भारत में बियर के कैन की किल्लत, कंपनियों को पैकेजिंग के लिए कैन नहीं मिल रहे
बियर और कोल्ड ड्रिंक बनाने वाली कंपनियों को पैकेजिंग के लिए एल्युमिनियम कैन जुटाने में दिक्कत आ रही है, पर बियर बाजार से गायब नहीं हो रही।
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अगर आप बियर पीने के शौकीन हैं तो यह खबर आपके काम की है। भारत में बियर और कोल्ड ड्रिंक बनाने वाली कंपनियों को पैकेजिंग के लिए कैन मिलने में दिक्कत हो रही है। इसका असर बाजार में कुछ प्रोडक्ट की सप्लाई पर पड़ सकता है। सवाल यह है कि कैन की यह किल्लत आखिर क्यों हुई और ग्राहकों पर इसका कितना असर पड़ेगा।
इसकी मुख्य वजहें तीन बताई गई हैं। पहली, कैन की मांग लगातार बढ़ रही है। दूसरी, देश के अंदर कैन बनाने की क्षमता सीमित है। तीसरी, पश्चिम एशिया की जंग की वजह से सप्लाई में रुकावट आई है। फिर भी इसका मतलब यह नहीं कि बियर बाजार से पूरी तरह खत्म हो रही है।
भारत में बियर और कोल्ड ड्रिंक की पैकेजिंग के लिए एल्युमिनियम कैन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। पिछले दो साल में बिक्री में कैन का हिस्सा दोगुना हो गया है। अब बियर और कोल्ड ड्रिंक की कुल सालाना बिक्री का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा कैन का है।
सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि बाजार की बढ़ती मांग के हिसाब से कैन का उत्पादन नहीं बढ़ा। ऊपर से पश्चिम एशिया की जंग से अंतरराष्ट्रीय सप्लाई में जो रुकावट आई, उसने कंपनियों की मुश्किल और बढ़ा दी। नतीजा यह है कि बियर और कोल्ड ड्रिंक बनाने वालों को अपने प्रोडक्ट की पैकेजिंग के लिए जरूरत भर के कैन जुटाने में जूझना पड़ रहा है।
ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासंचालक विनोद गिरी के मुताबिक कंपनियों को उम्मीद थी कि देश में अतिरिक्त 60 करोड़ एल्युमिनियम कैन बनेंगे, लेकिन इसका सिर्फ आधा आंकड़ा ही छुआ जा सका। भारत की प्रमुख कैन बनाने वाली कंपनियां अपनी मौजूदा उत्पादन क्षमता का पहले ही पूरा इस्तेमाल कर चुकी हैं।
उत्पादन बढ़ाने के लिए आम तौर पर नई मशीनरी और प्रोडक्शन लाइन लगानी पड़ती है, जिसमें एक साल तक का वक्त लग सकता है। इसी वजह से मांग बढ़ने के बावजूद कैन की कमी को तुरंत दूर करना मुमकिन नहीं हो पा रहा है।
देश के बाजार में कैन कम पड़ने की वजह से कंपनियां दूसरे देशों से कैन मंगा रही हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE), श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे देशों पर भरोसा किया जा रहा है। अहम बात यह है कि इन आयात किए कैन की कीमत देश में बने कैन से करीब 25 से 30 प्रतिशत ज्यादा है, जिससे कंपनियों का पैकेजिंग खर्च बढ़ रहा है।
तो क्या बियर बाजार से गायब हो जाएगी? ऐसा नहीं है। एल्युमिनियम कैन की किल्लत का मतलब यह नहीं कि देश से बियर पूरी तरह खत्म हो जाएगी। अभी असली समस्या बियर और कोल्ड ड्रिंक की कमी की नहीं, बल्कि उन्हें पैक करने वाले कैन की है। इसका असर कुछ ब्रांड की सप्लाई पर पड़ सकता है।
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