अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में भारतीय रंग: कहीं डोसा बना, तो कहीं मंदिर पहुंचे उम्मीदवार
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के आखिरी दौर में उम्मीदवार भारतीय-अमेरिकन वोटरों तक पहुंचने के लिए रेस्टोरेंट और मंदिरों का रुख कर रहे हैं। वोटिंग 3 नवंबर को है।
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (US Midterm Elections) का प्रचार अब आखिरी दौर में है और सियासी माहौल गरमाया हुआ है। जीत की चाबी हाथ लगाने के लिए अलग-अलग पार्टियों के नेता और उम्मीदवार वोटरों को लुभाने के नए तरीके आजमा रहे हैं। इस बार के प्रचार की खास बात यह है कि उम्मीदवारों ने भारतीय-अमेरिकन समुदाय को अपने प्रचार के केंद्र में रखा है। भारतीय वोटरों की बढ़ती तादाद और उनकी सियासी ताकत को देखते हुए उम्मीदवार भारतीय संस्कृति से जुड़ने का रास्ता अपना रहे हैं। कोई भारतीय रेस्टोरेंट में जाकर गरमागरम डोसा बनाता दिख रहा है, तो कोई हिंदू मंदिरों में जाकर प्रार्थना कर रहा है और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहा है।
इस अनोखे प्रचार का सबसे बड़ा चेहरा डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जेम्स टैलारिको (James Talarico) बने हैं। वे टेक्सास (Texas) की सीनेट सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और रिपब्लिकन पार्टी के दिग्गज उम्मीदवार केन पैक्सटन (Ken Paxton) को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। प्रचार के दौरान टैलारिको डलास के उपनगर इर्विंग (Irving) के एक मशहूर भारतीय रेस्टोरेंट पहुंचे। वहां उन्होंने सिर्फ वोटरों से बातचीत नहीं की, बल्कि शेफ की टोपी पहनकर तवे पर चावल के आटे का कुरकुरा मसाला डोसा भी तैयार किया।
टैलारिको ने डोसा बनाकर केले के पत्ते पर परोसा, तो वहां मौजूद भारतीय समुदाय ने तालियां बजाकर उनकी कोशिश की सराहना की। उनके इस अंदाज के वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। कारोबारी और सियासी विश्लेषक जेम्स ब्लंट (James Blunt) ने इस कोशिश का जोरदार समर्थन किया। ब्लंट ने कहा, "एक तरफ रिपब्लिकन समर्थकों की ओर से भारतीयों और उनके खान-पान को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां की जा रही हैं, वहीं टैलारिको भारतीय चावल से बने स्वादिष्ट डोसे के जरिए लोगों के दिल जोड़ने का काम कर रहे हैं। एक तरफ बांटने वाली राजनीति है, तो दूसरी तरफ सहयोग का रुख है।"
मामला सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है। जिन राज्यों में भारतीय-अमेरिकन आबादी ज्यादा है, वहां मंदिर अब उम्मीदवारों की सियासी बातचीत के मुख्य ठिकाने बन गए हैं। कनेक्टिकट (Connecticut) में दूसरे कार्यकाल के लिए चुनावी मैदान में उतरे गवर्नर नेड लैमोंट (Ned Lamont) स्टेट कैपिटल में हुए बड़े दिवाली समारोह में शामिल हुए। उनके साथ डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जेनिफर बारहोना भी थीं। उन्होंने भारतीय समुदाय के साथ दीप जलाकर त्योहार मनाया।
ओहायो (Ohio) में कांग्रेस सदस्य ग्रेग लैंड्समन (Greg Landsman) मशहूर BAPS स्वामीनारायण मंदिर गए। वे मंदिर के 11वें सालाना पाटोत्सव में पहुंचे और हिंदू-अमेरिकन समुदाय की सेवाभावना की तारीफ की। न्यू जर्सी (New Jersey) के सीनेटर कोरी बुकर (Cory Booker) मशहूर अक्षरधाम मंदिर पहुंचे, वहां दिवाली समारोह में हिस्सा लिया और भारतीय समुदाय से सीधी बातचीत की।
पेन्सिल्वेनिया के हैरिसबर्ग (Harrisburg) इलाके में रिपब्लिकन कांग्रेस सदस्य रैंडी फाइन (Randy Fine) और स्कॉट पेरी (Scott Perry) ने भारतीय वोटरों तक पहुंचने के लिए स्थानीय मंदिरों का दौरा किया। इन दौरों का मकसद भारतीय समुदाय के सवाल जानना और उनकी धार्मिक आस्था का सम्मान करना बताया गया है। मिशिगन (Michigan) के कांग्रेस सदस्य जॉन जेम्स (John James) ने भी स्वामीनारायण मंदिर जाकर वहां की परंपराओं, स्थापत्य और हिंदू-अमेरिकन समुदाय की सामाजिक सेवा के बारे में विस्तार से जानकारी ली। मिशिगन जैसे कांटे के राज्य में 1 से 2 फीसदी वोट भी निर्णायक होते हैं, इसलिए इस दौरे को सियासी तौर पर अहम माना जा रहा है।
कैलिफोर्निया, टेक्सास, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन, इलिनॉय, पेन्सिल्वेनिया और जॉर्जिया जैसे बड़े राज्यों में भारतीय-अमेरिकन आबादी काफी है। खासकर पेन्सिल्वेनिया, मिशिगन, जॉर्जिया और नॉर्थ कैरोलिना जैसे "बैटलग्राउंड स्टेट्स" (Battleground States) में हार-जीत का फासला बहुत कम रहता है। ऐसे में 1 से 2 फीसदी भारतीय वोटरों का वोट भी उम्मीदवारों की किस्मत बदल सकता है। इसी वजह से उम्मीदवार भारतीय समुदाय को अपनी ओर खींचने में पूरी ताकत लगा रहे हैं। अब 3 नवंबर को होने वाली वोटिंग में देखना दिलचस्प होगा कि इस "डोसा डिप्लोमसी" और "मंदिर दौरों" से उम्मीदवारों को कितना फायदा मिलता है।
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