मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:50 IST

बदलती उम्र में महिलाएं इन लक्षणों को न टालें, पुणे की डॉक्टर ने बताया

पुणे की स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. पायल नारंग के मुताबिक बार-बार होने वाले असामान्य लक्षणों पर डॉक्टर से मिलना जरूरी है।

बदलती उम्र में महिलाएं इन लक्षणों को न टालें, पुणे की डॉक्टर ने बताया
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

पुणे : उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में माहवारी में बदलाव, पेट फूलना, पेट के निचले हिस्से में दर्द या रजोनिवृत्ति के बाद ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखते हैं। अक्सर यह कहकर उन्हें टाल दिया जाता है कि यह उम्र की वजह से हो रहा होगा। इस बारे में मदरहूड हॉस्पिटल, लुल्लानगर, पुणे की स्त्रीरोग और प्रसूति विशेषज्ञ डॉ. पायल नारंग ने विस्तार से जानकारी दी है।

डॉ. नारंग के मुताबिक कई बार ये लक्षण मामूली वजहों से भी हो सकते हैं। लेकिन अगर वे बार-बार हो रहे हों या रोज की तुलना में अलग महसूस हो रहे हों, तो उन्हें नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर रूप ले सकता है। गर्भाशय, गर्भाशय के मुख, अंडाशय, योनि और बाहरी जननेंद्रिय से जुड़े कैंसर में भी ऐसे लक्षण दिख सकते हैं। इसलिए शरीर में दिखने वाले असामान्य बदलावों पर वक्त रहते ध्यान देकर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

डॉ. नारंग ने बताया कि परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए घर की महिलाएं अक्सर अपनी सेहत को ज्यादा अहमियत नहीं देतीं। माहवारी अनियमित हो तो वजह उम्र मान ली जाती है। पेट लगातार फूल रहा हो तो मान लिया जाता है कि यह अपच या गैस की वजह से है। पेट के निचले हिस्से की बेचैनी को उम्र के साथ आने वाली आम परेशानी समझ लिया जाता है। रजोनिवृत्ति के बाद ब्लीडिंग हो तो भी उसे हार्मोन के बदलाव का नतीजा मानकर टाल दिया जा सकता है।

उनके मुताबिक कई बार ये बदलाव किसी गंभीर समस्या का इशारा हो सकते हैं। इन कैंसरों में कुछ लक्षण ऐसे दिखते हैं जो आम हार्मोनल या पाचन की दिक्कतों जैसे लगते हैं। इसलिए शरीर में हमेशा से अलग कुछ महसूस हो तो वक्त पर मेडिकल जांच करा लेनी चाहिए।

डॉ. नारंग ने माहवारी की ब्लीडिंग में अचानक आए बदलाव को अहम संकेत बताया। माहवारी रोज से ज्यादा हो, ज्यादा दिन चले या दो माहवारी के बीच ब्लीडिंग हो और ये बदलाव नए हों, तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। खासकर रजोनिवृत्ति के बाद होने वाली किसी भी ब्लीडिंग को सिर्फ उम्र या हार्मोन का बदलाव समझकर नहीं टालना चाहिए। ऐसी ब्लीडिंग के पीछे कैंसर के अलावा दूसरी वजहें भी हो सकती हैं, मगर इसके लिए मेडिकल जांच जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कभी-कभार पेट फूलना आम बात है। लेकिन लगातार पेट फूलना, निचले पेट में दर्द या बेचैनी, या थोड़ा सा खाने पर भी पेट भरा-भरा लगना बार-बार हो रहा हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण नए शुरू हुए हों, बार-बार हो रहे हों या धीरे-धीरे बढ़ रहे हों, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

डॉ. नारंग के मुताबिक निचले पेट के दर्द की कई वजहें हो सकती हैं। गर्भाशय में सिस्ट, एंडोमेट्रियोसिस, संक्रमण या पाचन की दिक्कतों से भी ऐसा दर्द हो सकता है। मगर बिना किसी साफ वजह के दर्द लगातार हो रहा हो, खासकर साथ में माहवारी में बदलाव, ब्लीडिंग या पेशाब से जुड़ी शिकायतें हों, तो मेडिकल सलाह लेनी चाहिए। उनका कहना है कि दर्द असहनीय होने तक रुकने की जरूरत नहीं है।

योनि से असामान्य या लगातार होने वाले स्राव की भी जांच करानी चाहिए, खासकर जब उसमें खून हो या बदबू आए। बाहरी जननेंद्रिय के हिस्से में लगातार खुजली, त्वचा का रंग बदलना, घाव या छाले होना, सिस्ट होना या घाव का ठीक न होना जैसे बदलावों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इसके अलावा बिना वजह वजन कम होना, लगातार थकान रहना या पेशाब और शौच की आदतों में बदलाव जैसे लक्षण दूसरी शिकायतों के साथ दिखें, तो डॉक्टर से बात करना जरूरी है। डॉ. नारंग ने साफ कहा कि हर असामान्य लक्षण का मतलब कैंसर नहीं होता। इनमें से कई के पीछे साधारण वजहें होती हैं या ऐसी वजहें जिनका कैंसर से लेना-देना नहीं है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लगातार दिखने वाले लक्षणों को टालना भी ठीक नहीं है।

डॉ. नारंग के अनुसार महिलाओं को अपने शरीर के रोज के बदलावों का सबसे ज्यादा अंदाजा होता है। इसलिए कुछ भी रोज से अलग लगे, बार-बार हो या सामान्य ढर्रे में साफ बदलाव दिखे, तो डॉक्टर से बात करना अहम है। वक्त पर मेडिकल जांच हो तो वजह समझना और जरूरी इलाज जल्दी शुरू करना मुमकिन होता है।

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