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चंद्रपुर में बावनकुळे ने की जोरगेवार की तारीफ, 2029 के विधानसभा उम्मीदवार पर चर्चा

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने चंद्रपुर के महेश भवन में विधायक किशोर जोरगेवार की सार्वजनिक तारीफ की और 2029 के चुनाव का जिक्र किया।

चंद्रपुर में बावनकुळे ने की जोरगेवार की तारीफ, 2029 के विधानसभा उम्मीदवार पर चर्चा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

चंद्रपुर बीजेपी में इन दिनों किशोर जोरगेवार की उम्मीदवारी को लेकर चर्चा चल रही है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने महेश भवन में विधायक जोरगेवार की सबके सामने तारीफ की, जिसके बाद यह चर्चा और तेज हो गई है।

बावनकुळे नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के बीजेपी-महायुति उम्मीदवार सुधाकर कोहळे के प्रचार के लिए चंद्रपुर के महेश भवन में आयोजित स्नातक संवाद मेले में बोल रहे थे। इस मौके पर उन्होंने जोरगेवार के काम की खुलकर सराहना की। बावनकुळे ने जोरगेवार का जिक्र ऐसे विधायक के तौर पर किया, जो मुख्यमंत्री से आधी रात को भी दस्तखत लेकर काम करवा लेते हैं। उन्होंने कहा, "वे काबिल हैं, इसलिए विधायक हैं।" यानी वे काबिल हैं, इसीलिए विधायक हैं।

बावनकुळे के भाषण में सबसे ज्यादा सियासी वजन वाली बात 2029 के चुनाव का सीधा जिक्र रही। उन्होंने स्नातक मतदाताओं से सुधाकर कोहळे की जीत के लिए कोशिश करने की अपील की और साथ ही इस चुनाव को जोरगेवार के आने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़ दिया। इसी वजह से इस बयान को सिर्फ तारीफ तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि आने वाले सियासी समीकरणों के लिहाज से गंभीरता से देखा जा रहा है।

पृष्ठभूमि यह है कि चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र का पुनर्गठन हो सकता है। बीजेपी नेता सुधीर मुनगंटीवार पहले कई बार साफ कर चुके हैं कि अगर यह क्षेत्र खुला हुआ तो वे यहां से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने चंद्रपुर क्षेत्र में सियासी तैयारी भी शुरू कर दी है। दूसरी तरफ मौजूदा बीजेपी विधायक किशोर जोरगेवार भी यहां से फिर चुनाव लड़ने का रुख साफ कर चुके हैं। इसी वजह से उम्मीदवारी को लेकर बीजेपी के अंदर संभावित टकराव की चर्चा शुरू हो गई थी।

इस पृष्ठभूमि में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने प्रचार के मंच से आने वाले विधानसभा चुनाव का जिक्र जोरगेवार के नाम के साथ जोड़ा। माना जा रहा है कि इससे जोरगेवार की सियासी भूमिका को बल मिला है। बावनकुळे के बयान को चंद्रपुर बीजेपी के आगे के नेतृत्व और उम्मीदवारी की चर्चा में एक अहम सियासी संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस पर है कि बीजेपी की स्थानीय राजनीति में इस बयान का क्या असर होता है और मुनगंटीवार की भूमिका से इसका तालमेल कैसे बैठाया जाता है।

जोरगेवार के पास चुनाव लड़ने का लंबा तजुर्बा बताया जाता है। निर्दलीय के तौर पर लड़ते हुए उन्हें देश में सबसे ज्यादा वोटों से मिली जीत उनके सियासी सफर का अहम पड़ाव मानी जाती है। इसके बाद उन्होंने बीजेपी के टिकट पर भी जीत हासिल की और क्षेत्र में अपनी जगह और मजबूत की। इस दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनकी नजदीकी बनी। कहा जाता है कि फडणवीस की अगुवाई में लड़े गए स्थानीय चुनावों में भी बीजेपी को कामयाबी दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही। चुनाव का तजुर्बा, मतदाताओं से संपर्क, पार्टी संगठन पर पकड़ और वरिष्ठ नेतृत्व से रिश्ते जोरगेवार की मजबूत कड़ियां मानी जा रही हैं।

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