सूखे से जूझते बल्लारपुर के लिए मुनगंटीवार की कलेक्टर से मांग, किसानों को दिन-रात बिजली मिले
विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने बल्लारपुर विधानसभा क्षेत्र में सूखे जैसे हालात को लेकर शिष्टमंडल के साथ जिलाधिकारी को निवेदन सौंपा और 24 घंटे बिजली, पीने के पानी व चारे की मांग की।
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चंद्रपुर जिले में सूखे का संकट दिन-ब-दिन गहरा रहा है। इसी बीच बल्लारपुर के विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने जिला प्रशासन से तुरंत हरकत में आने को कहा है। वे एक प्रतिनिधिमंडल को साथ लेकर कलेक्टर से मिले और अपनी मांगों का निवेदन उनके हवाले किया। उनका जोर तीन बातों पर रहा: धान की फसल के लिए बिना रुकावट 24 घंटे बिजली, गांवों में पीने का पानी और मवेशियों के लिए चारा।
विधायक का कहना था कि किसानों की फसल बचाना, उनके परिवारों को पैसों की तंगी से उबारना और गांवों की पानी की जरूरत पूरी करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके मुताबिक योजनाएं सिर्फ फाइलों में न बनें, काम जमीन पर होता हुआ दिखना चाहिए। अल नीनो का असर पड़ने की आशंका है, इसलिए पानी की किल्लत और बढ़ने से पहले ही बचाव के इंतजाम हों, किसानों को फसल बचाने की जरूरी सहूलियतें मिलें और हर विभाग अपना काम तय समय में निपटाए।
इस बैठक में अपर जिलाधिकारी डॉ. नितिन व्यवहारे हाजिर थे। जल संरक्षण विभाग की ओर से कार्यकारी अभियंता नीलिमा मंडपे आई थीं। खेती के महकमे का प्रतिनिधित्व जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी शंकर तोटावार ने किया। गांवों में पेयजल पहुंचाने वाले विभाग से कार्यकारी अभियंता सुमित बेलपत्रे आए थे, जबकि महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की तरफ से कार्यकारी अभियंता संजय अष्टगी पहुंचे। इनके अलावा कुछ और अधिकारी भी मौजूद रहे।
बिजली के मुद्दे पर मुनगंटीवार ने याद दिलाया कि चंद्रपुर खुद बिजली बनाने वाला जिला है। ऐसे में यहीं के किसानों को सिंचाई के लिए पूरी बिजली न मिल पाना ठीक नहीं। उन्होंने बताया कि धान अभी आखिरी दौर में है और उसे पानी की सख्त जरूरत है, इसलिए आने वाले कुछ दिन सिंचाई के लिए चौबीसों घंटे लगातार बिजली चलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने मांग रखी कि किसानों को दिन-रात बिजली देने की अलग नीति बने और तीन दिन के अंदर उस पर फैसला हो। खेती के पंपों का कनेक्शन न काटा जाए, और अगर कहीं ऐसा हुआ तो जिम्मेदार लोगों पर उचित कार्रवाई की जाए, यह बात भी उन्होंने साफ शब्दों में कही।
पानी रोकने और जमा करने के सवाल पर विधायक ने कहा कि जलयुक्त शिवार अभियान में जो काम हो चुके हैं, उनका ठीक से इस्तेमाल करके पानी को रोका जाए और भंडार बढ़ाया जाए। जल संरक्षण विभाग को उन्होंने चार दिन का वक्त दिया है, जिसमें जरूरी जगहों पर पानी रोकने का काम निपटाना है। जहां जरूरत हो वहां नालों को गहरा किया जाए और कच्चे बांध बनाए जाएं। इलाके के जल संरक्षण कामों का पूरा खाका तैयार हो, और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर बनाने के लिए जानकार स्टाफ का इंतजाम किया जाए।
