बी ब्लड ग्रुप वालों में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा ज्यादा, स्टडी में सामने आई बात
फोर्टिस नोएडा के डॉ. अनुपम बिस्वास ने बताया कि कौन से ब्लड ग्रुप में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा ज्यादा दिखा है।
डायबिटीज आज बहुत आम बीमारी बन चुकी है। जवान और बच्चों समेत ज्यादातर लोग इसकी चपेट में आते दिख रहे हैं। आम तौर पर इसका खतरा उम्र, ज्यादा वजन, शारीरिक हलचल की कमी, खानपान, परिवार में पहले से डायबिटीज और जीवनशैली जैसी बातों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि पिछले कुछ सालों की रिसर्च ने ब्लड ग्रुप और टाइप 2 डायबिटीज के खतरे के बीच एक संभावित रिश्ते की तरफ भी ध्यान खींचा है।
फोर्टिस, नोएडा में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सल्लाहकार डॉ. अनुपम बिस्वास ने बताया है कि किन ब्लड ग्रुप में खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
रिसर्च में दिखा है कि दूसरे ब्लड ग्रुप के मुकाबले 'बी' ब्लड ग्रुप वालों में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा ज्यादा होता है। 2024 में छपी एक स्टडी में पहले हो चुकी कई स्टडीज के नतीजों का विश्लेषण किया गया था। उसमें 'बी' ब्लड ग्रुप और टाइप 2 डायबिटीज के बीच संबंध मिला।
इस स्टडी के मुताबिक दूसरे ब्लड ग्रुप की तुलना में 'बी' ब्लड ग्रुप वालों में डायबिटीज का खतरा 28 टक्के ज्यादा था। लेकिन 'बी' ब्लड ग्रुप होने का मतलब यह नहीं कि उस इंसान को डायबिटीज होगी ही। ब्लड ग्रुप सिर्फ एक खतरे का इशारा देता है।
A, AB और O ब्लड ग्रुप को लेकर अलग-अलग स्टडीज में नतीजे पूरी तरह एक जैसे नहीं मिले हैं। कुछ स्टडीज में O ब्लड ग्रुप वालों में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कम दिखा है, मगर इसकी वजहें अभी पूरी तरह साफ नहीं हैं।
ब्लड ग्रुप और डायबिटीज के बीच साफ रिश्ता है या नहीं, इसका पक्का जवाब फिलहाल मालूम नहीं है। AB और O ब्लड ग्रुप का संबंध शरीर की रक्तवाहिनियों और कुछ खास जैविक प्रक्रियाओं से जोड़ा गया है। सूजन, खून जमने और रक्तवाहिनियों के काम पर इनके संभावित असर की स्टडी की जा रही है। फिर भी इन संभावित संबंधों को डायबिटीज की सीधी वजह नहीं माना जा सकता।
डॉ. बिस्वास के मुताबिक ब्लड ग्रुप बदला नहीं जा सकता, पर डायबिटीज के कई बड़े जोखिम वाले कारण काबू में रखे जा सकते हैं। सेहतमंद वजन, नियमित शारीरिक हलचल, संतुलित खानपान, पूरी नींद और ब्लड शुगर की नियमित जांच डायबिटीज से बचाव और जल्दी पहचान में अहम भूमिका निभाते हैं। जिनके परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, जिनका वजन ज्यादा है, जिनके पेट पर अतिरिक्त चर्बी है या जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल है, उनके लिए नियमित जांच जरूरी बताई गई है।
बताया गया है कि लंबे वक्त तक ब्लड शुगर का स्तर ज्यादा रहे तो शरीर की रक्तवाहिनियां और नसें खराब हो सकती हैं। इससे दिल की बीमारी, किडनी की बीमारी, आंखों की रोशनी की दिक्कत और नसों के खराब होने का खतरा बढ़ता है। इसलिए ब्लड ग्रुप A, B, AB या O कुछ भी हो, डायबिटीज से बचाव और उसकी जल्दी पहचान हर किसी के लिए अहम है।