिल्म में अहम किरदार निभाए हैं, जो चंद्रपुर के लिए एक खास बात है। फिल्म की जनजागृति और प्रचार के इस पूरे अभियान में चंद्रपुर से अविनाश लेनगुरे के अलावा सम्राट कांबळे, अमित, केशव मेश्राम और कुछ और साथी भी जुड़े रहे और उन्होंने इस काम में अपना योगदान दिया।
इस मौके पर जयंती-2 की पूरी टीम ने समाज के हर व्यक्ति से अपील की, खासकर युवा पीढ़ी और छात्रों से, कि वे यह फिल्म बड़ी संख्या में देखें। साथ ही उन्होंने कहा कि फिल्म में जो मुद्दे उठाए गए हैं, उन पर लोग आपस में खुलकर बातचीत करें और उन विषयों पर सोच-विचार करें।