पीने के पानी को लेकर उन्होंने सात दिन के भीतर फौरन बैठक बुलाने को कहा। साथ ही बल्लारपुर विधानसभा क्षेत्र में अब तक कितने टैंकर भेजे गए, इसका ब्योरा सामने रखने की बात कही। जल जीवन मिशन के जो काम चल रहे हैं, उन्हें सात महीने में पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठाने को भी उन्होंने कहा। जानवरों के पीने के पानी का मसला इंसानों जितना ही अहम है, यह रेखांकित करते हुए उन्होंने हर गांव के लिए अलग योजना बनाने को कहा। इसमें जरूरत के हिसाब से पानी की टंकियां बनवाना और सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप लगाना शामिल हो। कितनी टंकियां चाहिए, यह तय करके काम तुरंत शुरू किया जाए।
बारिश के रिकॉर्ड का मुद्दा भी उन्होंने उठाया। उनके मुताबिक बल्लारपुर तहसील के बामणी में बारिश नापने का सिर्फ एक यंत्र लगा है। सूखे की रिपोर्ट बनाते समय बारिश के आंकड़े सही और असली हालात बताने वाले होने चाहिए, वरना किसानों के साथ नाइंसाफी होगी। उन्होंने जिला कृषि अधीक्षक से इस पर खास ध्यान देने और सूखे की रिपोर्ट में बल्लारपुर तहसील का नाम जुड़वाने के लिए जरूरी कार्रवाई करने को कहा।
मुनगंटीवार ने इसे गंभीर बात बताया कि अल नीनो के संभावित असर की पहले से खबर होने के बावजूद पानी का भंडार घटता रहा और बचाव के उपायों में देर हुई। नदी से सिंचाई के लिए पानी उठाने वाले किसानों पर कार्रवाई करने की जगह प्रशासन को उनकी जरूरत समझनी चाहिए और फसल बचाने के लिए जो करना पड़े, करना चाहिए। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि राज्य सरकार के निर्देश के मुताबिक सूखा निवारण की समितियां बनी हैं या नहीं। अगर बनी हों तो अब तक कितनी बैठकें हुईं और उनमें क्या तय हुआ, इसका ब्योरा पेश किया जाए। उपायों की नियमित समीक्षा के लिए हर सोमवार बैठक करने का निर्देश भी उन्होंने दिया।
कर्ज वसूली पर रोक और परीक्षा फीस में माफी की मांग भी इसी कड़ी में रखी गई। विधायक ने कहा कि सूखे की मार सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रहती, पूरा किसान परिवार उसे भुगतता है। इसलिए खेती से जुड़े कर्जों की वसूली रोकी जाए और किसानों से एक साथ पूरी रकम न वसूली जाए। आर्थिक तंगी में फंसे किसानों के बच्चों की स्कूल और कॉलेज की परीक्षा फीस माफ करने के बारे में जरूरी जानकारी जुटाने को भी उन्होंने कहा। रोजगार गारंटी योजना के नियमों में जो ढील देना जरूरी है, उस पर स्थिति साफ की जाए ताकि सूखे से प्रभावित इलाकों के लोगों को काम मिल सके। किसान और खेत मजदूर परिवारों को अनाज की कमी न हो, इसके लिए अन्न व नागरिक आपूर्ति विभाग की व्यवस्था की समीक्षा करके जरूरी कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए।
मवेशियों के चारे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जिले के पशुधन के आंकड़े तालुका के हिसाब से जुटाए जाएं और चारा कितना है और कितना कम पड़ सकता है, इसकी समीक्षा के लिए पशुपालन विभाग की बैठक हो। चारा उगाने के लिए बीज की उपलब्धता पक्की की जाए। उनकी एक मांग यह भी थी कि कृषि विभाग के जरिए ग्राम पंचायतों में नाम दर्ज कराने वाले किसानों को मक्का का बीज मुफ्त दिया जाए।
आगे की सोच के तौर पर विधायक ने कृषि विभाग से कहा कि वह इस बात का अध्ययन करे कि क्या दूसरी फसलों से किसानों की आमदनी को सहारा मिल सकता है। रबी के मौसम में सरसों और अलसी की खेती की संभावना जांचने को भी कहा गया। इसमें खासकर पोंभुर्णा और मूल तालुका के मानोरा जैसे इलाकों का जिक्र आया।