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भंडारा के गांवों में खर्रा-सिगरेट की लत में फंस रहे युवा, मुखकर्करोग की चिंता बढ़ी

भंडारा के गांवों में खर्रा-सिगरेट की लत में फंस रहे युवा, मुखकर्करोग की चिंता बढ़ी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

भंडारा जिले में खर्रा, तंबाखू, सिगरेट और शराब की लत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। दोस्तों की संगत, बेरोजगारी और इन चीजों की आसानी से उपलब्धता जैसी कई वजहों से गांवों के युवा इस लत की तरफ जा रहे हैं। शुरुआत में शौक या फैशन के तौर पर शुरू हुआ सेवन आगे चलकर आदत बन जाता है। कुछ जगहों पर तो पिता के साथ बेटा भी खर्रा खाता दिखाई देता है। इस लत का असर सिर्फ सेहत पर नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक हालत पर भी पड़ सकता है।

जिले में नशामुक्ति के लिए सरकारी कोशिशें चल रही हैं, लेकिन जरूरत इस बात की है कि वे गांव के नौजवानों तक असरदार तरीके से पहुंचें। दोस्तों का दबाव, उत्सुकता, बेरोजगारी और भविष्य की फिक्र जैसी वजहों से कुछ युवा नशे की तरफ मुड़ते हैं। पान की टपरियों और छोटी दुकानों से नाबालिगों को तंबाखू वाले पदार्थ बेचे जाते हैं या नहीं, और स्कूल के आसपास के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी नियमित जांच होनी चाहिए। लत की वजह से घर के खर्च या कर्ज पर कितना असर पड़ा, इसके जिलेवार आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी इस सवाल का अध्ययन जरूरी है।

ग्राम पंचायत, स्कूल, युवक मंडल और स्वास्थ्य विभाग को मिलकर जनजागरण, जांच और काउंसलिंग पर जोर देना चाहिए। इलाज के साथ परिवार का सहारा मिलना भी जरूरी है।

कलेक्टर सावन कुमार की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय नार्को कोऑर्डिनेशन समिति की बैठक में नशीले पदार्थों और तंबाखू के खिलाफ कार्रवाई की समीक्षा की गई। स्कूल-कॉलेज के परिसर में जांच के लिए खास टीमें बनाकर नियमित अभियान चलाने की योजना बनाई गई है।

स्वास्थ्य विभाग के जरिए तंबाखू, खर्रा और दूसरी लतों के बुरे असर के बारे में लोगों को लगातार जागरूक किया जाता है। स्कूल-कॉलेजों में बच्चों को नशे से होने वाले शारीरिक नुकसान समझाए जाते हैं। हेल्थ कैंप, काउंसलिंग और जागरूकता के अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए लोगों से नशे से दूर रहने की अपील की जाती है। नशामुक्त समाज बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ स्कूल, ग्राम पंचायत, माता-पिता और आम नागरिकों को भी सक्रिय हिस्सेदारी निभानी चाहिए।

अभियान के तहत 50 हजार 900 एंट्रियां और 802 चालान किए गए। तंबाखू छोड़ने के लिए 175 लोगों को मार्गदर्शन दिया गया, जबकि 7 हजार 649 लोगों की काउंसलिंग की गई। भंडारा केंद्र में 37 हजार 240 एंट्रियां और 526 चालान हुए। जिले में 1 लाख 2 हजार 554 लोगों की मुखकर्करोग जांच की गई।

तंबाखू और खर्रा के सेवन से मुखकर्करोग के साथ मसूड़ों की बीमारियां और मुंह की दूसरी तकलीफें हो सकती हैं। इसलिए तंबाखू से बचना और लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। जिले में जनजागरण, तंबाखू विरोधी कार्रवाई, काउंसलिंग और मुखकर्करोग की जांच की जा रही है, और स्कूल, ग्राम पंचायत, माता-पिता और स्वास्थ्य विभाग के मिले-जुले प्रयास से इन कोशिशों को ज्यादा असरदार बनाया जा सकता है।

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