सोम‌वार, 2 नवंबर 2026

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अनजान नंबर से कॉल आए तो स्क्रीन पर दिखेगा रजिस्टर्ड नाम, CNAP सुविधा शुरू

अनजान नंबर से कॉल आए तो स्क्रीन पर दिखेगा रजिस्टर्ड नाम, CNAP सुविधा शुरू तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

दूरसंचार विभाग के निर्देश पर 1 नवंबर 2026 से देश भर के मोबाइल यूजर्स को कॉल करने वाले का रजिस्टर्ड नाम नंबर के साथ दिखने लगेगा।

अनजान नंबर से फोन आने पर अब यह अंदाजा लगाना शायद कम पड़ेगा कि सामने कौन है। 1 नवंबर 2026 से पूरे भारत के मोबाइल यूजर्स को कॉल के वक्त नंबर के साथ कॉल करने वाले का रजिस्टर्ड नाम भी दिखने लगेगा। यह सुविधा Calling Name Presentation, यानी CNAP के नाम से आ रही है।

यह व्यवस्था दूरसंचार विभाग (DoT) के निर्देशों के तहत लाई गई है। इसका मकसद कॉल करने वाले की पहचान आसान बनाना है और स्पैम कॉल, किसी और के नाम से बात करने और फोन से होने वाली धोखाधड़ी पर लगाम कसना है।

अब तक अनजान कॉलर को पहचानने के लिए ज्यादातर Truecaller जैसे थर्ड पार्टी ऐप का सहारा लेना पड़ता था, या फिर नंबर को खुद ऑनलाइन चेक करना पड़ता था। CNAP में कॉलर का रजिस्टर्ड नाम सीधे टेलीकॉम नेटवर्क के जरिए स्क्रीन पर आएगा, भले ही वह नंबर सामने वाले की कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव न हो।

नाम वही दिखेगा जो उस मोबाइल कनेक्शन के सिम रजिस्ट्रेशन और KYC के वक्त दर्ज हुआ था। जिन नंबरों के नाम फोन में पहले से सेव हैं, उनके सेव किए हुए नाम पहले की तरह ही दिखते रहेंगे। अनजान कॉलर के मामले में उसके रजिस्टर्ड सब्सक्राइबर का नाम मोबाइल नंबर के साथ नजर आएगा।

यूजर्स को इसके लिए कोई ऐप डाउनलोड करने या अलग से रजिस्टर करने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि सुविधा अपने आप चालू हो जाएगी। शुरुआत में यह 4G और 5G नेटवर्क पर लागू होगी। पुराने नेटवर्क के लिए अमल पर अलग से विचार किया जाएगा।

तो क्या Truecaller की जरूरत खत्म हो जाएगी? नाम की बुनियादी पहचान के लिए थर्ड पार्टी कॉलर आइडेंटिफिकेशन ऐप पर निर्भरता घट सकती है। भीड़ से जुटाए गए डेटाबेस के उलट CNAP कॉलर की जानकारी टेलीकॉम कंपनियों के सब्सक्राइबर रिकॉर्ड से लेगा।

फिर भी एक बात समझ लेना जरूरी है। स्क्रीन पर रजिस्टर्ड नाम दिख जाने का मतलब यह नहीं कि कॉल असली या सुरक्षित है। ठग असली या हैक किए गए मोबाइल कनेक्शन का इस्तेमाल करके भी लोगों को चकमा दे सकते हैं।

प्राइवेसी को लेकर दूरसंचार विभाग ने कुछ इंतजाम भी बताए हैं। जो सब्सक्राइबर Calling Line Identification Restriction (CLIR) सुविधा से अपनी कॉलर पहचान छिपाते हैं, उनका नाम CNAP में नहीं दिखाया जाएगा। कारोबारियों को भी तय दस्तावेज और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करने पर अपना वेरिफाइड ट्रेड या ब्रांड नेम दिखाने की इजाजत मिल सकती है।

करोड़ों मोबाइल यूजर्स के लिए इसका मतलब यह हो सकता है कि अनजान नंबर उठाने से पहले ही पता चल जाए कि फोन कौन कर रहा है। चाहे डिलीवरी एक्जीक्यूटिव हो, कोई बिजनेस रिप्रेजेंटेटिव, सर्विस प्रोवाइडर या कोई अनजान आदमी, उसकी रजिस्टर्ड पहचान अब सीधे फोन की स्क्रीन पर दिख सकती है। यानी अनजान नंबर अब पूरी तरह अनजान नहीं रहेंगे।

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