मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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21:33 IST

अनंत चतुर्दशी 2026: बाप्पा के विसर्जन की सही तारीख और शुभ मुहूर्त जानिए

24 या 25 सितंबर, गणपति बाप्पा को कब दें विदाई, जानिए अनंत चतुर्दशी का सही मुहूर्त और महत्व

अनंत चतुर्दशी 2026: बाप्पा के विसर्जन की सही तारीख और शुभ मुहूर्त जानिए
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का त्योहार बहुत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित है, और इसी दिन लाडके गणपति बाप्पा को भावुक माहौल में विदाई दी जाती है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करके हाथ में अनंत सूत्र बांधने से जिंदगी की सारी मुसीबतें दूर हो जाती हैं और सुख-समृद्धि मिलती है। इस बार अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को मनाई जाएगी, और इस दिन रवि योग समेत कई शुभ योग भी बन रहे हैं।

पंचांग के हिसाब से भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर 2026 की रात 11 बजकर 17 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 25 सितंबर 2026 की रात 11 बजकर 8 मिनट पर खत्म होगी। शास्त्रों के उदयातिथि नियम के हिसाब से 25 सितंबर यानी शुक्रवार के दिन ही अनंत चतुर्दशी मनाना शास्त्रसम्मत और शुभ माना जाएगा।

25 सितंबर को बाप्पा का विसर्जन करने के लिए तीन मुख्य शुभ मुहूर्त रहेंगे। सुबह का लाभ चौघड़िया सुबह 07:41 से सुबह 09:11 बजे तक रहेगा। इसके बाद सुबह का अमृत चौघड़िया सुबह 09:11 से सुबह 10:42 बजे तक होगा। तीसरा मुहूर्त दोपहर का शुभ चौघड़िया है, जो दोपहर 12:12 से दोपहर 01:43 बजे तक रहेगा।

अनंत भगवान की पूजा का मुख्य शुभ मुहूर्त 25 सितंबर को सुबह 06:28 से रात 11:06 बजे तक रहेगा। इसी वक्त के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करके अनंत सूत्र बांधा जा सकता है।

पूजा की विधि की बात करें तो इस दिन सुबह जल्दी उठकर नहाना चाहिए और साफ कपड़े पहनने चाहिए। पूजा की जगह को साफ करके भगवान विष्णु की मूर्ति या फोटो रखनी चाहिए और उन्हें पीले फूल, फल, पंचामृत, धूप और दीप चढ़ाने चाहिए। पूजा के दौरान 14 गांठों वाला अनंत सूत्र, यानी रेशमी धागा, भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करना चाहिए। इसके बाद अनंत व्रत की कथा पढ़नी चाहिए, विष्णु भगवान की आरती करनी चाहिए, और आखिर में वही अनंत सूत्र बांधना चाहिए, पुरुषों को दाहिने हाथ की कलाई पर और महिलाओं को बाएं हाथ की कलाई पर।

धार्मिक महत्व की बात करें तो अनंत सूत्र में जो 14 गांठें होती हैं, उन्हें 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है। यह पूजा करने से अक्षय यानी अनंत पुण्यफल मिलता है, ऐसी मान्यता है। महाभारत में पांडवों ने भी अपने वनवास के समय सारी मुसीबतों से मुक्ति पाने के लिए अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा था। इसी वजह से माना जाता है कि यह व्रत रखने से जिंदगी की सारी परेशानियां दूर होकर सुख-शांति मिलती है।

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