मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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अक्टूबर में महाराष्ट्र में 95 फीसदी कम बारिश, 12 जिलों में एक बूंद भी नहीं गिरी

अक्टूबर में महाराष्ट्र में 95 फीसदी कम बारिश, 12 जिलों में एक बूंद भी नहीं गिरी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

राज्य में अक्टूबर में औसत 74 मिमी की जगह सिर्फ 3.6 मिमी पानी गिरा। नवंबर की शुरुआत में पुणे, अहिल्यानगर और सातारा में जोरदार बारिश से राहत मिली, पर पानी की किल्लत का खतरा बना हुआ है।

महाराष्ट्र में अक्टूबर के आखिर और नवंबर की शुरुआत में अचानक बारिश आई। पुणे, अहिल्यानगर और सातारा जिलों में अच्छा पानी गिरा और उमस से परेशान लोगों को थोड़ी राहत मिली। लेकिन आंकड़े देखें तो पूरे अक्टूबर महीने में राज्य में बहुत कम बारिश हुई है। औसत के मुकाबले 95 फीसदी कम पानी गिरा, इसलिए पानी की किल्लत का संकट और गहराने की आशंका है।

अक्टूबर में महाराष्ट्र में औसतन 74 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। असल में सिर्फ 3.6 मिमी बारिश दर्ज हुई। इसी वजह से राज्य में 95 फीसदी की कमी सामने आई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य के 12 जिलों में पूरे अक्टूबर महीने में एक बूंद भी नहीं गिरी। इन जिलों में बारिश की कमी 100 फीसदी रही।

जिन जिलों में अक्टूबर में शून्य बारिश दर्ज हुई, वे हैं मुंबई शहर, धुले, जलगांव, नंदुरबार, सोलापुर, बीड, छत्रपती संभाजीनगर, धाराशिव, हिंगोली, जालना, लातूर और परभणी। मुंबई शहर में इस महीने औसतन 73.5 मिमी पानी गिरना चाहिए था, मगर असल में बारिश हुई ही नहीं। मराठवाड़ा में भी पूरे महीने एक मिलीमीटर बारिश नहीं हुई।

अब विभागों के हिसाब से हाल देखें। मुंबई उपनगर में 81.2 मिमी बारिश की उम्मीद थी और 14.6 मिमी गिरी, यानी 82 फीसदी की कमी। मध्य महाराष्ट्र में 77.9 मिमी की जगह 4.1 मिमी पानी गिरा और कमी 95 फीसदी रही। विदर्भ में 57.8 मिमी की उम्मीद थी, लेकिन सिर्फ 2.2 मिमी बारिश हुई, यानी 96 फीसदी कम। कोकण और गोवा में 116.4 मिमी की जगह 19.1 मिमी बारिश दर्ज हुई और कमी 84 फीसदी रही।

कोकण में भी हालत अच्छी नहीं रही। पालघर और रायगड जिलों में बारिश 96 फीसदी कम रही, जबकि ठाणे जिले में 84 फीसदी की कमी दर्ज हुई। यानी कोकण विभाग में भी पानी बहुत कम गिरा।

अक्टूबर भर बारिश गायब रही, पर नवंबर की शुरुआत में राज्य के कुछ हिस्सों में जोरदार एंट्री हुई। पुणे, अहिल्यानगर और सातारा जिलों में मूसलाधार बारिश हुई। अचानक आई इस बारिश से कई जगह सड़कें पानी में डूब गईं। पानी जमा होने से ट्रैफिक बिगड़ गया और लोगों को भागदौड़ करनी पड़ी। फिर भी उमस से हैरान लोगों को इससे कुछ राहत जरूर मिली।

राज्य में कहीं-कहीं बेमौसम बारिश हो रही है, लेकिन अक्टूबर की भारी कमी इससे पूरी नहीं हुई है। खासकर मराठवाड़ा और विदर्भ के कई इलाकों में पानी की कमी बनी हुई है। किसानों, आम लोगों और प्रशासन, सबके लिए पानी का नियोजन अब अहम होगा। नवंबर में आगे कितनी बारिश होती है, इसी पर तय होगा कि राज्य में पानी की किल्लत कितनी गंभीर होगी और खेती की हालत कैसी रहेगी।

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