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16:21 IST

बच्चों पर IIT-IIM का बोझ न डालें, वहां पढ़े माता-पिता ने खुलकर रखी अपनी बात

IIT और IIM जैसे बड़े संस्थानों से पढ़े कुछ माता-पिता अब नहीं चाहते कि उनके बच्चे भी उसी रास्ते पर चलें।

बच्चों पर IIT-IIM का बोझ न डालें, वहां पढ़े माता-पिता ने खुलकर रखी अपनी बात तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

IIT और IIM जैसे बड़े संस्थानों से पढ़कर निकले कुछ माता-पिता अब अपने बच्चों पर उसी रास्ते पर चलने का दबाव नहीं डालना चाहते। उनका मानना है कि कामयाबी के लिए सिर्फ बड़ी डिग्री ज़रूरी नहीं है। उनके हिसाब से बच्चों को अपनी पसंद पहचानने, हुनर सीखने और अपनी पसंद का करियर चुनने की आज़ादी मिलनी चाहिए।

आज बहुत से माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा बड़े स्कूल में पढ़े, अच्छे नंबर लाए और आगे चलकर IIT या IIM जैसे नामी संस्थान में दाखिला ले। इसके लिए बच्चे छोटी उम्र से ही पढ़ाई और मुकाबले वाले इम्तिहानों की तैयारी में लग जाते हैं। लेकिन क्या कामयाबी के लिए हर बच्चे का इसी रास्ते पर चलना ज़रूरी है? क्या अच्छी ज़िंदगी जीने के लिए किसी बड़े संस्थान की डिग्री होना ही सबसे अहम है? इन सवालों पर सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई है। खास बात यह है कि इस बहस में देश के बड़े शैक्षणिक संस्थानों से पढ़े लोग खुद शामिल हैं। वे नहीं चाहते कि बच्चों पर अपनी पसंद का करियर चुनने को लेकर दबाव रहे। उनकी इच्छा है कि बच्चे ज़िंदगी का मज़ा लें, काम के लिए ज़रूरी हुनर सीखें और अपनी मर्ज़ी से अपना भविष्य बनाएं।

यह चर्चा उद्यमी आबिद हसन की एक पोस्ट के बाद शुरू हुई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर अपने एक दोस्त से हुई बातचीत का ज़िक्र किया। उनका दोस्त IIM अहमदाबाद से पढ़ा हुआ है। बातचीत में दोस्त ने बताया कि वह अपने बच्चों पर IIT या IIM में दाखिला लेने का दबाव नहीं डालना चाहता। अगर उसके बच्चे ज़िंदगी का आनंद लेते हुए अपनी पसंद का रास्ता चुनते हैं, तो उसे भी खुशी ही होगी।

आबिद हसन ने इस बात को अलग नज़रिए से देखा। उनका मानना था कि बड़े संस्थानों में पढ़ने और करियर में आगे बढ़ने का एक फायदा यह भी हो सकता है कि आदमी ऐसे मुकाम पर पहुंच जाए, जहां अपनी ज़िंदगी के फैसले लेने के लिए उसे किसी खास डिग्री या नौकरी की ज़रूरत न रहे। इस सोच ने सोशल मीडिया पर लोगों को सोचने पर मजबूर किया कि क्या सच्ची कामयाबी का मतलब सिर्फ बड़ी डिग्री और अच्छी नौकरी पाना ही है।

इसी चर्चा में IIM अहमदाबाद से पढ़े एक और शख्स की सोच भी सामने आई। उनका कहना था कि कारोबार शुरू करने के लिए MBA की डिग्री होना ज़रूरी नहीं है। उन्होंने अपने बैच के कई लोगों की मिसाल दी, जिन्होंने आगे चलकर अपना खुद का कारोबार शुरू किया। इससे सवाल उठता है कि अपना काम शुरू करने के लिए महंगे संस्थान से पढ़ना ज़रूरी है, या सही जानकारी, हुनर और तजुर्बे के दम पर भी आगे बढ़ा जा सकता है।

