अमेरिकी कृषि विभाग का अनुमान: 2027 में भारत का चावल निर्यात 4 फीसदी घटकर 24 मिलियन टन
यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर के मुताबिक कम बारिश और घटे रकबे से भारत का चावल उत्पादन और निर्यात दोनों घट सकते हैं।
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चीनी के बाद अब भारत के चावल के निर्यात को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर की रिपोर्ट के मुताबिक 2027 में भारत का चावल निर्यात 4 फीसदी घटकर 24 मिलियन टन तक आ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि टूटे चावल और सफेद चावल के निर्यात में गिरावट, देश के भीतर बढ़ती कीमतें और निर्यात के लिए उपलब्ध चावल की मात्रा में कमी का असर सप्लाई पर पड़ सकता है।
दुनिया के चावल निर्यात में भारत का हिस्सा 40 फीसदी से ज्यादा है। इसलिए देश के उत्पादन और निर्यात में गिरावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ सकता है। यूएसडीए के मुताबिक तेज अल नीनो हालात ने मानसून पर काफी असर डाला है और यह आगे भी जारी रह सकता है।
इसकी वजह से 2026-27 के फसल वर्ष में भारत का चावल उत्पादन 4.5 फीसदी गिरकर 147 मिलियन टन तक आ सकता है। राइस विला के सह-संस्थापक और सीईओ सूरज अग्रवाल ने कहा कि कम बारिश की वजह से उत्पादन घटने की आशंका है, इसलिए देश के बाजार में चावल के दाम बढ़ सकते हैं।
चालू खरीफ सीजन में धान की बुआई का रकबा पिछले सीजन के मुकाबले 3.7% घटकर 42.92 मिलियन हेक्टेयर रह गया है। कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रकबे में खास गिरावट दिखी है।
आंकड़ों के मुताबिक कर्नाटक में धान का रकबा 4.6 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 4.3 लाख हेक्टेयर, आंध्र प्रदेश में 1.8 लाख हेक्टेयर और तमिलनाडु में 1.5 लाख हेक्टेयर कम हुआ है। रकबे में कमी और बारिश की कमी का असर आगे के उत्पादन पर पड़ सकता है।
2015-16 के बाद पहली बार भारत के चावल उत्पादन में गिरावट आ सकती है। 2025-26 के फसल वर्ष में भारत ने करीब 154 मिलियन टन चावल पैदा किया था और दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बना था।
यूएसडीए ने 2027 के लिए वैश्विक चावल व्यापार का अपना अनुमान 1.3 मिलियन टन घटा दिया है। वैश्विक निर्यात में भारत का हिस्सा 40-45% है, इसलिए सप्लाई में इस कटौती का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है।