भारतीयों में डायबिटीज बढ़ने की सिर्फ शुगर नहीं, 6 वजहें: 60 एक्सपर्ट्स की स्टडी में खुलासा
डॉ. रेड्डीज और नेस्ले हेल्थ साइंस के साझा रिसर्च में सामने आया कि भारतीय मरीजों में डायबिटीज का पैटर्न अलग है, जिसके लिए अलग पोषण रणनीति चाहिए।
भारत में डायबिटीज के मरीजों की तादाद दुनिया में सबसे ज्यादा है, और अब एक नई स्टडी में सामने आया है कि भारतीय मरीजों में यह बीमारी किन खास वजहों से बढ़ रही है। डॉ. रेड्डीज और नेस्ले हेल्थ साइंस लिमिटेड, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड और नेस्ले इंडिया लिमिटेड के साझा प्रोजेक्ट के तहत यह रिसर्च की गई, जिसके मुख्य नतीजे अंतरराष्ट्रीय जर्नल "Diabetes, Metabolic Syndrome and Obesity" में छपे हैं। इस रिसर्च पेपर में कहा गया है कि सिर्फ ब्लड ग्लूकोज कंट्रोल करना काफी नहीं, भारतीय मरीजों के लिए अलग से पोषण से जुड़ी सोच चाहिए, जो मेटाबॉलिक हेल्थ, न्यूट्रिशन और लाइफस्टाइल तीनों को ध्यान में रखे।
यह रिसर्च देशभर के 60 एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट डॉक्टरों की राय के आधार पर की गई। इसमें भारतीय डायबिटीज मरीजों की अलग खासियतें देखी गईं और डॉक्टरों के रोजमर्रा के इलाज में पोषण मैनेजमेंट सुधारने के व्यावहारिक तरीके सुझाए गए। स्टडी में शामिल 98 फीसदी एक्सपर्ट्स ने माना कि भारतीय डायबिटीज मरीजों में कुछ खास लक्षण होते हैं जिनके लिए सही पोषण रणनीति जरूरी है, वहीं 86 फीसदी एक्सपर्ट्स का कहना था कि इन लक्षणों को पहचानना डायबिटीज को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए अहम है।
एक्सपर्ट्स के सर्वे के मुताबिक भारतीय डायबिटीज मरीजों में जो 6 खास बातें सामने आईं, वे हैं: ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाना (82 फीसदी एक्सपर्ट्स ने बताया), पेट के आसपास मोटापा यानी सेंट्रल ओबेसिटी (78 फीसदी), इंसुलिन रेजिस्टेंस (76 फीसदी), प्रोटीन कम खाना (75 फीसदी), मसल मास कम होना (69 फीसदी) और जेनेटिक वजहें (67 फीसदी)। रिसर्च के मुताबिक भारतीय मरीजों के लिए पोषण से जुड़ा कोई भी इलाज बनाते वक्त इन सभी बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
रिसर्च में एक और अहम बात सामने आई, जिसे "डायबेसिटी" कहा गया, यानी डायबिटीज और मोटापे के बीच बढ़ता कनेक्शन। 61 फीसदी एक्सपर्ट्स ने बताया कि उनके पास आने वाले डायबिटीज मरीजों में से आधे से ज्यादा ओवरवेट या मोटापे के शिकार हैं। साथ ही, ज्यादातर एक्सपर्ट्स ने बताया कि 25 फीसदी से ज्यादा मरीज छह महीने या उससे ज्यादा समय तक डाइट से जुड़ी सलाह पर लगातार अमल नहीं कर पाते।
इस पर Diabetes India के मानद सचिव और RSSDI के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बंशी साबू ने कहा कि डायबेसिटी और डाइट फॉलो न कर पाने से जुड़े नतीजे डॉक्टरों के सामने आने वाली दो बड़ी चुनौतियों की तरफ इशारा करते हैं। उनके मुताबिक कई मरीज एक साथ ज्यादा वजन और पोषण की कमी दोनों से जूझ रहे हैं, जबकि लंबे समय तक डाइट में बदलाव बनाए रखना मुश्किल साबित होता है। डॉ. साबू ने कहा कि डॉक्टरों को सिर्फ डाइट पर पाबंदी बताने के बजाय ऐसे तरीकों पर फोकस करना चाहिए जिन्हें मरीज अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में लंबे समय तक अपना सकें।
रिसर्च में डायबिटीज-स्पेसिफिक न्यूट्रिशन फॉर्मूला यानी DSNF की भूमिका पर भी एक्सपर्ट्स ने गाइडेंस दी है, ताकि हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स तय कर सकें कि कब और किन मरीजों में यह पोषण से जुड़ा तरीका सही रहेगा। डॉ. रेड्डीज नेस्ले हेल्थ साइंस में मेडिकल एंड साइंटिफिक अफेयर्स के हेड डॉ. नंदन जोशी ने कहा कि भारत में डायबिटीज मेटाबॉलिक, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़ी खास वजहों से प्रभावित होता है, इसलिए इलाज के तरीके भी अलग रखने पड़ते हैं। उनके मुताबिक क्लिनिकल गाइडलाइंस इलाज का आधार जरूर देती हैं, लेकिन डॉक्टरों को ऐसी व्यावहारिक जानकारी भी चाहिए जो भारतीय मरीजों की असल जिंदगी को ध्यान में रखे।