उन्होंने बताया कि मेडिसिन से जुड़े मॉडर्न स्किनकेयर के क्षेत्र में उन्होंने कई अहम बातें BTech और IIM की पढ़ाई के अलावा दूसरे तजुर्बों से सीखीं। शुरुआत में उन्होंने इंजीनियरिंग चुनी थी, क्योंकि उन्हें लगता था कि गणित पसंद करने वाले विद्यार्थियों के लिए करियर के विकल्प सीमित होते हैं। बाद में अपनी पसंद से उन्होंने IIM अहमदाबाद से MBA किया। उनकी बात का मुख्य संदेश यही था कि हर इंसान को अपनी पसंद के हिसाब से पढ़ाई और करियर चुनने की आज़ादी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, "अपनी पसंद चुनने की आज़ादी मुझे सबसे ज़्यादा पसंद है." यानी ज़िंदगी में क्या करना है, इसका फैसला दूसरों की उम्मीदों से नहीं, अपनी पसंद और ज़रूरतों से होना चाहिए।

भारत में IIT और IIM जैसे संस्थानों में दाखिला लेना लाखों विद्यार्थियों का सपना होता है। इन संस्थानों से पढ़े कई लोगों को अच्छा करियर और नौकरी के मौके मिलते हैं। पर इसका मतलब यह नहीं कि हर विद्यार्थी को कामयाब होने के लिए यही रास्ता पकड़ना चाहिए। किसी को नौकरी करना पसंद होता है, तो किसी को अपना कारोबार करना होता है। कुछ बच्चे आर्ट्स, स्पोर्ट्स, टेक्नॉलॉजी या किसी और क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। ऐसे में सबसे एक ही तरह की उम्मीद रखना उन पर दबाव बन सकता है। उन्हें अपनी पसंद पहचानने और अलग-अलग क्षेत्र समझने का मौका मिलना ज़रूरी है।

चर्चा में कुछ लोगों ने यह भी कहा कि आर्थिक सुरक्षा हो तो आदमी को अपनी पसंद का काम करने और नए रास्ते चुनने की आज़ादी मिलती है। साथ ही बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत का ख्याल रखना भी उतना ही अहम है। पढ़ाई के साथ खेलना, दोस्तों के साथ वक्त बिताना और पसंद के काम करना भी उनके विकास का हिस्सा है।

अक्सर माता-पिता बच्चों को वही करियर चुनने के लिए प्रेरित करते हैं, जो उन्हें खुद सबसे अच्छा लगता है। कुछ चाहते हैं कि बच्चे भी उनकी तरह IIT या IIM से पढ़ें। लेकिन हर बच्चे की पसंद, क्षमता और सपने अलग होते हैं, इसलिए माता-पिता का पसंदीदा रास्ता बच्चे के लिए सही हो, यह ज़रूरी नहीं।

इस पूरी बहस का मकसद IIT, IIM या अच्छी पढ़ाई को बुरा ठहराना नहीं है। इन संस्थानों में पढ़ने के अपने फायदे हैं। असली सवाल यह है कि क्या किसी एक खास डिग्री को ही कामयाबी का इकलौता पैमाना मानना ठीक है। बच्चों को अच्छी पढ़ाई देना, हुनर सिखाना और सही फैसले लेने में मदद करना माता-पिता की अहम ज़िम्मेदारी है, पर उनके भविष्य का हर फैसला पहले से तय कर देना ज़रूरी नहीं। किसी बच्चे के लिए बड़ी कंपनी में नौकरी करना कामयाबी हो सकती है, तो किसी दूसरे के लिए अपना कारोबार शुरू करना या पसंदीदा क्षेत्र में काम करना।

आखिर में, कामयाबी का मतलब सिर्फ बड़ा पद, बड़ी तनख्वाह या नामी संस्थान की डिग्री नहीं है। अपने काम से संतुष्ट रहना, ज़िंदगी का आनंद लेना और अपनी पसंद के फैसले लेने की आज़ादी होना भी उतना ही मायने रखता है।

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